हरिद्वार: लौट आया एक और टस्कर हाथी, गाड़ियों के पीछे दौड़ते दिखा, लोगों में दहशत
हरिद्वार वन प्रभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम बिगड़ैल टस्टर हाथी को पकड़कर अपने साथ ले गई थी कि दोबारा एक और टस्कर हाथी भेल में लौट आया है।
एक टस्कर को रेस्क्यू करने के नौ घंटे बाद ही एक अन्य टस्कर हाथी भेल उपनगरी में देखा गया है। इससे लोगों में दहशत का माहौल फिर से बन गया है। उधर, वन प्रभाग ने सूचना मिलते ही हाथी को रोकने के लिए टीम तैनात कर दी है।
हरिद्वार वन प्रभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम ने शुक्रवार को बिगड़ैल टस्कर हाथी को भेल के मैटेरियल गेट से ट्रैंकुलाइज किया था। इसके बाद टस्कर को राजाजी टाइगर रिजर्व के मिठावाली कैंप में रखा गया था।
एक टस्कर के पकड़े जाने के बाद दूसरा टस्कर भेल में घुस आया
वन विभाग को सूचना मिली कि शुक्रवार रात भेल सेक्टर एक के समीप डेढ़ दांत वाला एक और टस्कर हाथी देखा गया। ये हाथी रात के समय कई वाहनों के पीछे भागा। गनीमत रही कि किसी प्रकार की जानमाल की हानि नहीं हुई। बताया जा रहा है कि डेढ़ दांत वाला टस्कर पहले भी आतंक बरपा चुका है। अक्सर भेल और पार्क के समीप मार्गों पर टस्कर को सर्दियों के मौसम में अक्सर देखा जाता है।
ये हाथी लोगों या वाहनों को देखते ही उनके पीछे दौड़ पड़ता है। बीते वर्ष इसी टस्कर ने भेल मेडिकल कॉलोनी में भी जाकर उत्पात मचाया था, लेकिन कोई जनहानि न करने के कारण हाथी को पकड़ने के बजाय जंगल में भगा दिया जाता है। इसके अलावा भेल में हाथियों का एक झुंड भी सक्रिय है।
गुलदार के आने से दहशत में लोग
भेल उपनगरी से लेकर रोशनाबाद तक गुलदार की चहलकदमी काफी बढ़ गई है। पूरे क्षेत्र में लगभग पांच गुलदार आवाजाही कर रहे हैं। भेल सेक्टर एक में पीठ बाजार वाले इलाके में गुलदार को ज्यादा देखा जाता है।
वहीं सेंक्टर एक में बंद पड़े भेल के विद्या मंदिर स्कूल में भी कई बार देखा गया है। दो दिन पूर्व ही स्कूल में स्थानीय निवासियों ने गुलदार देखा था। जिस क्षेत्र के लोग खौफ के साये से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
एक और टस्कर भेल में देखा गया है। हाथी को खदेड़ने के लिए वन प्रभाग की टीमें तैनात कर दी गई है। सभी को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को भी एहतियात बरतने के लिए कहा जा रहा है। साथ ही जनहानि सहित किसी भी प्रकार की हानि को रोकने का हरसंभव प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। गुलदार को पकड़ने की भी योजना बनाई जा रही है।
- दिनेश नोडियाल, रेंजर, हरिद्वार वन प्रभाग