अमर उजाला अपराजिता संवाद: तनावमुक्त माहौल देंगे तो बेहतर करेंगे बच्चे, पढ़ें खास टिप्स...
- अमर उजाला अपराजिता संवाद में विशेषज्ञों ने दिए परीक्षा के दौरान अभिभावकों और छात्र-छात्राओं को तनावमुक्त रखने के टिप्स
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बोर्ड परीक्षा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों की नींद गायब होती जा रही है। बच्चों से ज्यादा मां-बाप परेशान हैं। परीक्षा में बच्चा अच्छे अंक लाएगा या नहीं? पड़ोसी के बेटे से पिछड़ तो नहीं जाएगा? इस बार नंबर पिछले साल से कम तो नहीं आएंगे? ऐसे ही अन्य कई सवाल हैं जो अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। इससे न केवल वह तनाव का शिकार होते हैं बल्कि जाने-अनजाने में बच्चे को भी इसकी गिरफ्त में ले आते हैं।
परीक्षा के दौरान अभिभावक कैसे खुद और बच्चों को तनाव से बचाएं, इस संबंध में जानकारी देने बुधवार को पटेलनगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में अपराजिता संवाद आयोजित किया गया। इसमें सीबीएसई काउंसलर डॉ. सोना कौशल गुप्ता ने स्ट्रेस मैनेजमेंट के टिप्स देने के साथ-साथ अभिभावकों के सवालों के जवाब दिए।
डॉ. सोना कौशल गुप्ता ने बताया कि तनाव दुनिया में महामारी की तरह फैल रहा है। परीक्षा से पहले छात्र और माता-पिता के तनाव का स्तर भी बढ़ जाता है। ज्यादातर अभिभावक और छात्र परीक्षा से पहले नेगेटिव रिजल्ट को लेकर तनाव में आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि तनाव एक से दूसरे में फैलता है। यही कारण है कि घर में अगर माता-पिता तनाव में रहेंगे तो इसका असर बच्चे पर भी पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मां-बाप बच्चों को रिजल्ट के लिए डराने या दूसरों से तुलना करने की बजाय मेहनत करने को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि अभिभावक तनावमुक्त रहें तो बच्चे को इसका फायदा मिलेगा। तनाव लेने के बजाय अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई में मदद करनी चाहिए। घर पर बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल दें। पढ़ाई के वक्त टीवी चलाना, फोन पर बात करना, घर में विवाद करना, खेलना बच्चे का ध्यान भटकाती है।
इन लक्षणों पर हो जाएं सतर्क
डॉ. सोना कौशल गुप्ता ने बताया कि तनाव बढ़ने पर हमारे दिमाग से कोर्टेसोल नाम का एक रसायन तेजी से निकलता है, जिससे व्यक्ति भूलने लगता है। सिर या शरीर में दर्द, भूख न लगना, नींद न आना, डर व घबराहट जैसे लक्षणों से इसकी पहचान होती है। परीक्षा के दौरान तनाव लेने वाले बच्चों में यह लक्षण अक्सर देखे जाते हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो समझिये बच्चे को मदद की जरूरत है।
एक्शन पर रिएक्शन नहीं रिस्पांस करें
उन्होंने बताया कि बच्चे के किसी एक्शन पर रिएक्शन की बजाय अभिभावकों को रिस्पांस करना चाहिए। रिएक्शन का मतलब है, जैसा बच्चे ने किया वैसे ही जवाब देना। इसका मतलब हुआ कि बच्चा अगर जोर से चीख के कोई बात कहे तो आप भी वैसे ही चिल्लाकर जवाब दें। इससे बचना चाहिए। इसके बजाय आप बच्चे की किसी भी बात पर शांत होकर जवाब दें। इससे बच्चे के अंदर भी उसी तरह के गुण विकसित होंगे।
तनाव घटाने को लें गहरी सांस
तनाव घटाने और नियंत्रित करने में गहरी सांस लेना फायदेमंद होता है। एक से छह गिनते हुए सांस अंदर लें। एक से छह गिनने तक रोकें और फिर एक से छह गिनते हुए धीरे-धीरे छोड़ दें। ऐसा कम से 10 बार करें। इससे तनाव के स्तर में कमी आती है। थकान होने पर भी ऐसा करें। रोजाना ऐसा करने से नियमित तनाव कम होता है।
स्ट्रेस मैनेजमेंट के टिप्स
-परीक्षा के दौरान घंटों पढ़ने की बजाय बच्चे में साल भर नियमित पढ़ने की आदत डालें।
-बच्चे को गलत परिणाम की आशंका दिखाकर मत डराएं, इससे बच्चे में तनाव बढ़ता है।
-बच्चे की खुद से या किसी अन्य से तुलना न करें। याद रखें, हर बच्चा अलग होता है।
-अभिभावक धैर्यवान बनें। बच्चे की बात सुनें और डांटने या झगड़ने की बजाय शांतिपूर्वक उसकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करें।
-घर में लड़ाई-झगड़े या गुस्से की बजाय हंसी-खुशी का माहौल बनाकर रखें।
-पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे के स्वास्थ्य और खानपान का ध्यान भी रखें।
-अभिभावक अपने सपने बच्चों पर न थोपें। उनकी पसंद का भी ध्यान रखें।
-बच्चे के सामने केवल घर की समस्याओं या आर्थिक संकट का रोना न रोएं। उन्हें प्यार से समझाएं।
-बच्चों को हमेशा बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करते रहें।
-लगातार मेहनत करते रहें। परिणाम को लेकर तनाव न लें।
-तनाव से परफॉरमेंस पर असर पड़ता है। तनाव जितना कम लेंगे रिजल्ट बेहतर होगा।
-किसी भी चीज को लेकर हीन भावना न आने दें। खुद को दोष न दें। खुद से प्यार करें।
संवाद में यह अभिभावक व छात्राएं रहीं मौजूद
सुषमा गुसांई, मीना बोहरा, लक्ष्मी चौहान, गुड्डी देवी, विरमा चौहान, सविता चौधरी, अर्चना चौधरी, वंदना सिंह, नेहा, निकिता, आयशा खान, मलिक हबीबा, नशरा, उमा, सिया जोशी, भवानी, प्रिया, ज्योति पासवान, संगीता, प्रियंका, अनिता पासवान, सोनी, निशान शर्मा, सारिका जयसवाल, मधु जैन, रमेश पैन्यूली और अन्य।