देहरादूनः जाट महासभा भवन के लिए सीएम ने की 25 लाख की घोषणा, हरीश रावत भी दिखे साथ
उत्तराखंड जाट महासभा की ओर से हरिद्वार बाईपास रोड पर जाट भवन का निर्माण किया जा रहा है। रविवार को इसका शिलान्यास मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ राज्यसभा सांसद चौधरी विरेंद्र सिंह, मेयर सुनील उनियाल गामा और विधायक विनोद चमोली ने किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भवन के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। जबकि विधायक विनोद चमोली ने हर साल दस-दस लाख रुपये कुल तीस लाख रुपये देने की बात कही।
शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जाटों का देश की आजादी के साथ ही विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने भवन के लिए हर प्रकार की सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। राज्यसभा सांसद चौधरी बिरेंद्र सिंह ने भवन के लिए दस लाख देने की घोषणा करते हुए जाट समुदाय से आर्थिकी सुधारने को कहा। इसके अलावा उन्होंने जाट समुदाय से एक जुटता का आह्वान किया।
मेयर सुनील उनियाल गामा और विधायक चमोली ने भवन निर्माण पर खुशी जताई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उनकी ओर से सबसे पहले जाट समुदाय को भवन बनाने के लिए प्रेरित किया था। इस दौरान जाट महासभा के अध्यक्ष ओमपाल राठी, हरेंद्र पाल सिंह, अजीत सिंह, काशीपुर की मेयर ऊ षा चौधरी, चौधरी अजीत सिंह, पूर्व मेयर जम्मू चौधरी मनमोहन सिंह, सुशील राठी, अमन सिंह, दरियाब सिंह, इंदुवाला आदि मौजूद रहे।
‘मैं छह अक्षरों का रावत, मुख्यमंत्री साढ़े नौ अक्षरों के रावत’
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर चुटकी ली। जिससे मंच पर बैठे और अन्य लोग खुद को ठहाके लगाने से नहीं रोक पाए। जाट महासभा ने जब भवन के लिए सहयोग राशि की मांग रखी तो हरीश रावत ने कहा कि ‘मैं तो छह अक्षरों को रावत हूं, तुम्हारे सामने साढ़े नौ अक्षरों के रावत’ बैठे हैं। वह आपकी मुझसे ज्यादा मदद करेंगे।
वह यहीं नहीं रुके कहा कि वह मुलायम रावत हैं, लेकिन मुख्यमंत्री जी क ठोर रावत हैं। वह हमेशा कठोर फैसले लेते हैं। राज्यसभा सांसद चौधरी बिरेंद्र सिंह पर भी उन्होंने चुटकी ली। कहा कि उनके यहां आने पर उन्हें खुशी हुई है, लेकिन अब वह दूसरी जगह बैठे हैं, इससे वह खुश नहीं हैं।
चौधरी बिरेंद्र सिंह की बारी आई तो उन्होंने भी हरीश रावत के सवालों का जवाब दिया। कहा, भले ही उन्हें खुशी नहीं हो रही है, लेकिन वह आज भी उनके मित्र हैं। जब बिरेंद्र सिंह ने उन्हें ताली बजाने के लिए कहा तो हरीश रावत बोले ‘अब उनके हिस्से में तालियां बजाना ही रह गया है’।