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हंगामा के बीच चार बार स्थगित हुआ विस सदन
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, गैरसैंण
Updated Wed, 11 Jun 2014 10:07 AM IST
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विधानसभा का सत्र दूसरे दिन हंगामेदार रहा। विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी के साथ सदन में पहुंचा था तो सरकार हर हाल में विधायी कार्य पूरे करा लेना चाहती थी।
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भारी शोरगुल की बीच अनुपूरक बजट पास
लिहाजा सरकार के जरूरत से ज्यादा डिफेंसिव मोड में और विपक्ष के तेवरों के तीखेपन से सदन की कार्यवाही चार बार स्थगित हुई। भारी शोरगुल की बीच सरकार ने अनुपूरक बजट पास कराने के साथ ही विधेयकों को भी सदन की मंजूरी दिला ली।
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एफएल-2 पर नियम 310 के तहत चर्चा पर स्पीकर ने कोई ध्यान नहीं दिया तो नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट आक्रामक तरीके से स्पीकर के आसन की तरफ बढ़ गए। भट्ट ने इस मामले में पूरी कैबिनेट को कटघरे में खड़ा किया।
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विपक्ष के तेवरों से सदन का माहौल इतना तनावभरा हो गया कि स्पीकर को सदन स्थगित करना पड़ा। दूसरे दिन भी गैरसैंण के लोग गैरों की तरह ही दिखे।
सत्र की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई तो विपक्ष ने अपनी रणनीति के अनुसार आबकारी विभाग के एफएल-2 के मुद्दे पर 310 के तहत चर्चा कराने की मांग की। लेकिन स्पीकर ने प्रश्नकाल के बाद सुनने का आश्वासन दिया।
और, इसके बाद वही हुआ जो होता है। स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने नियम 58 के तहत चर्चा कराना मंजूर किया। यहीं से हालात नाजुक होने शुरू हुए और समूचा विपक्ष वेल में आकर हंगामा करने लगा।
विपक्ष इस मुद्दे पर 310 के तहत ही चर्चा चाहता था। लेकिन स्पीकर ने विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव पर ध्यान नहीं देते हुए सोमवार को विधानसभा के पटल पर रखे गए अनुपूरक बजट को बगैर किसी चर्चा के ही विभागवार मंजूर करा लिया।
वेल में हंगामा करते रहे भाजपा सदस्य
इसी के साथ विगत दिवस पटल पर रखे गए भी संशोधन विधेयक भी मंजूर करा लिए। इधर, नेता प्रतिपक्ष माइक से लगातार चर्चा की मांग करते रहे और भाजपा सदस्य वेल में हंगामा करते रहे।
विपक्ष का पारा इसलिए भी चढ़ गया क्योंकि सरकार ने शोरगुल के बीच सारा बिजनेस पास करा लिया।
बिजनेस पास कराने के बाद जैसे ही स्पीकर ने विपक्ष की तरफ रुख कर इस चर्चा को नियम 310 के तहत सुनने की हामी भरी तो नेता प्रतिपक्ष का पारा हाई हो गया और वह माइक से चिल्लाते हुए स्पीकर के आसन की तरफ बढ़े।
इसी बीच विस मार्शलों ने नेता प्रतिपक्ष को पीठ की तरफ बढ़ने से रोकना चाहा तो वह और ज्यादा बिगड़ गए। मौके की नजाकत देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
इसके बाद यह लड़ाई विधानसभा के कानूनी दांव पेंच को लेकर और ज्यादा बढ़ गई। सारा बिजनेस पास कराने के बाद स्पीकर का 310 के तहत चर्चा कराने की हामी भरना विपक्ष को अखर गया।
क्योंकि बिजनेस पास होने के बाद नियम 310 की ज्यादा अहमियत नहीं रहती। क्योंकि 310 काम रोको प्रस्ताव होता है। यानि समस्त कार्य रोककर उक्त बिन्दु पर चर्चा कराई जाए। क्योंकि इस नियम के तहत मत विभाजन होता है।
और, जब बजट पास हो ही गया तो फिर वोटिंग की गुंजाइश नहीं रहती। यही नेता प्रतिपक्ष का आरोप भी था। लेकिन स्पीकर ने कहा कि नियम 310 का मामला सबसे पहले रखना चाहिए था। विपक्ष इसे सुबह ही रख चुका था।
कुल मिलाकर इसी कशमकश में आज दूसरे दिन भी गैरसैंण के हाथ कुछ नहीं लगा। जहां राजधानी बनाने की जद्दोजहद हो रही है वहां के अवस्थापना कार्यों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।