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हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे टैक्सी संचालक
Updated Mon, 24 Sep 2018 02:12 AM IST
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हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे टैक्सी संचालक
ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी। पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग पर सरकार से राहत नहीं मिलने पर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल टैक्सी एसोसिएशनों के महासंघ एकजुट होकर हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे। इसके लिए विभिन्न यूनियनों को मिलाकर बनाए गए गढ़वाल महासंघ का प्रतिनिधिमंडल रविवार को नैनीताल रवाना हो गया।
गढ़वाल मंडल महासंघ के मीडिया प्रभारी सुंदर सिंह पंवार ने बताया कि काफी दिनों से प्रदेश टैक्सी यूनियन पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग करती आ रही है। विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारी इस मांग को लेकर कई जनप्रतिनिधियों के अलावा प्रदेश सरकार और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तक से गुहार लगा चुके हैं लेकिन किसी स्तर से उन्हें राहत नहीं मिल सकी है। जिस कारण यूनियन को न्यायालय की शरण में जाना पड़ रहा है।
पंवार ने बताया कि केंद्र व प्रदेश सरकार के विरोध में गढ़वाल व कुमाऊं मंडल टैक्सी एसोसिएशन समेत दून टैक्सी एसोसिएशन, देहरादून मसूरी ओनर्स एसोसिएशन, मैक्सी कैब, एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन, दून ट्रैवल एसोसिएशन, गढ़वाल मंडल टैक्सी एसोसिएशन ऋषिकेश, जीप एसोसिएशन, हरिद्वार मैक्सी कैब, कुमाऊं टैक्सी महासंघ, नैनीताल एसोसिएशन, पर्वतीय महासंघ आदि यूनियन अपने वाहनों के सभी कागजात 27 व 28 सितंबर को आरटीओ, जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी कार्यालयों में जमा करेंगे। इसके बाद पांच अक्तूबर को राज्यव्यापी पूर्ण चक्का जाम करेंगे। पंवार ने कहा कि आगामी चुनावों के दौरान कोई भी टैक्सी एसोसिएशन प्रशासन को अपने वाहन मुहैया नहीं कराएगी।
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प्रतिनिधिमंडल में राजेंद्र सिंह भंडारी, बिजेंद्र मनवाल, सत्यदेव उनियाल, प्रमोद नौटियाल, संजय सिंह सिंधवाल, कुंवर सिंह तड़ियाल, भगवान सिंह राणा, सुभाष अग्रवाल, ठाकुर सिंह बिष्ट, नीरज जोशी, राकेश बर्तवाल, महावीर बहुगुणा आदि शामिल हैं।
हड़ताल से बढ़ेंगी मुश्किलें
टैक्सी एसोसिएशनों की हड़ताल होने से पर्यटक को सहित स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन की हड़ताल के कारण भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। टैक्सी यूनियन की हड़ताल से पर्यटन पर भारी प्रभाव पड़ेगा। साथ ही लोगों को भी ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। टैक्सी हड़ताल का सबसे ज्यादा असर उन स्थानों पर पड़ेगा जहां परिवहन निगम की बसें संचालित नहीं होती।
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ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी। पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग पर सरकार से राहत नहीं मिलने पर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल टैक्सी एसोसिएशनों के महासंघ एकजुट होकर हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे। इसके लिए विभिन्न यूनियनों को मिलाकर बनाए गए गढ़वाल महासंघ का प्रतिनिधिमंडल रविवार को नैनीताल रवाना हो गया।
गढ़वाल मंडल महासंघ के मीडिया प्रभारी सुंदर सिंह पंवार ने बताया कि काफी दिनों से प्रदेश टैक्सी यूनियन पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग करती आ रही है। विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारी इस मांग को लेकर कई जनप्रतिनिधियों के अलावा प्रदेश सरकार और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तक से गुहार लगा चुके हैं लेकिन किसी स्तर से उन्हें राहत नहीं मिल सकी है। जिस कारण यूनियन को न्यायालय की शरण में जाना पड़ रहा है।
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पंवार ने बताया कि केंद्र व प्रदेश सरकार के विरोध में गढ़वाल व कुमाऊं मंडल टैक्सी एसोसिएशन समेत दून टैक्सी एसोसिएशन, देहरादून मसूरी ओनर्स एसोसिएशन, मैक्सी कैब, एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन, दून ट्रैवल एसोसिएशन, गढ़वाल मंडल टैक्सी एसोसिएशन ऋषिकेश, जीप एसोसिएशन, हरिद्वार मैक्सी कैब, कुमाऊं टैक्सी महासंघ, नैनीताल एसोसिएशन, पर्वतीय महासंघ आदि यूनियन अपने वाहनों के सभी कागजात 27 व 28 सितंबर को आरटीओ, जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी कार्यालयों में जमा करेंगे। इसके बाद पांच अक्तूबर को राज्यव्यापी पूर्ण चक्का जाम करेंगे। पंवार ने कहा कि आगामी चुनावों के दौरान कोई भी टैक्सी एसोसिएशन प्रशासन को अपने वाहन मुहैया नहीं कराएगी।
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प्रतिनिधिमंडल में राजेंद्र सिंह भंडारी, बिजेंद्र मनवाल, सत्यदेव उनियाल, प्रमोद नौटियाल, संजय सिंह सिंधवाल, कुंवर सिंह तड़ियाल, भगवान सिंह राणा, सुभाष अग्रवाल, ठाकुर सिंह बिष्ट, नीरज जोशी, राकेश बर्तवाल, महावीर बहुगुणा आदि शामिल हैं।
हड़ताल से बढ़ेंगी मुश्किलें
टैक्सी एसोसिएशनों की हड़ताल होने से पर्यटक को सहित स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन की हड़ताल के कारण भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। टैक्सी यूनियन की हड़ताल से पर्यटन पर भारी प्रभाव पड़ेगा। साथ ही लोगों को भी ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। टैक्सी हड़ताल का सबसे ज्यादा असर उन स्थानों पर पड़ेगा जहां परिवहन निगम की बसें संचालित नहीं होती।