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Anubhav Sinha: उत्तराखंड में फिल्मों को लेकर क्या बोले निर्देशक अनुभव सिन्हा?, देखिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

Sat, 01 Nov 2025 03:00 AM IST
अलका त्यागी रुद्रेश कुमार, अमर उजाला, देहरादून
रुद्रेश कुमार, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 01 Nov 2025 03:00 AM IST
सार

देहरादून पहुंचकर बेहद उत्साहित नजर आए अनुभव सिन्हा ने एक रेस्त्रां में पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ उठाया। उन्होंने कहा कि उनका देवभूमि से पुराना नाता रहा है।

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Bollywood film Director Anubhav Sinha say about films in Uttarakhand exclusive interview
डायरेक्टर अनुभव सिन्हा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड का दृश्य चरित्र अद्भुत है। यहां जितनी फिल्में बननी चाहिएं, उतनी बन नहीं रही हैं। यह बात आर्टिकल- 15, मुल्क, थप्पड़ जैसी समाज को आईना दिखाने वाली फिल्मों के निर्माता, लेखक और डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने कही। देश को जानने के लिए शुरू की यात्रा के एक पड़ाव में सिन्हा शुक्रवार को देहरादून पहुंचे थे। उन्होंने अमर उजाला कार्यालय पहुंचकर फिल्मी दुनिया और वर्तमान परिदृश्य पर खुलकर अपनी बात रखी।

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अनुभव सिन्हा ने बातचीत के दौरान फिल्म निर्माण और वर्तमान कहानियों पर भी बात की। सिन्हा बीते कई वर्षों से देश में चल रहे विभिन्न घटनाक्रमों और पुरानी व्यवस्थाओं पर चोट करने वाली फिल्में बना रहे हैं। उनमें जातिवाद पर चोट करने वाली आर्टिकल 15, सांप्रदायिक माहौल पर मुल्क मुख्य हैं। इसके अलावा फिल्म अनेक के जरिए उन्होंने उत्तर पूर्व राज्यों के अलगाववाद को भी बखूबी दर्शाया। कोविड काल में मजदूरों की दौड़ भाग को उन्होंने भीड़ फिल्म में दिखाया।
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अनुभव अपनी इन फिल्मों के बारे में बताते हैं कि ऐसी फिल्में बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सच्ची फिल्म बनाते हैं तो उसके लिए देश को जानना जरूरी है। यह भ्रम नहीं रहना चाहिए कि हम सब कुछ जानते हैं। फिल्म अनेक के लिए उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों को करीब से जाना। इस यात्रा का अभी उद्देश्य तो नहीं बनाया है लेकिन उम्मीद है कि आने वाले समय में अच्छा परिणाम निकलेगा।

कई राज्य फिल्म नीतियों को धरातल पर नहीं उतार पाए
राज्यों की फिल्म नीतियों पर उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने अपनी फिल्म नीतियों को प्रसारित प्रचारित किया है मगर धरातल पर उतारने में कामयाब नहीं हो पाए। फिल्म निर्माता और ब्यूरोक्रेसी के बीच संवाद नहीं हो पाता है। यही कारण है कि इन नीतियों का लाभ फिल्म इंडस्ट्री को नहीं मिला। फिल्म इंडस्ट्री एक अलग तरह का उद्योग है। उसे समझकर ही सरकारों को काम करना होगा। नीतियों के संबंध में उत्तराखंड से उम्मीद है कि इसका लाभ फिल्म उद्योग को मिलेगा।

गांव की बहुत कहानी मगर स्क्रीनप्ले का विज्ञान कोई नहीं सिखाता
आजकल फिल्मों में गांव की कहानी नहीं दिखती इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गांव में खूब कहानियां लिखी जा रही हैं मगर उन्हें स्क्रीन राइटिंग में कौन बनाए। स्क्रीन राइटिंग एक विज्ञान है। इस विज्ञान को कोई इंस्टीट्यूट नहीं सिखाता न सरकारी और न प्राइवेट। गांव के विषय में उन्होंने बॉलीवुड के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में ज्यादातर लोग देश के अलग अलग हिस्सों से आए हैं। पूरे देश को समझने के मामले में पहुत पीछे हैं। एक लाइन में उन्होंने कहा कि बॉलीवुड की बाकी देश से गर्भनाल कटी हुई है।

देवभूमि से पुराना नाता, बोले-यहां मकान खरीदना चाहिए
देहरादून पहुंचकर बेहद उत्साहित नजर आए अनुभव सिन्हा ने एक रेस्त्रां में पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ उठाया। उन्होंने कहा कि उनका देवभूमि से पुराना नाता रहा है। वह 70 के दशक में करीब नौ साल तक कालागढ़ क्षेत्र में रहे हैं। यहां उनकी बचपन की यादें हैं। देहरादून की वादियां, यहां की खूबसूरती, मौसम ने उन्हें लुभा दिया है। उन्होंने कहा-निश्चित तौर पर यहां एक मकान खरीदना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि वह केदारनाथ यात्रा करना चाहते हैं।

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