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Dehradun News: आपदा के बाद बढ़ गई सेब किसानों की चिंता, 40 से 50 बगीचे तबाह

Sun, 10 Aug 2025 01:01 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 10 Aug 2025 01:01 AM IST
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Apple farmers' worries increased after the disaster,
Iबचे बगीचों में फसल आने के लिए तैयार और चारों ओर के मार्ग टूटने से किसान चिंतित
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Iहर्षिल घाटी में नाशपाती और चेरी की फसल को भी बड़ी मात्रा में पहुंचा है नुकसानI
Iहर्षिल घाटी में आई आपदा ने सेब किसानों के लिए भी चिंता पैदा कर दी है। आपदा में क्षेत्र के 40 से 50 बड़े बगीचे पूरी तरह से बरबाद हो चुके हैं। सेब किसानों के साथ-साथ यहां पर नाशपाती और चेरी उत्पादकों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। चारों ओर के रास्ते भी टूट चुके हैं। ऐसे में आने वाले समय में सेब और अन्य बागवानी की फसलों की ढुलाई में भी समस्या आने वाली है।I
Iबता दें कि उत्तरकाशी जिले में उत्तराखंड में सबसे अधिक सेब उत्पादन होता है। यहां करीब 1100 हेक्टेयर से भी ज्यादा क्षेत्रफल पर सेब के बागान हैं। इनसे हर साल किसान करीब 25 हजार टन सेब का उत्पादन करते हैं। इनमें बड़ा हिस्सा मोरी ब्लॉक में आता है मगर हर्षिल के रसीले सेब खासे पसंद किए जाते हैं। यहां पर 40 से 50 वर्ष पुराने बड़े बगीचे भी बड़ी मात्रा में हैं। यहीं पर उच्च गुणवत्ता का सेब पैदा होता है। सेब उत्पादक किसान महावीर सिंह चौहान बताते हैं कि क्षेत्र के कम से कम 40 से 50 बड़े बागानों में आपदा में आया मलबा 15 से 20 फीट तक भर चुका है। ऐसे में यहां की फसल पूरी तरह से बरबाद हो चुकी है।I
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Iये सभी बगीचे 40 से 50 वर्ष तक पुराने हैं। इसी तरह नए बगीचों को भी आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है। यही नहीं यहां पर नाशपाती और चेरी की फसल तैयार थी। आपदा के बाद हर्षिल क्षेत्र के बड़े क्षेत्रफल पर लगे ये बागान भी नष्ट हुए हैं। इनकी फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। जहां तक सेब की बात है तो इस क्षेत्र में सेब की फसल सितंबर के अंत में तैयार होती है। फिलहाल बहुत बड़े क्षेत्रफल में फसल पूरी तरह फल फूल रही थी कि इसी बीच यह आपदा आ गई। रास्ते शुरू होने में भी अभी वक्त लग सकता है। ऐसे में किसानों को अगली चिंता भी सताने लगी है।I
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Iचौहान का केयर टेकर भी बह गया
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Iमहावीर चौहान ने सात साल पहले सेब का बगीचा लगाया था। इसी बगीचे में वह एक होम स्टे भी संचालित करते हैं। यहां देखभाल के लिए उन्होंने एक व्यक्ति को रखा था। चौहान बताते हैं कि इस आपदा में उनका केयर टेकर भी बह गया है।I
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