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हरीश रावत के लिए भाजपा का विधायक छोड़ेगा सीट
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 31 Jan 2014 10:55 AM IST
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हरीश रावत उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेते हैं तो उनकी पार्टी नहीं बल्कि भाजपा का एक विधायक अपनी सीट उन्हें सौंपने जा रहा है।
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पहले भी ऐसा हुआ था
ऐसा ही कुछ भुवन चंद्र खंडूरी के मुख्यमंत्री बनने पर हुआ था, जब कांग्रेस विधायक टीपीएस रावत ने धूमाकोट सीट छोड़ी थी। वहीं, मुख्यमंत्री बहुगुणा के लिए भाजपा के विधायक किरण मंडल ने सितारगंज सीट छोड़ी थी।
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बताते हैं कि हरीश रावत ने आलाकमान के सामने विधायकों की संख्या के लिए यही तर्क रखा है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अपने विधानसभा क्षेत्र सितारगंज से इस्तीफा नहीं देंगे। कांग्रेस अपने सभी 33 सदस्यों को बनाए रखना चाहती है।
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ऐसे में सहयोगी दलों के विधायकों का दबाव आने वाली सरकार पर कम रहेगा। कांग्रेस आलाकमान उन्हें टिहरी से लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी देने का मन बना रही थी, लेकिन बहुगुणा ने बेटे साकेत की उम्मीदवारी तय करने को कहा है।
मुख्यमंत्री समर्थकों की मानें तो बहुगुणा फिलहाल कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। महीनों से चल रही उठापटक के बीच भाजपा के कुछ नेता सरकार बनाने का ख्वाब सजाने लगे थे, लेकिन हरीश रावत आते ही उन्हें पहला झटका, उनकी संख्या में एक की कमी करके देंगे।
बता दें कि किसी भी मुख्यमंत्री को छह महीने के भीतर विधानसभा की सदस्यता लेनी होती है।
गढ़वाली ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष की तलाश
हरीश रावत की मुख्यमंत्री पद पर उम्मीदवारी की सूचना के बाद ही कांग्रेस में क्षेत्र और जाति समीकरण बैठाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। चूंकि हरीश रावत कुमाऊं से और ठाकुर बिरादरी के हैं इसलिए गढ़वाली ब्राह्मण को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के कयास लगने लगे हैं।
गढ़वाल से प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी के लिए वैसे तो सतपाल महाराज लंबे से लगे हैं, लेकिन ब्राह्मण समीकरण में विधायक नवप्रभात और उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना की मजबूत दावेदारी बनती है।
रावत के लिए सीट छोड़ने को तैयार खर्कवाल
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के उत्तराधिकारी को लेकर संशय फिलहाल थमा नहीं है। दौड़ में सबसे आगे चल रहे केंद्रीय मंत्री हरीश रावत के समर्थक कांग्रेसी विधायक राजधानी में डटे हैं।
रावत के कट्टर समर्थक माने जाने वाले चंपावत के विधायक हेमेश खर्कवाल भी कई दिनों से देहरादून में ही डेरा डाल उनके पक्ष में माहौल बना रहे हैं।
उनका कहना है कि हरीश रावत को प्रदेश सरकार की बागडोर सौंपने से सरकार के साथ ही संगठन को भी नई ऊर्जा मिलेगी। उनका कहना है कि रावत को वे अपनी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने को मनाएंगे।