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अब पीपीपी मोड में संचालित नही होंगे सरकारी अस्पताल
Updated Sat, 21 Jul 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य के सरकारी अस्पताल अब प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में संचालित नहीं किए जाएंगे। स्वास्थ्य निदेशालय ने यह निर्णय निजी कंपनी द्वारा अस्पतालों में अच्छी व्यवस्था नहीं मुहैया कराए जाने के चलते लिया है। इसके चलते कंपनियों के साथ सरकारी अस्पतालों को संचालित करने के संबंध में हुए अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया गया है।
बता दें, स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्ष 2013 में राज्य के कुछ सरकारी अस्पतालों को पांच साल के लिए पीपीपी मोड में संचालित किए जाने का निर्णय लिया गया था। योजना के पहले चरण में बरेली के एक बड़े चिकित्सकीय संस्थान को चमोली के गैरसैंण, पिथौरागढ़ के मुनस्यारी, बागेश्वर के कपकोट, रुद्रप्रयाग के जखोली व नैनीताल के गरमपानी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के संचालन का जिम्मा दिया गया था। इस पांच साल की अवधि में निजी कंपनी द्वारा अस्पतालों में इलाज के स्तर में कोई खास परिवर्तन नहीं आया। इसे देखते हुए स्वास्थ्य निदेशालय ने अब सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड में संचालित नहीं करने का निर्णय किया है। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक मनु जैन ने बताया कि जिन पांच सामुदायिक केंद्रों को निजी कंपनी को सौंपा गया था उनका अनुबंध समाप्त होने के बाद नवीनीकरण नहीं किया गया है। ऐसे में अब राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों का संचालन विभाग की ओर से ही किया जाएगा।
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राज्य के सरकारी अस्पताल अब प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में संचालित नहीं किए जाएंगे। स्वास्थ्य निदेशालय ने यह निर्णय निजी कंपनी द्वारा अस्पतालों में अच्छी व्यवस्था नहीं मुहैया कराए जाने के चलते लिया है। इसके चलते कंपनियों के साथ सरकारी अस्पतालों को संचालित करने के संबंध में हुए अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया गया है।
बता दें, स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्ष 2013 में राज्य के कुछ सरकारी अस्पतालों को पांच साल के लिए पीपीपी मोड में संचालित किए जाने का निर्णय लिया गया था। योजना के पहले चरण में बरेली के एक बड़े चिकित्सकीय संस्थान को चमोली के गैरसैंण, पिथौरागढ़ के मुनस्यारी, बागेश्वर के कपकोट, रुद्रप्रयाग के जखोली व नैनीताल के गरमपानी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के संचालन का जिम्मा दिया गया था। इस पांच साल की अवधि में निजी कंपनी द्वारा अस्पतालों में इलाज के स्तर में कोई खास परिवर्तन नहीं आया। इसे देखते हुए स्वास्थ्य निदेशालय ने अब सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड में संचालित नहीं करने का निर्णय किया है। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक मनु जैन ने बताया कि जिन पांच सामुदायिक केंद्रों को निजी कंपनी को सौंपा गया था उनका अनुबंध समाप्त होने के बाद नवीनीकरण नहीं किया गया है। ऐसे में अब राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों का संचालन विभाग की ओर से ही किया जाएगा।
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