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काशीपुर: 27 असम राइफल्स में तैनात हवलदार शहीद, हाई टेंशन लाइन की चपेट में आने से हुआ हादसा
Sun, 20 Jan 2019 11:09 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 20 Jan 2019 11:09 PM IST
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Assam Rifles Hawaldar
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27 असम राइफल्स में हवलदार के पद पर इंफाल (मणिपुर) में तैनात जसपाल सिंह रावत हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर शहीद हो गए। वह 41 वर्ष के थे।
सोमवार को उनका शव काशीपुर लाया जाएगा। रावत मूलत: धुमाकोट के ग्राम सागेड़ा के रहने वाले थे। 22 वर्ष पूर्व उनकी भर्ती मेघालय के शिलांग में हुई थी। 19 जनवरी को डयूटी के दौरान वह एक स्थान से दूसरे स्थान को सीढ़ी लेकर जा रहे थे। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। उनके छोटे भाई हर्ष पाल भी वहीं तैनात हैं।
उनके पिता राजेंद्र सिंह वर्ष 1995 में 6 मैकेनाइज गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत्त हुए थे। जसपाल ने 2013 में यहां सैनिक कॉलोनी में मकान बनाया था। वह मई 2018 में दो माह की छुट्टी पर घर आए थे। उन्होंने कुछ दिन पूर्व काशीपुर आने को छुट्टी के लिए आवेदन किया था लेकिन उनकी छुट्टी स्वीकृत नहीं हुई थी।
परिवार में पत्नी उर्मिला के अलावा तीन बेटियां मोनिका (16) सोनिका (13) अनामिका (9) और बेटा आकाश (छह) हैं। तीनो बेटियां शिवालिक होली माउंट और पुत्र मारिया असुम्पटा में पढ़ता है। शहीद जसपाल का शव सोमवार को काशीपुर लाया जाएगा।
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सोमवार को उनका शव काशीपुर लाया जाएगा। रावत मूलत: धुमाकोट के ग्राम सागेड़ा के रहने वाले थे। 22 वर्ष पूर्व उनकी भर्ती मेघालय के शिलांग में हुई थी। 19 जनवरी को डयूटी के दौरान वह एक स्थान से दूसरे स्थान को सीढ़ी लेकर जा रहे थे। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। उनके छोटे भाई हर्ष पाल भी वहीं तैनात हैं।
उनके पिता राजेंद्र सिंह वर्ष 1995 में 6 मैकेनाइज गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत्त हुए थे। जसपाल ने 2013 में यहां सैनिक कॉलोनी में मकान बनाया था। वह मई 2018 में दो माह की छुट्टी पर घर आए थे। उन्होंने कुछ दिन पूर्व काशीपुर आने को छुट्टी के लिए आवेदन किया था लेकिन उनकी छुट्टी स्वीकृत नहीं हुई थी।
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परिवार में पत्नी उर्मिला के अलावा तीन बेटियां मोनिका (16) सोनिका (13) अनामिका (9) और बेटा आकाश (छह) हैं। तीनो बेटियां शिवालिक होली माउंट और पुत्र मारिया असुम्पटा में पढ़ता है। शहीद जसपाल का शव सोमवार को काशीपुर लाया जाएगा।
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