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हिमालय दिवस विशेषः हिमालय जितना अनूठा, उतने जीवट यहां के लोग
कर्नल अजय कोठियाल
Updated Fri, 08 Sep 2017 11:36 AM IST
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कार्यक्रम में बोलते अजय कोठियाल
- फोटो : file photo
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हिमालय जितना अनूठा है, उतने ही जीवट हैं यहां के लोग। हिमाचल, उत्तराखंड से लेकर सुदूर अरुणाचल प्रदेश तक कठिन और दुरूह हालातों ने यहां के लोगों को मजबूत और साहसी बनाया है। इसी खूबी की बदौलत भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति के सबसे पराक्रमी सैनिक हिमालयी राज्यों के ही माने जाते हैं।
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पहले स्थान पर गोरखा, दूसरे गढ़वाली- कुमाऊनी, तीसरे स्थान पर डोगरा और अब अरुणाचल और सिक्किम के सैनिकों की जांबाजी के चर्चे हैं। भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से हिमालय का बड़ा महत्व है। असंख्य हिमनदों से निकलने वाली सतत प्रवाही नदियां देश की बड़ी आबादी की न सिर्फ पानी जरूरत पूरा करती हैं बल्कि खेत-खलिहानों को गुलजार करती हैं।
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सैन्य पृष्ठभूमि से होने की वजह से मुझे पर्वतारोहण करने का अवसर मिला। एवरेस्ट समेत भारत और नेपाल की 18 प्रमुख चोटियों पर तिरंगा फहराने के बाद भी मैं हिमालय की असल ताकत तब समझा जब मेरी उत्तरकाशी में पोस्टिंग हुई। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की जिम्मेदारी संभालने के बाद जब मैं उत्तरकाशी के दूरस्थ गांव पहुंचा तो मुझे देखकर अचंभा हुआ कि वहां की लड़कियां 15 से 16 फीट लंबी कूद लगा रही हैं। मैदान में लड़के भी इतनी लंबी छलांग नहीं लगा पाते। उनमें ये कुव्वत हिमालय की उन परिस्थितियों ने पैदा की, जिन्हें आमतौर पर हम कठिन और दुरूह मानते हैं।
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जितनी मेरी समझ है, उस लिहाज मैं मानता हूं कि हिमालय सिर्फ एक छोर से दूसरे छोर तक फैली पर्वतों की श्रृंखला भर नहीं है, हिमालय पर्वतों और घाटियों में बसी दुनिया है। हमें उसके लोगों की उतनी ही चिंता करनी होगी, जितनी चिंता हम पीछे खिसकते हिमनदों की कर रहे हैं। ये हिमालय की ही ताकत है कि दशकों पहले उसे छोड़कर चले गए लोगों के विचारों में ये आज भी वह उतना ही ताजा और हसीन है। जरूरत सिर्फ इन विचारों को जमीन पर उतारने की है। हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड में मुझे दैवीय आपदा के दौरान काम करने का अवसर मिला।
मैंने गहराई से महसूस किया कि राज्य की युवा शक्ति को यदि सही मार्गदर्शन दिया जाए तो ये बहुत बड़ी शक्ति बन सकती। ये संयोग ही था कि पुनर्निर्माण के अभियान के दौरान जुटे युवाओं को सेना की ट्रेनिंग देने का आइडिया कारगर रहा। पहाड़ के कठिन जीवन ने यहां के युवक-युवतियों को अनूठी ऊर्जा दी है, इसी ऊर्जा को धार देने की आवश्यकता थी। पूर्व फौजियों के सहयोग से प्रशिक्षण शिविर शुरू हुए और आज एक यूथ फाउंडेशन के नाम पर शुरू की गई एक संस्था न्यास (ट्रस्ट) का रूप ले चुकी है।
अनूठी पहल जो बन चुकी है मिसाल
कर्नल कोठियाल ने पहाड़ में युवक-युवतियों को सेना में भर्ती होने की ट्रेनिंग देने की एक अनूठी पहल की जो समूचे देश के लिए एक मिसाल बन चुकी है। बकौल कर्नल कोठियाल, ‘कई राज्यों ने उनसे वहां भी इस तरह के शिविर लगाने का आग्रह किया है। 2013 के बाद से शुरू हुए इन शिविरों में राज्य के युवक-युवतियों को सेना के रिटायर्ड सैन्य अफसरों द्वारा शारीरिक दक्षता का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उनकी मानें तो चार साल के दौरान 2500 से ज्यादा नौजवान सेना में भर्ती हो चुके हैं।
एक जांबाज और दिलेर अफसर
कर्नल अजय कोठियाल को एक जांबाज और दिलेर अफसर माना जाता है। इन्हीं खूबियों की वजह से उन्हें सेना के कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। भारतीय सेना के सेना युद्ध प्रशिक्षण केन्द्र मऊ में मेजर अजय कोठियाल के नाम से एक स्कवाड पोस्ट भी है। ऑपरेशन पराक्रम के दौरान चौथी बटालियन ने 21 आतंकवादियों को ढेर किया था, जिनमें से 17 आतंकवादियों को मार गिराने में कर्नल अजय कोठियाल का हाथ था। मौजूदा समय में कर्नल कोठियाल नेहरू पर्वतारोहण संस्थान एनआईएम उत्तरकाशी में बतौर प्रिंसिपल अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
(अमर उजाला के मुख्य संवाददाता राकेश खंडूड़ी से बातचीत पर आधारित)