संघर्षों का सागर पार कर छुआ अरविंद ने शिखर
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वर्ल्ड रिकार्ड तोड़ने के बाद अरविंद (27) आज भले देश-दुनिया में पहचान हासिल कर चुके हों, लेकिन उनकी इस कामयाबी के पीछे संघर्ष की पूरी दास्तान है।
कम उम्र में सिर से पिता का साया खोने के बाद अरविंद ने न सिर्फ खुद की कमाई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की, बल्कि परिवार का भी सहारा बने।
कानपुर में पीएफ आफिस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अरविंद की मां पुष्पा मिश्रा ने बताया कि उनके पति डीएम मिश्रा सेना में थे। 31 जनवरी 1999 को एक हादसे में उनका निधन हो गया तब अरविंद कक्षा छह में थे।
ग्राफिक एरा विवि में मनाया जाएगा जश्न
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के शिक्षक अरविंद मिश्रा ने लगातार छह दिन और पांच रात पढ़ाकर इतिहास रच दिया है।
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उन्होंने पोलैंड के शिक्षक इरॉल मुझावाझी का 121 घंटे पढ़ाने का रिकार्ड तोड़ दिया। अब अपनी इस उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल कराने का दावा वह पेश करेंगे।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर
मूलत: कानपुर के शिवनगर मसवानपुर निवासी अरविंद मिश्रा देहरादून के ग्राफिक एरा विवि में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। एक मार्च को सुबह छह बजे उन्होंने विवि के एमबीए सभागार में अपना मैराथन लेक्चर शुरू किया था।
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गुरुवार सुबह सात बजकर एक मिनट पर अरविंद ने पोलैंड के मुझावाझी का 121 घंटे तक लगातार पढ़ाने का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
पहले तय कार्यक्रम के अनुसार उन्हें गुरुवार शाम चार बजे (130 घंटे) तक ही लेक्चर जारी रखना था। लेकिन गुरुवार देर रात 2:22 पर अचानक तबियत खराब होने के बाद अरविंद को अस्पताल में एडमिट किया गया।
वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। बताया गया कि शुक्रवार की शाम ग्राफिक एरा विवि में जश्न मनाया जाएगा और सम्मान समारोह आयोजित होगा। तभी अरविंद मिश्रा मीडिया से मुखातिब होंगे।
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विवि से मिली जानकारी के मुताबिक लेक्चर खत्म होते ही पूरा रिकॉर्ड गिनीज बुक को भेजा जाएगा। वहां से इसे क्रास चेक करने के बाद अरविंद को आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी हो जाएगा।
अपनी कमाई से पूरी की इंजीनियरिंग की पढ़ाई
पिता के निधन के बाद अरविंद और उनकी तीन बहनों के पालन-पोषण की चिंता मां को सताने लगी, लेकिन किसी तरह बच्चों की पढ़ाई जारी रखी।
कानपुर के ओमर वैस एकेडमी में दसवीं की पढ़ाई के दौरान ही अरविंद ने मां का सहारा बनना शुरू कर दिया। तब 12वीं के छात्रों को अरविंद ट्यूशन देते थे। बीटेक की पढ़ाई के दौरान भी कोचिंग का सिलसिला जारी रहा। अपनी पढ़ाई का पूरा खर्चा अरविंद ने खुद निकाला।
दो वर्ष से कर रहे थे तैयारी
दो वर्ष पूर्व अरविंद ने ग्राफिक एरा के मैकेनिकल विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर ज्वाइन किया। मां पुष्पा ने बताया कि नौकरी हासिल करने के बाद से ही अरविंद ने वर्ल्ड रिकार्ड बनाने के प्रयास शुरू कर दिए थे। आखिर उसने खुद को साबित कर दिया।
पत्नी नहीं बन पाई रिकॉर्ड की साक्षी
अरविंद ने वर्ल्ड रिकार्ड तोड़ लिया, लेकिन उनकी जीवन संगिनी प्रीति मिश्रा उनके यह कीर्तिमान बनाने के क्षणों की साक्षी नहीं बन सकी। प्रीति दून में ही एक निजी बैंक में कार्यरत हैं। इन दिनों मार्च क्लोजिंग के कारण छुट्टी न मिलने से वह विवि नहीं आ सकीं।
