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विधायकों की तर्ज पर अब मिलेगी पार्षद निधि
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विधायकों की तर्ज पर अब मिलेगी पार्षद निधि
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। विधायकों की तर्ज पर अब दून नगर निगम में पार्षदों को भी सालाना निधि मिलेगी। इस सालाना निधि से पार्षद अपने स्तर पर वार्ड में विकास कार्य करा सकेंगे। उन्हें छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए नगर निगम का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। 28 फरवरी को होने वाली दून नगर निगम की बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव रखा जाएगा।
निकायों के वित्तीय अधिकार बढ़ने के बाद शहर के सबसे बड़े नगर निगम में इसकी शुरुआत की जा रही है। सरकार के स्तर से बोर्ड को असीमित विकास कार्यों के वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इसका फायदा उठाते हुए पार्षदों को सालाना पार्षद निधि जारी करने की तैयारी है। निधि के तहत पार्षदों को सालाना कितनी धनराशि दी जाएगी, इसको लेकर अगले कुछ दिनों में फैसला कर लिया जाएगा। इस धनराशि का पार्षद अपने विवेक और क्षेत्र की जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे बहुत छोटे-मोटे कामों के लिए उन्हें निगम पर निर्भर भी नहीं रहना पड़ेगा।
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बल्ब बदलवाने को भी काटते हैं चक्कर
अभी पार्षदों के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं है। स्ट्रीट लाइट का बल्ब फ्यूज होने पर उसे बदलवाने के लिए भी पार्षदों को निगम के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसके अलावा कई ऐसे काम हैं, जिन पर बहुत कम धनराशि खर्च होती है, लेकिन निगम से मंजूरी मिलने में काफी दिन का समय लग जाता है। निधि मिलने के बाद ऐसी दिक्कतें कम होंगी।
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लैप्स नहीं होगी निधि
विधायक निधि की तर्ज पर पार्षद निधि भी हर साल जारी की जाएगी। साल के अंत में बची हुई निधि लैप्स नहीं होगी और अगले साल की निधि में जुड़ जाएगी।
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सरकार ने निकायों के वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी की है। पार्षदों को कई बार क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी छोटे कामों के लिए भी परेशान होना पड़ता है। अगर उनके पास कुछ निधि होगी तो ऐसे काम नहीं रुकेंगे। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी।
- सुनील उनियाल गामा, मेयर, दून नगर निगम
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। विधायकों की तर्ज पर अब दून नगर निगम में पार्षदों को भी सालाना निधि मिलेगी। इस सालाना निधि से पार्षद अपने स्तर पर वार्ड में विकास कार्य करा सकेंगे। उन्हें छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए नगर निगम का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। 28 फरवरी को होने वाली दून नगर निगम की बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव रखा जाएगा।
निकायों के वित्तीय अधिकार बढ़ने के बाद शहर के सबसे बड़े नगर निगम में इसकी शुरुआत की जा रही है। सरकार के स्तर से बोर्ड को असीमित विकास कार्यों के वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इसका फायदा उठाते हुए पार्षदों को सालाना पार्षद निधि जारी करने की तैयारी है। निधि के तहत पार्षदों को सालाना कितनी धनराशि दी जाएगी, इसको लेकर अगले कुछ दिनों में फैसला कर लिया जाएगा। इस धनराशि का पार्षद अपने विवेक और क्षेत्र की जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे बहुत छोटे-मोटे कामों के लिए उन्हें निगम पर निर्भर भी नहीं रहना पड़ेगा।
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बल्ब बदलवाने को भी काटते हैं चक्कर
अभी पार्षदों के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं है। स्ट्रीट लाइट का बल्ब फ्यूज होने पर उसे बदलवाने के लिए भी पार्षदों को निगम के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसके अलावा कई ऐसे काम हैं, जिन पर बहुत कम धनराशि खर्च होती है, लेकिन निगम से मंजूरी मिलने में काफी दिन का समय लग जाता है। निधि मिलने के बाद ऐसी दिक्कतें कम होंगी।
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लैप्स नहीं होगी निधि
विधायक निधि की तर्ज पर पार्षद निधि भी हर साल जारी की जाएगी। साल के अंत में बची हुई निधि लैप्स नहीं होगी और अगले साल की निधि में जुड़ जाएगी।
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सरकार ने निकायों के वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी की है। पार्षदों को कई बार क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी छोटे कामों के लिए भी परेशान होना पड़ता है। अगर उनके पास कुछ निधि होगी तो ऐसे काम नहीं रुकेंगे। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी।
- सुनील उनियाल गामा, मेयर, दून नगर निगम