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अंबानी संग ये 11 घराने बदलेंगे केदारनाथ की तस्वीर

Fri, 04 Apr 2014 12:51 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 04 Apr 2014 12:51 PM IST
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ambani and birla help rehabilitation in kedarnath

आपदा में तबाह हुए केदारनाथ धाम को फिर संवारने के लिए देश के 11 बड़े उद्योग घरानों ने हाथ बढ़ाया है।

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श्री बदरी-केदार मंदिर समिति की पहल पर ये घराने केदार क्षेत्र में पुनर्वास कार्यों में मदद के लिए तैयार हो गए हैं।

पिछले साल जून में आई आपदा के बाद केदारनाथ धाम में भारी तबाही मची थी। धर्मशालाएं, भवन, मार्ग आदि क्षतिग्रस्त हो गए।

बदरीनाथ और केदारनाथ में पहले भी रहा है सहयोग

ambani and birla help rehabilitation in kedarnath

अब बिड़ला, अंबानी, सहारा, हिंदुजा ग्रुप, रेमंड, मोदी ग्रुप, जलाल, चांद ट्रस्ट आदि ने सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया है।

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उद्योगपतियों ने मंदिर समिति को पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर प्रदेश सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिए कहा है।

हिंदुजा, सहारा ग्रुप सहित कई प्रमुख उद्योग घरानों का श्री बदरीनाथ और केदारनाथ में पहले भी सहयोग रहा है। इनके द्वारा यहां धर्मशालाएं और विश्राम गृहों का निर्माण कराया जाता रहा है।

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कब खुलेंगे कपाट

ambani and birla help rehabilitation in kedarnath

गंगोत्री-यमुनोत्री - दो मई
केदारनाथ - चार मई
बदरीनाथ - पांच मई

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हिंदुजा और सहारा सहित देश के कई प्रमुख उद्योग घरानों का कहना है कि पुनर्वास के लिए जो भी मदद करनी होगी वे करेंगे। इन लोगों का हमें पहले भी सहयोग मिलता आया है।
- मधु भट्ट, उपाध्यक्ष श्री बदरी-केदार मंदिर समिति

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इन हालातों में केदारनाथ यात्रा संभव नहीं

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केदारनाथ धाम में 16 जून की रात जल प्रलय आंखों से देख चुके मंदिर के पुरोहित विश्वनाथ कूर्मांचली का कहना है कि धीमी गति से चल रहे सुधार के कार्य से इस बार केदारनाथ यात्रा शुरू होनी संभव नहीं है।

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उनका कहना है कि सरकारी आंकड़ों में जल प्रलय से मरने वालों की संख्या काफी कम बताई गई है। केदारनाथ धाम से 20 किमी दूर खाटफाटा गांव के निवासी पं. विश्वनाथ का परिवार पुश्तैनी रूप से मंदिर में पुरोहित है।

अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि जल प्रलय की रात मंदिर क्षेत्र में ही थे। 18 जून को वह हेलीकॉप्टर से निकाले गए। वह कहते हैं कि प्रलय से शिव धाम शमशान बन गया है। मंदिर क्षेत्र में कई लाशें अब भी मलबे में दबी हैं।

'धाम क्षेत्र में मात्र धर्मार्थ कार्य होने चाहिए'

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प्रकृति से छेड़छाड़, पवित्र नदियों के किनारे निर्माण, अवैज्ञानिक दोहन, अतिक्रमण कर बनाए गए होटलों को वह इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं।

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उनका कहना है कि धाम क्षेत्र में मात्र धर्मार्थ कार्य होने चाहिए। व्यवसायिक गतिविधियां संचालित करने पर रोक लगे। रुद्रप्रयाग से केदारनाथ को जाने वाले 200 किमी मार्ग की दशा अब भी खराब है।

पं. विश्वनाथ कहते हैं कि गौरीकुंड से केदारनाथ की पैदल दूरी 14 किमी थी। जल प्रलय के बाद मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं और अब 24 किमी पैदल चलना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पर्याप्त धनराशि मिलने के बाद भी सुधारीकरण कार्य गति नहीं पकड़ पाए हैं।

अमूल्य वंशावलियां भी हो गई नष्ट
प्रतिष्ठित धामों में पुरोहितों के पास यजमानों की वंशावलियां होती हैं। पुरोहित सैकड़ों बहिखातों में यजमानों की पीढ़ियों का लेखा-जोखा दर्ज करते हैं।

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पंडित विश्वनाथ बताते हैं कि केदारनाथ धाम के पंडितों के पास भी दो से तीन हजार साल पुरानी अमूल्य वंशावलियां थीं। जल प्रलय से यह ऐतिहासिक दस्तावेज भी नष्ट हो गए हैं।

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