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बदरीनाथ धाम की अनोखी परंपरा: हर चढ़ावे का पूरा हिसाब भगवान बदरीनाथ को था सुनाया जाता, 2021 तक के बाद हुई बंद

Mon, 20 Jul 2026 07:38 AM IST
Renu Saklani प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली Published by: Renu Saklani Updated Mon, 20 Jul 2026 07:38 AM IST
सार

बदरीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद, सोना-चांदी और अन्य भेंट का पूरा हिसाब शयन आरती के बाद भगवान बदरीनाथ के समक्ष पढ़कर सुनाया जाता था। यह व्यवस्था वर्ष 2021 तक जारी रही, जबकि वर्ष 2012 में चढ़ावे की गणना करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनने के निर्देश को लेकर भी विवाद सामने आया था।

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Badrinath Temple Unique Tradition Donations Were Announced Before Lord Badrinath Ritual History
बदरीनाथ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बदरीनाथ धाम में वर्षों तक एक अनूठी धार्मिक परंपरा का पालन किया जाता था। जब भी मंदिर के दान पात्रों और थाली भेंट की गणना पूरी होती थी, तो चढ़ावे का पूरा ब्योरा भगवान बदरीविशाल को सुनाया जाता था। इस परंपरा के तहत बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी शयन आरती के बाद मंदिर के मंडप में पहुंचते थे और गर्भगृह की ओर मुख करके नकद धनराशि, सोना, चांदी तथा अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा विवरण पढ़कर सुनाते थे।

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बीकेटीसी के तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने 2012 में यह व्यवस्था शुरू की थी। व्यवस्था के अनुसार खजांची गणना में हुई रकम और सोना, चांदी व अन्य वस्तुओं को अभिलेख में दर्ज कर सीईओ को सौंपता था। जिसके बाद रात को तीर्थयात्रियों, धर्माधिकारी व वेदपाठियों की मौजूदगी में सीईओ भगवान से प्रार्थना करते हुए कहते थे कि, प्रभु, विभिन्न माध्यमों से प्राप्त यह समस्त चढ़ावा आपका है और इसका उपयोग भी आपके ही निमित्त तथा मंदिर व्यवस्था के संचालन में किया जाएगा।

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इसे मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता था। कोरोना काल में यह व्यवस्था चलती रही। वर्ष 2021 में सीईओ बीडी सिंह के सेवानिवृत होने के बाद यह व्यवस्था भी बंद हो गई। इसके बाद से दान पात्रों की गणना तो नियमित रूप से होती रही लेकिन भगवान को चढ़ावे का सार्वजनिक रूप से हिसाब सुनाने की यह व्यवस्था समाप्त हो गई। हाल के घटनाक्रमों के बीच इस परंपरा के बंद होने की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। पूर्व सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि वर्ष 2012 में बदरीनाथ के चढ़ावे की गणना में शामिल होने वाले लोगों को ढांगरी (बिना जेब वाले कपड़े) पहनने का आदेश जारी किया गया।
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इसका कर्मचारियों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि गणना कक्ष में बिना जेब वाले कपड़े पहनने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पूर्व में गणना में माणा, बामणी, पांडुकेश्वर गांव के साथ ही पंडा पंचायत के चार-चार प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की व्यवस्था भी बनाई गई थी, मगर यह व्यवस्था भी नहीं चल पाई।

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