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Dehradun News: इधर-उधर कूड़ा डालने से रोकने में थे जीरो, हैं जीरो और...
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I- इधर-उधर कूड़ा डालने में नगर निगम पिछले साल भी शून्य प्रतिशत के दायरे में आया था
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I- इस बार भी सर्वेक्षण में नगर निगम की स्थिति में नहीं आया सुधार, अब अगली बार की प्रतीक्षाI
वर्ष 2011 में आई फिल्म आरक्षण के अभिनेता मनोज बाजपेयी का मेगा स्टार अमिताभ बच्चन को बोला संवाद ‘आप थे जीरो, हैं जीरो और...’ ये नगर निगम के इस स्वच्छ सर्वेक्षण में आए रिपोर्ट कार्ड पर फिट बैठता है। इसमें एक मापदंड है रिमिडिएशन ऑफ डंपीसाइट यानी खुले में कूड़ा उठान में क्या कदम उठाए। इस मापदंड में देहरादून नगर निगम को पिछले साल भी शून्य नंबर मिले थे और इस बार भी।
निगम पिछले साल ही इस दिशा में कोई कठोर कदम नहीं उठा पाया था और इस बार भी कोई कदम नहीं उठाया। इस बार के सर्वेक्षण में नगर निगम की यह लापरवाही बोल रही है कि अगली बार भी शायद ऐसा ही हो। हालांकि, अभी तक नए चुनाव न तो हुए हैं और न ही कोई घोषणा है। नगर निगम की सिर्फ इसी दिशा में खराब स्थिति नहीं रही बल्कि अन्य कई कारण भी ऐसे हैं जहां प्रदेश के सबसे साफ नगर निगम को नीचा देखना पड़ा है। इनमें घर-घर कूड़ा उठान में गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग करने की व्यवस्था भी शामिल है।
पिछले साल नगर निगम क्षेत्र ने 95 फीसदी सेग्रीगेशन रहा था। यानी नगर निगम के कुल घरों से गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग कर उठाया गया। मगर, इस साल निगम ने दावा तो किया था 94 फीसदी का। यानी सोचा ये होगा कि पिछले साल के आसपास ही मान लिया जाएगा। मगर, शायद सर्वे बेहद ईमानदारी से हो गया। इसकी नगर-निगम को भी उम्मीद नहीं थी। सर्वे में जो रिपोर्ट कार्ड सामने आया उसके अनुसार केवल 10 फीसदी घरों से ही कूड़ा अलग-अलग कर उठाया गया।
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I- इस बार भी सर्वेक्षण में नगर निगम की स्थिति में नहीं आया सुधार, अब अगली बार की प्रतीक्षाI
वर्ष 2011 में आई फिल्म आरक्षण के अभिनेता मनोज बाजपेयी का मेगा स्टार अमिताभ बच्चन को बोला संवाद ‘आप थे जीरो, हैं जीरो और...’ ये नगर निगम के इस स्वच्छ सर्वेक्षण में आए रिपोर्ट कार्ड पर फिट बैठता है। इसमें एक मापदंड है रिमिडिएशन ऑफ डंपीसाइट यानी खुले में कूड़ा उठान में क्या कदम उठाए। इस मापदंड में देहरादून नगर निगम को पिछले साल भी शून्य नंबर मिले थे और इस बार भी।
निगम पिछले साल ही इस दिशा में कोई कठोर कदम नहीं उठा पाया था और इस बार भी कोई कदम नहीं उठाया। इस बार के सर्वेक्षण में नगर निगम की यह लापरवाही बोल रही है कि अगली बार भी शायद ऐसा ही हो। हालांकि, अभी तक नए चुनाव न तो हुए हैं और न ही कोई घोषणा है। नगर निगम की सिर्फ इसी दिशा में खराब स्थिति नहीं रही बल्कि अन्य कई कारण भी ऐसे हैं जहां प्रदेश के सबसे साफ नगर निगम को नीचा देखना पड़ा है। इनमें घर-घर कूड़ा उठान में गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग करने की व्यवस्था भी शामिल है।
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पिछले साल नगर निगम क्षेत्र ने 95 फीसदी सेग्रीगेशन रहा था। यानी नगर निगम के कुल घरों से गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग कर उठाया गया। मगर, इस साल निगम ने दावा तो किया था 94 फीसदी का। यानी सोचा ये होगा कि पिछले साल के आसपास ही मान लिया जाएगा। मगर, शायद सर्वे बेहद ईमानदारी से हो गया। इसकी नगर-निगम को भी उम्मीद नहीं थी। सर्वे में जो रिपोर्ट कार्ड सामने आया उसके अनुसार केवल 10 फीसदी घरों से ही कूड़ा अलग-अलग कर उठाया गया।
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