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प्रमुख वन संरक्षक के प्रयासों को पलीता लगा रहा जलविद्युत निगम
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शक्ति नहर के इंटैक से हर दिन भारी मात्रा में निकलने वाले कूड़े का निस्तारण नहीं होने से झील के किनारों पर गंदगी और दुर्गंध का वातावरण बना हुआ है। इससे यहां आने वाले पर्यटक व पक्षी प्रेमियों को परेशानी हो रही है।
प्राकृतिक सुंदरता व विदेशी पक्षियों के प्रवास के लिए प्रसिद्ध आसन बैराज की झील में पक्षियों की मौजूदगी का जायजा लेने के लिए दो दिन पहले आए प्रमुख वन संरक्षक व पक्षी विशेषज्ञ डॉ. धनजंय मोहन ने झील के आसपास फैली गंदगी पर चिंता जताई थी। इसके अलावा उन्होंने वन विभाग को झील के आसपास के वातावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए थे।
दूसरी ओर बैराज से कुल्हाल व उत्तर प्रदेश के खारा तक जाने वाली शक्ति नहर पर बनी बिजली परियोजनाओं को साफ पानी की आपूर्ति देने के लिए बनाए गए इंटैक से प्रतिदिन भारी मात्रा में कूड़ा निकाला जाता है। इस कूड़े को झील के एक किनारे पर एकत्रित किया जाता है जहां यह दुर्गंध व गंदगी का पर्याय बना रहता है। निस्तारण नहीं होने के कारण भारी मात्रा में कूड़ा झील के किनारे पर एकत्रित हो रहा है। दुर्गंध व कूड़े के कारण झील की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाने व प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। समस्या के संबंध में जलविद्युत निगम के अधिकारियों के पास कोई ठोस जवाब भी नहीं है। जलविद्युत निगम के यमुना वैली महाप्रबंधक मोहम्मद गुलफिशां का कहना है कि इस संबंध में निगम के उच्च अधिकारियों से बात करके समस्या का समाधान किया जाएगा।
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प्राकृतिक सुंदरता व विदेशी पक्षियों के प्रवास के लिए प्रसिद्ध आसन बैराज की झील में पक्षियों की मौजूदगी का जायजा लेने के लिए दो दिन पहले आए प्रमुख वन संरक्षक व पक्षी विशेषज्ञ डॉ. धनजंय मोहन ने झील के आसपास फैली गंदगी पर चिंता जताई थी। इसके अलावा उन्होंने वन विभाग को झील के आसपास के वातावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए थे।
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दूसरी ओर बैराज से कुल्हाल व उत्तर प्रदेश के खारा तक जाने वाली शक्ति नहर पर बनी बिजली परियोजनाओं को साफ पानी की आपूर्ति देने के लिए बनाए गए इंटैक से प्रतिदिन भारी मात्रा में कूड़ा निकाला जाता है। इस कूड़े को झील के एक किनारे पर एकत्रित किया जाता है जहां यह दुर्गंध व गंदगी का पर्याय बना रहता है। निस्तारण नहीं होने के कारण भारी मात्रा में कूड़ा झील के किनारे पर एकत्रित हो रहा है। दुर्गंध व कूड़े के कारण झील की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाने व प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। समस्या के संबंध में जलविद्युत निगम के अधिकारियों के पास कोई ठोस जवाब भी नहीं है। जलविद्युत निगम के यमुना वैली महाप्रबंधक मोहम्मद गुलफिशां का कहना है कि इस संबंध में निगम के उच्च अधिकारियों से बात करके समस्या का समाधान किया जाएगा।
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