मां, बहन ने बढ़ाया हौसला
अरविंद के वर्ल्ड रिकार्ड तोड़ने के ऐतिहासिक पलों की साक्षी बनने के लिए उनकी मां पुष्पा मिश्रा और छोटी बहन अंजू भी विश्वविद्यालय पहुंचीं। मां ने कहा कि अरविंद बचपन से मेहनती रहा है। ऐसे में उन्हें उसकी कामयाबी पर पूरा भरोसा था।
युवाओं को मिलेगी प्रेरणा
कोई भी वर्ल्ड रिकार्ड कायम करने या तोड़ने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। लगातार इतनी लंबी अवधि तक बोलते रहना तो बहुत मुश्किल भरा काम है। अरविंद ने न सिर्फ लेक्चर दिया, बल्कि डायग्राम और अन्य संरचनाओं के जरिये वैज्ञानिक संगणना जैसा कठिन विषय लगातार पढ़ाया। उनके इस कीर्तिमान से न सिर्फ विश्वविद्यालय, बल्कि देशभर के युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।
-कमल घनशाला, अध्यक्ष, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय
सताती रही नींद आने की चिंता
अरविंद की कामयाबी के लिए विश्वविद्यालय के 35 शिक्षकों और छात्रों की टीम लेक्चर की शुरुआत से ही हर पल मुस्तैद रही। लेकिन टीम की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि थकान से कहीं अरविंद को बीच में नींद न आ जाए।
ऐसे में टीम ने अरविंद को बीच-बीच में मिलने वाले ब्रेक के दौरान दी जाने वाली डाइट का पूरा ख्याल रखा।
दी जाती थी स्पेशल डाइट
अरविंद के साथी शिक्षक तुषार गुप्ता ने बताया कि रिकार्ड तोड़ने के लिए अरविंद का लगातार जागना जरूरी था। पहले दिन उन्हें भोजन में मीठा दिया गया, लेकिन इससे अरविंद को नींद आने लगी।
इसके बाद डाक्टर की सलाह पर उन्हें नमकीन दलिया, ओट्स और ताकत बनाए रखने के लिए एप्पल शेक, बनाना शेक दिए गए। बताया कि हर घंटे में अरविंद को पांच मिनट का ब्रेक लेना था, लेकिन अरविंद ने पहले दिन से ही यह ब्रेक लेने के बजाय लगातार कई घंटे पढ़ाने के बाद इकट्ठा 20-25 मिनट का ब्रेक लेकर कुछ देर आराम किया।
इसके लिए एमबीए सभागार के बगल में ही रेस्ट रूम बनाया गया। दिनभर में दो मिनट का ब्रेक लघुशंका के लिए अरविंद ने लिया। पूरी अवधि में अरविंद ने स्नान नहीं किया।
दो कैमरे रख रहे थे पल-पल पर नजर
अरविंद के मैराथन लेक्चर को दो कैमरों पर रिकार्ड किया गया। चूंकि लेक्चर को गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के अधिकारी देख रहे थे। लिहाजा दो कैमरे इसलिए रखे गए कि एक के खराब होने की स्थिति में दूसरे से रिकार्डिंग जारी रहे।
खास बात यह थी कि गिनीज बुक नियमों के अनुसार दोनों कैमरे एक पल के लिए भी बंद हो जाते तो मैराथन लेक्चर वहीं खत्म हो जाता।
70 हजार से ज्यादा हिट्स
अरविंद मिश्रा के मैराथन लेक्चर के लाइव प्रसारण पर बृहस्पतिवार की शाम पांच बजे 70 हजार से ज्यादा हिट्स आ चुके थे।
जानिए, क्या कहते हैं स्पेश्लिस्ट
लगातार छह दिन, पांच रात जागने पर भी बाडी सर्वाइव कर सकती है। सामान्यत: अस्पतालों में किसी गंभीर मरीज के साथ आए तीमारदार भी कई दिन तक बेहद कम नींद और कम खानपान में रहते हैं। कुछ यही स्थिति अरविंद के मामले में भी लागू हो सकती है। लेकिन, ऐसा विशेष परिस्थितियों में ही किया जाए तो बेहतर है। क्योंकि इस तरह लगातार जागने के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। इससे शरीर की कार्यक्षमता घटने लगती है, एकाग्रता कम होती है और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। जिन्हें दौरे पड़ने की शिकायत है, उन्हें तो इस तरह की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, घातक हो सकता है।
-डा. एनएस बिष्ट, सीनियर फिजिशियन, दून अस्पताल