दर्द से तड़पती रही प्रसूता, दो घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस
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सरकार हर बार पहाड़ी अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य के दावे करती है लेकिन जब भी कोई गंभीर मामला आता है तो इन दावों की पोल खुल जाती है। इसी तरह बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण एक प्रसूता की जान पर बन आई। इलाज के लिए सीएचसी साहिया पहुंची महिला को न तो डॉक्टर मिला और न ही समय पर आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा मुहैया हो सकी।
प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को करीब दो घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। शाम चार बजे अस्पताल आई एंबुलेंस से महिला को विकासनगर में ले जाया गया। गनीमत है कि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
दोपहर करीब दो बजे लेबरा गांव निवासी सुंदरू अपनी पत्नी विनीता (25) को प्रसव पीड़ा के बीच अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन यहां मौजूद सीएमएस डॉ. संजीव दत्ता ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि अस्पताल में तैनात सभी डॉक्टर हड़ताल पर हैं।
अस्पताल में महिला डॉक्टर तक नहीं
वैकल्पिक व्यवस्था के तहत भी अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं है। इस दौरान प्रसव पीड़ा बढ़ने पर पत्नी की बिगड़ती हालत देख सुंदरू ने 108 एंबुलेंस से संपर्क साधा तो पता चला कि अस्पताल से संबंधित एंबुलेंस दूसरे केस पर बैराटखाई गई है।
लिहाजा सीएचसी चकराता से एंबुलेंस भेजी जा रही है। लेकिन एंबुलेंस को सीएचसी साहिया पहुंचने में ही करीब चार बज गए। इस दौरान महिला प्रसव पीड़ा से कराहती रही। चार बजे एंबुलेंस पहुंचने के बाद 108 कर्मी महिला को लेकर विकासनगर के लिए रवाना हो गए। जहां महिला ने सकुशल बच्चे को जन्म दिया।
यह पहला मामला नहीं है कि जब किसी प्रसूता की जान पर बन आई हो। पिछले चार महीनों में सामने आए इस तरह के कई मामलों ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है।
इनका है कहना
अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत महिला डाक्टर की भी तैनाती की गई है। वह अस्पताल किन कारणों से नहीं आई। इस संबंध में सीएमएस से जवाब तलब किया जाएगा।
-डॉ. एसपी अग्रवाल सीएमओ