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खोदरी जलविद्युत गृह के करंट ट्रासंफार्मर में लगी आग, एक मशीन से उत्पादन हुआ ठप

Wed, 15 Jun 2022 10:00 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jun 2022 10:00 PM IST
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A fire broke out in the current transformer of Khodri Hydroelectric power plant, production stalled from one machine
पछवादून की मुख्य बिजली उत्पादन यूनिट खोदरी जलविद्युत गृह के एक जेनरेशन ट्रांसफार्मर में बुधवार की दोपहर में आग लग गई। आग लगने से कर्मचारियों में अफरातफरी मच गई। आग लगने की सूचना पर मौके पर पहुंची डाकपत्थर फायर ब्रिगेड की टीम ने आग को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया। आग पर काबू नहीं होता देख सेलाकुई व देहरादून से भी फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया गया। लगभग चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। वहीं आग लगने से 30 मेगावाट बिजली का उत्पादन बंद हो गया है।
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घटनाक्रम के मुुताबिक बुधवार की दोपहर डाकपत्थर से मिलने वाली हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित खोदरी जल विद्युत परियोजना की मशीन नंबर चार से संबंधित एक जेनरेशन ट्रांसफार्मर में आग लग गई। आग लगने से बिजली उत्पादन के कार्य में जुटे जल विद्युत कर्मचारियों में अफरातफरी मच गई। घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को देने के साथ ही फायर ब्रिगेड को दी गई।
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सूचना मिलते ही डाकपत्थर फायर स्टेशन से अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। इसके बाद सेलाकुई व देहरादून से भी फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर बुलाकर आग बुझाने का काम शुरू किया गया। लगभग चार घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। आग से जलविद्युत निगम को लगभग दो करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। आग बुझाने वाली फायर बिग्रेड की टीम में अमित कुमार, बाबूराम सैनी, अनिल मल्ल, चतर सिंह, गजेंद्र सिंह, अरुण गौड़ शामिल रहे।
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आग लगने से लगभग दो करोड़ का नुकसान
डाकपत्थर की हिमाचल प्रदेश से मिलने वाली सीमा पर स्थित खोदरी जल विद्युत परियोजना उत्तराखंड की 160 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। जलविद्युत गृह में 40-40 मेगावाट की चार टरबाइन लगी हैं, जिनसे उत्पादित होने वाली बिजली जेनरेशन ट्रांसफार्मर में आती हैं। इसके बाद वह लाइनों के माध्यम से पावर ग्रिड को चली जाती है। आमतौर पर 40 मेगावाट की टरबाइन से 30 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। ऐसे में एक ट्रांसफार्मर के बंद हो जाने से प्रदेश को 30 मेगावाट बिजली उत्पादन का प्रतिदिन नुकसान उठाना पड़ेगा। 30 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए कम से कम 34 एमयू की क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाया जाता है। आग लगने जैसी स्थिति में ट्रांसफार्मर को लगभग दो करोड़ के नुकसान की आशंका जानकार जता रहे हैं। हालांकि, जलविद्युत निगम के डीजीएम केके जायसवाल का कहना है कि नुकसान का सही पता आकलन जांच के बाद ही लग सकेगा।

आग लगने के दौरान दिखी निगम की भारी लापरवाही
जेनरेशन ट्रांसफार्मर में लगी आग के दौरान निगम की भारी लापरवाही देखने को मिली। आग लगने के साथ ही मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने का काम शुरू कर दिया। फायर ब्रिगेड की टीम ने जैसे ही बिजलीघर में लगी पानी की मोटर को चलाने का प्रयास किया तो वह बंद हो गई। बिजली उपकरणों की आग बुझाने के लिए आवश्यक फोम पाउडर जैसी व्यवस्था भी जलविद्युत गृह में दिखाई नहीं दी। फायर स्टेशन के प्रभारी अधिकारी मोहम्मद आजम ने बताया कि फायर ब्रिगेड के पास अपने तमाम संसाधन मौजूद थे, जिनका समय से प्रयोग करते हुए आग पर काबू पा लिया गया। उधर उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने घटना पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि खटीमा स्थित लोहिया हैड, चीला, मोहम्मदपुर, कुल्हाल, छिबरौऊ आदि जलविद्युत परियोजनाओं पर पिछले वर्षों में हुई दुर्घटनाओं के मामले में जांच कमेटियां बनाई गई लेकिन उन जांच कमेटियों की रिपोर्ट क्या आई किसी को भी आज तक पता नहीं चला। उन्होंने कहा कि दुर्घटना टेस्ट विभाग व निगम के अधिकारियों की लापरवाही को दर्शा रही है।
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