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सामने आया अलकनंदा घाटी का चार करोड़ साल पुराना सच

Sat, 10 Oct 2015 04:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 10 Oct 2015 04:22 PM IST
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alaknanda valley came in Existence before 4 crore year.

बदरीनाथ से देव प्रयाग तक फैली अलकनंदा घाटी चार करोड़ साल पहले पैदा हुई थी। यहां की पर्वतीय श्रृंखलाओं के साथ ही लेह-लद्दाख की पहाड़ियां भी वजूद में आईं।

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गढ़वाल की अलकनंदा घाटी और लेह-लद्दाख की ये पहाड़ियां इस वक्त संक्रमण के दौर से गुजर रही हैं। इनकी चोटियां जलवायु परिवर्तन के असर को झेल रही हैं और इनकी जड़ें भूगर्भ की प्लेटों की चाल के प्रभाव में हैं। 20 साल से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे स्विटजरलैंड के वरिष्ठ विज्ञानी आइगॉर एम. विला का कहना है कि इन पहाड़ियों के कद के लिए यह अनिश्चितता का दौर है। इनकी ऊंचाई उठ भी सकती और घट भी सकती है।
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स्विटजरलैंड के विज्ञानी विला की अगुवाई में विज्ञानियों की टीम ने बदरीनाथ में अलकनंदा के उद्गम स्थल से नीचे देवप्रयाग तक और लेह-लद्दाख क्षेत्र की पहाड़ियों का अध्ययन किया। इसमें पाया कि अलकनंदा घाटी की पर्वतीय मालाएं चार करोड़ साल पहले उगना शुरू हुईं थीं।

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हजारों साल की बारिश ने बदला चोटियों का कद

alaknanda valley came in Existence before 4 crore year.

विज्ञानियों का अंदाजा है कि यहां पर्वतीय चोटियां शुरुआत में अधिक ऊंची रही हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ने इन्हें थोड़ा नीचा कर दिया। लगातार हजारों साल की बारिश ने पर्वतीय श्रृंखला की शक्ल बदली, उसके साथ ही भूस्खलन ने पर्वतीय श्रृंखला का कद दबा दिया।

इसके बाद जब बारिश का कहर थमा तो पहाड़ों की चोटियां फिर ऊंची हुईं। फ्लुइड रॉक रिएक्शन के विशेषज्ञ विज्ञानी विला का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र के भूगर्भ के अंदर की प्लेटों में हलचल है। भारी प्लेटों के नीचे और हल्की प्लेटों के ऊपर होने का सिलसिला तेज हो रहा है।

ऐसे में पहाड़ों का ऊंचा उठना और इनकी ऊंचाई घटने का मामला प्लेटों की गतिविधि पर निर्भर करेगा। हिमालयी भूगर्भ क्षेत्र संक्रमण की स्थिति में है। ऐसे में पर्वतीय श्रंखलाओं में बदलाव आ सकता है।

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