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बोर्डिंग स्कूल गैंगरेप प्रकरण: आरोप साबित नहीं कर पाई पुलिस, तीनों नाबालिग आरोपियों को मिली जमानत  

Tue, 04 Jun 2019 08:16 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 04 Jun 2019 08:16 AM IST
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Boarding school Sexual assault case Bail Petition of three Minor accused Approved

देहरादून में बोर्डिंग स्कूल सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में तीनों बाल अपराधियों को सोमवार को किशोर न्याय बोर्ड ने बरी कर दिया। इस प्रकरण में पुलिस दुष्कर्म के आरोप को साबित नहीं कर पाई।

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अभियोजन की ओर से प्रस्तुत नौ गवाहों के बयान भी पूरे घटनाक्रम से मेल नहीं खाए। साक्ष्यों के अभाव और संदेह के आधार पर किशोर न्याय बोर्ड ने तीनों बाल अपराधियों को बाल सुधार गृह हरिद्वार से मुक्त करने के आदेश दिए।
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पिछले साल 16 सितंबर को भाऊवाला स्थित बोर्डिंग स्कूल में एक छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले का खुलासा हुआ था। घटनाक्रम 14 अगस्त 2018 का बताया गया था। दुष्कर्म का आरोप स्कूल के ही तीन नाबालिग और एक बालिग छात्र पर था। इस मामले में पुलिस ने 16 सितंबर 2018 की शाम को ही आरोपियों को पकड़ लिया था।
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इस प्रकरण में प्रिंसिपल समेत प्रबंधन से जुड़े चार लोगों को भी आरोपी बनाया गया था। इनमें से तीन बाल अपराधियों का मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड में और बाकी का विशेष पोक्सो कोर्ट में चल रहा है।

किशोर न्याय बोर्ड में अभियोजन पक्ष ने मुकदमे की विवेचना अधिकारी और बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा समेत कुल नौ गवाह पेश किए थे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सौरभ दुसेजा ने बताया कि अभियोजन के किसी भी गवाह के बयान घटनाक्रम से मेल नहीं खा सके। लिहाजा, यशदीप राउते की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने सोमवार को तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। 

रिपोर्ट में सिर्फ छेड़छाड़ की बात
इस मामले में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष की गोपनीय रिपोर्ट भी अभियोजन के आरोपों को बल नहीं दे सकी। रिपोर्ट में कहीं भी दुष्कर्म का जिक्र नहीं था। इसमें केवल छेड़छाड़ की बात लिखी गई थी। ऐसे में यह बात सिद्ध नहीं हो सकी कि 14 अगस्त को छात्रा से दुष्कर्म हुआ था। 

एसओ और पीड़िता की बहन को नहीं बनाया गवाह 
किशोर न्याय बोर्ड में चल रहे इस मामले में तत्कालीन एसओ सहसपुर नरेश राठौर को गवाह नहीं बनाया गया था। जबकि, नरेश राठौर ने ही 16 सितंबर को पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया था। यही नहीं न पीड़िता की बहन और न ही उसकी सहेली को गवाह बनाया गया।

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