बांड वाले डॉक्टरों के लिए स्वास्थ्य विभाग का नया फरमान, पढ़कर बढ़ जाएगी टेंशन
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अब बांडधारी डॉक्टरों के विभाग ने नया फरमान जारी किया है। ऐसे में डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेज के बजाय सीधे पहाड़ चढ़ाया जाएगा। एमबीबीएस और नॉन पीजी जेआर को पांच वर्षों तक पहाड़ों पर सेवाएं देनी होगी।
स्वास्थ्य महानिदेशक ने 129 डॉक्टरों को पहाड़ पर तैनाती दी है। बांडधारी डॉक्टरों के पहाड़ पर सेवाएं देने का मामला नया नहीं है। एमबीबीएस और इंटर्नशिप पूरी होने के बाद सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में डॉक्टर एक वर्ष तक अपनी सेवाएं देते थे और फिर उन्हें पहाड़ भेजा जाता था।
नॉन पीजी जेआर को भी राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन अपनी कमी पूरी करने के लिए रोक लेता था। डॉक्टरों को पहाड़ भेजने को लेकर अनुबंध स्वास्थ्य विभाग से है। देहरादून मेडिकल कॉलेज और राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में एमबीबीएस कर चुके और नान पीजी जेआर को नियुक्ति नहीं दी गई।
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी से नान पीजी जेआर के 21 और एमबीबीएस पूरा कर चुके 108 डॉक्टरों को पहाड़ भेजा गया है। नॉन पीजी जेआर बांड की शर्तों के अनुसार एक वर्ष की सेवा राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी को दे चुके हैं और अब चार वर्षों तक अपनी सेवाएं पहाड़ पर देंगे।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि अगर जरूरत पड़ेगी तो विज्ञापन निकालकर पीजी जेआर रखे जाएंगे। सभी डॉक्टरों को पहाड़ भेजने के आदेश हुए हैं। डॉक्टरों को तैनाती स्थल का नियुक्ति पत्र दिया जा रहा है। डॉक्टरों को बीस दिनों के भीतर पहाड़ के विभिन्न जिलों में ज्वाइन करना है।