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उत्तराखंड स्थापना दिवस: 23 साल बाद भी बदहाल हैं दून की स्वास्थ्य सेवाएं, इलाज के लिए भटकने को मजबूर मरीज

Wed, 08 Nov 2023 04:44 PM IST
देहरादून ब्यूरो अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Wed, 08 Nov 2023 04:44 PM IST
सार

नौ नवंबर 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड नया राज्य बना था। उम्मीद थी कि राज्य की स्थिति बेहतर होगी। हालांकि प्रदेश में आज भी समय के अनुरूप परिवर्तन नहीं हुआ है।

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Uttarakhand Foundation Day: Doon health services are in bad shape even after 23 years
दून अस्पताल - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों में सिर्फ दून अस्पताल में एक कार्डियोलॉजिस्ट है। इसके अलावा दून में सरकारी न्यूरो फिजिशियन भी नहीं हैं। उत्तराखंड बने हुए 23 साल हो गए हैं, लेकिन प्रदेश में अबतक स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। पहाड़ों पर सीएचसी और पीएचसी में डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए मुश्किल होती है। प्रदेश के अन्य जिलों समेेत राजधानी देहरादून का भी हाल ऐसा ही है। दून अस्पताल में आज भी अलग-अलग बीमारियों के विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। जबकि यहां पर दूर दराज के मरीज इलाज के लिए आते हैं।

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नौ नवंबर 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड नया राज्य बना था। उम्मीद थी कि राज्य की स्थिति बेहतर होगी। हालांकि प्रदेश में आज भी समय के अनुरूप परिवर्तन नहीं हुआ है। मरीजों को इलाज के नाम पर भटकना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों के इलाज को सिर्फ ऋषिकेश एम्स है, लेकिन यहां पर भी जगह फुल हो जाने की वजह से मरीजों को दिल्ली के लिए रेफर करना पड़ता है।
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पिछले दिनों देहरादून में एक 13 वर्षीय किशोर जल गया था। इलाज के लिए किशोर पांच घंटे तक एंबुलेंस से भटकता रहा था, लेकिन दून के किसी भी अस्पताल में इलाज नहीं मिला। इसके बाद किशोर को ऋषिकेश एम्स में भर्ती किया गया था। वहीं, पहाड़ के मरीजों को आज भी इलाज के अभाव में दम तोड़ते देखा जाता है।

पहाड़ों पर एएनएम करती हैं मरीजों का इलाजI
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन की जिला मंत्री उर्मिला द्विवेदी ने बताया कि पहाड़ों पर बने स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर फार्मासिस्ट के करीब 500 पद ही खत्म कर दिए गए हैं। यहां पर एएनएम मरीजों को दवाएं देती हैं।

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