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Dehradun News: सचिव आपदा प्रबंधन के नाम से फेसबुक आईडी बना ठगी का प्रयास

Mon, 26 May 2025 12:06 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 26 May 2025 12:06 AM IST
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Attempt of fraud by creating Facebook ID in the name of Secretary Disaster Management
I फर्जी अकाउंट से लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर मांगे जा रहे हैं रुपये
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Iसीआरपीएफ अधिकारी का सस्ता सामान खरीदने का भी दिया जा रहा प्रलोभनI
Iसचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर लोगों से ठगी का प्रयास किया गया। इस आईडी के माध्यम से लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर उनसे पैसे की मांग की जा रही है।I
Iइसके अलावा कई लोगों को सीआरपीएफ के अधिकारी का घरेलू सामान सस्ते में बेचने का प्रलोभन दिया जा रहा है। सचिव को जब उनके परिचितों ने इस बारे में जानकारी दी तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने साइबर थाने की जांच के बाद शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया है। सचिव विनोद कुमार सुमन ने पुलिस को बताया कि उनकी फोटो, पदनाम और विभागीय विवरण का प्रयोग कर एक फेसबुक आईडी बनाई गई है। इस आईडी में 321 फ्रेंड और म्यूचुअल फ्रेंड हैं। इसके माध्यम से लोगों से रुपये मांगे जा रहे हैं। इनमें से विनय गुप्ता, मनीष झा, लोकेश शर्मा, इब्राहीम आदि लोगों ने उनसे संपर्क कर मामले की सत्यता पूछी थी। इसके बाद उन्हें इस बात का पता चला।I
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Iशहर कोतवाल प्रदीप पंत ने बताया कि मामले में फेसबुक आईडी का स्क्रीन शॉट और अन्य जानकारियां जुटाई गई हैं। विशेषज्ञों की मदद से इसमें जांच की जा रही है कि आखिर इस आईडी से कितने लोगों को ठगा गया है। जिन लोगों से संपर्क किया गया है उनके बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
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Iइस तरह कर रहे लोगों से संपर्कI
Iइस फेसबुक आईडी से पहले लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा जाता है। यह स्वीकार होने के बाद उनसे पैसे मांगे जाते हैं। इसके अलावा इनमें से कई लोगों से फेसबुक मैसेंजर से बात की जाती है। इसमें उन्हें बताया जाता है कि वह सीआरपीएफ के अधिकारी हैं। उनका ट्रांसफर कहीं ओर हो गया है। लिहाजा, वह घरेलू सामान सस्ते दाम में बेच रहे हैं। बातचीत होने पर उन्हें नंबर दे दिया जाता है। जो नंबर दिया गया है वह किसी संतोष कुमार, सीआरपीएफ के नाम से है। यह जानकारी ट्रू कॉलर के माध्यम से मिल रही है।I

Iओएलएक्स फ्रॉड को जाने लोग तो फेसबुक का सहाराI
Iदरअसल, सैन्य और अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारियों के ट्रांसफर के बाद उनका घरेलू सामान बेचने के मामले दो साल पहले तक खूब आते थे। ज्यादातर मामलों में ओएलएक्स वेबसाइट का सहारा लिया जाता था। सैन्य अधिकारियों के प्रोफाइल से मिलते जुलते प्रोफाइल बनाकर लोगों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद उन्हें आधार कार्ड और आईडी कार्ड भेजकर विश्वास में लिया जाता था। एक के बाद एक हजारों मामले आए तो लोग विभिन्न माध्यमों से इस फ्रॉड के बारे में जागरूक हो गए, लेकिन अब इस तरह की ठगी के लिए फेसबुक के इस्तेमाल का यह नया मामला है।I
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