नई खोजः उत्तराखंड में मिली एक और फूलों की घाटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में अब तक पर्यटक केवल चमोली स्थित फूलों की घाटी के बारे में जानते थे जिसे विश्व विरासत का दर्जा हासिल है। अब पिथौरागढ़ के छियालेख घाटी में भी हजारों तरह के फूल मिले हैं।
चार किमी के दायरे में फैली छियालेख घाटी भादों माह में करीब हजार प्रजाति के सुंदर फूलों से खिल उठती है। अनजानी फूलों की यह घाटी इस समय रंग-बिरंगे फूलों से महक रही है।
लंबा पैदल मार्ग और जानकारी के अभाव में इस घाटी तक पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं। सिर्फ कैलास यात्री ही फूलों की इस घाटी के दीदार कर पाते हैं।
घाटी में ऐसी जड़ी-बूटियां जो भर दें घाव
हिमालय को जीवनदायिनी औषधियों की खान माना जाता है। छियालेख के फूलों पर शोध कर रहे डीजी वन सत्यवान गर्ब्याल कहते हैं कि उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों की भरमार है।
इनकी खोज के लिए वृहद शोध की जरूरत है। बताते हैं कि यहां ऐसी जड़ी-बूटियां हैं जिनसे घाव तक भर जाते हैं।
कटे मांस को जोड़ देती है हतजोड़: डॉ. जोशी
एमडी आयुर्वेद डॉ. नवीन जोशी कहते हैं कि हतजोड़ (हस्थि संधान) जड़ी में कटे हुए मांस को जोड़ने की क्षमता है। बताते हैं कि छियालेख में प्रीटा रॉयली, ब्रह्मकमल, प्रिंक प्रिमूला, गोल्डन लिली, क्रीमी अनीमोन, लार्ज पर्पल एस्टर, ब्ल्यू पॉपी, ब्ल्यू फारगेट मी नाट, व्हाईट एंड रेड पोटेंनटिला समेत तमाम प्रजातियों के फूल खिलते हैं।
ऐसे पहुंचें फूलों की घाटी तक
फूलों की घाटी तक पहुंचने के पिथौरागढ़ से धारचूला तक 90 किमी. का सड़क मार्ग है। धारचूला से गर्बाधार तक 45 किमी की दूरी भी सड़क द्वारा तय की जा सकती है।
फूलों की घाटी के दीदार के लिए गर्बाधार से मालपा बूंदी होते हुए छियालेख तक का 29 किमी का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है।