हर्षिल का मशहूर सेब खा रहे हैं उत्तराखंड के जानवर
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आपदा से बर्बाद हुई सेब की फसल अब अपर भागीरथी क्षेत्र के गांवों के लोगों का जी का जंजाल बनकर रह गई है। निगम के ठेकेदारों ने सड़े हुए सेबों के ढेर गोदाम से सड़कों के आसपास लगा दिए हैं।
सेब खाने के लिए भालू और जंगली जानवर आ रहे हैं जिससे सुक्की गांव के शिशु मंदिर के बच्चे तक स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
मवेशी पड़ रहे बीमार
मवेशी इन सड़े सेबों को खाने से बीमार पड़ रहे हैं। आपदा में गंगोत्री हाईवे बंद होने पर हर्षिल क्षेत्र के सेब बाजार में नहीं पहुंच पाए। सरकार ने गढ़वाल मंडल विकास निगम के माध्यम से सेब की खरीद तो कराई, लेकिन निगम महज 65 लाख के सेब ही नीलाम कर पाया।
शेष बचे करीब 11 हजार क्विंटल सेब को पांच 5 पैसे प्रति किलो की दर से नीलाम किया गया। इसमें भी ठेकेदारों ने पांच हजार क्विंटल से ज्यादा खराब हो चुके सेबों के ढेर गोदामों के आसपास गंगोत्री हाईवे के किनारे फेंक दिए। अब हजारों क्विंटल सेब खुले में पड़े होने से सुक्की, बगोरी, कछोरा तथा जांगला में भालू इसे चट करने में जुटे हैं।
भालुओं का डर
दिन दहाड़े गंगोत्री हाईवे के आसपास भालुओं के आने से लोगों में भय व्याप्त है। तीन और चार दिसंबर को तो सुक्की और झाला के बीच दाबाचौरा शिशु मंदिर में पढ़ने वाले बच्चे भालुओं के डर से स्कूल भी नहीं जा पाए। निगम को मुफ्त में गोदाम देने वाले लोग भी अब गोदाम खाली करने के लिए दबाब बनाने लगे हैं।