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भीमताल झील के तटबंध से रिसने लगा पानी, खतरा
चंद्रेश पांडे / अमर उजाला, भीमताल
Updated Sun, 04 Jan 2015 01:12 PM IST
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लगभग 135 साल पुराने भीमताल झील के तटबंध के एक हिस्से में बड़ी दरार आ गई है। जलस्तर बढ़ते ही तटबंध की दीवार से भीमेश्वर महादेव मंदिर की ओर पानी का रिसाव भी होने लगा है।
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लोगों के लिए खतरनाक
यही नहीं तटबंध में कई जगह झाड़ियां और छोटे-छोटे पेड़ भी उग आए हैं। इन पेड़ों की जड़ें दीवार में धंस रही हैं, वो भी तटबंध और उसके मुहाने पर बसे करीब 50 लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
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इस तटबंध को अंग्रेजों ने वर्ष 1880 में बनवाया था। तब लगभग 100 वर्ष तक इसके टिकने का आकलन किया गया था। अब जर्जर तटबंध के प्रति सरकार और महकमा कितना सचेत है।
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इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसका मुख्य स्कैब गेट (ताश) वर्ष 1980 से खराब है, जिसे ठीक कराने के बजाए विभाग ने इस खराब ताश से पानी का रिसाव रोकने के लिए वहां सीमेंट और रोड़ी बजरी के कट्टे डालकर कामचलाऊ व्यवस्था की है।
बीते दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते जैसे ही शनिवार को झील का जलस्तर बढ़कर 44 फुट पहुंचा तो तटबंध की जर्जर दीवारों से भीमेश्वर महादेव मंदिर की ओर कई स्थानों पर पानी का रिसाव शुरू हो गया है। जिस जगह से पानी रिस रहा है, ठीक उसी के पास सिंचाई विभाग के जिलेदार का दफ्तर भी है।
इधर, डांठ में सुलभ शौचालय के ठीक सामने तटबंध में पड़ी दरार दिन प्रतिदिन और अधिक बढ़ रही है। ऐसे में तटबंध का यह हिस्सा कभी भी दरक सकता है। इस दरार के ठीक नीचे रहने वाले नगर पंचायत के सफाई कर्मियों के दर्जन भर से अधिक परिवारों को भी खतरा बना हुआ है।
...कभी कुछ हुआ तो मचेगी तबाही
भीमताल झील के बूढ़े हो चुके बांध (तटबंध) यदि कभी टूटा तो तटबंध के मुहाने पर रहने वाले करीब 50 लोगों के साथ-साथ घटिगाड़, बिलासपुर, नौकुचियाताल के तोक नौल और साहखोला, हरिनगर, मल्ला ढुंगशिल, बेरीजाला, खैरोला पंत, खैरोला पांडे समेत रानीबाग के अमृतपुर और अमिया क्षेत्र में तबाही मच सकती है।
तटबंध में जहां-जहां से पानी का रिसाव हो रहा है, उसे चिन्हित कराया जाएगा, ताकि गर्मियों में झील का जलस्तर कम होने पर उसकी मरम्मत कराई जा सके। झीलों के संरक्षण समेत विभिन्न कार्यों के लिए भी शासन से राशि स्वीकृत होने की उम्मीद है। राशि मिलते ही तटबंध की मरम्मत भी कराई जाएगी।
- डीसीएस खेतवाल, मुख्य अभियंता (उत्तर) सिंचाई विभाग