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Dehradun News: मारपीट व जानलेवा हमले के 21 साल पुराने मामले में आरोपी बरी
Wed, 12 Aug 2026 12:15 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Wed, 12 Aug 2026 12:15 AM IST
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न्यायिक मजिस्ट्रेट जतिन मित्तल की अदालत ने मारपीट, जानलेवा हमले और गंभीर चोट पहुंचाने के करीब 21 साल पुराने मामले में ईसी रोड (डालनवाला) निवासी संजय बंसल को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को अदालत में संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
मामला 31 मार्च 2005 का है, जब ग्राम नौगांव स्थित एक निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज में ठेके के भुगतान को लेकर विवाद हो गया था। आरोप था कि संजय बंसल, सुधीर बंसल और जुल्फिकार अली ने अमित आहूजा और उनके पिता दिलबाग राय आहूजा के साथ मारपीट की। इस दौरान ईंट से किए गए हमले में दिलबाग राय की नाक की हड्डी टूट गई थी। विचारण के दौरान आरोपी सुधीर बंसल की मृत्यु हो चुकी है, जबकि जुल्फिकार अली की पत्रावली अदालत से पृथक हो चुकी है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पाया कि मुख्य गवाह अमित आहूजा के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। उसने जिरह के दौरान एक आरोपी की संलिप्तता से साफ इनकार कर दिया, जबकि मुख्य बयान में सभी पर आरोप लगाए थे। इसके अलावा, घटना के समय मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों को पुलिस ने न तो आरोपपत्र में गवाह बनाया और न ही उन्हें अदालत में प्रस्तुत किया। साक्ष्यों की इसी कड़ी के टूटने पर अदालत ने संजय बंसल को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया।
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मामला 31 मार्च 2005 का है, जब ग्राम नौगांव स्थित एक निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज में ठेके के भुगतान को लेकर विवाद हो गया था। आरोप था कि संजय बंसल, सुधीर बंसल और जुल्फिकार अली ने अमित आहूजा और उनके पिता दिलबाग राय आहूजा के साथ मारपीट की। इस दौरान ईंट से किए गए हमले में दिलबाग राय की नाक की हड्डी टूट गई थी। विचारण के दौरान आरोपी सुधीर बंसल की मृत्यु हो चुकी है, जबकि जुल्फिकार अली की पत्रावली अदालत से पृथक हो चुकी है।
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मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पाया कि मुख्य गवाह अमित आहूजा के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। उसने जिरह के दौरान एक आरोपी की संलिप्तता से साफ इनकार कर दिया, जबकि मुख्य बयान में सभी पर आरोप लगाए थे। इसके अलावा, घटना के समय मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों को पुलिस ने न तो आरोपपत्र में गवाह बनाया और न ही उन्हें अदालत में प्रस्तुत किया। साक्ष्यों की इसी कड़ी के टूटने पर अदालत ने संजय बंसल को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया।
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