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धर्म रिलीजन से अलग : डॉ. वैद्य
Updated Fri, 23 Mar 2018 01:56 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आरआरएस के सह कार्य सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक विविधता को जश्न की तरह मनाने की संस्कृति है, क्योंकि यहां जीने का तरीका अध्यात्म है। वे बृहस्पतिवार को ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में ‘राष्ट्र निर्माण और पत्रकारिता के सरोकार’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए राष्ट्र को समझना जरूरी है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के लोगो में लिखे भगवत गीता के शब्द ‘यथो धर्मस्ततो जय:’ लिखे शब्दों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धर्म जिसे इंग्लिश में लोग रिलीजन कहते है, दरअसल किसी मजहब विशेष का नाम न होकर सब धर्मों को साथ रखने वाला सिद्धांत है। धर्म भारत के जीवन का प्राण है। पूजा पद्धति का नाम धर्म नहीं है। ऐसे में मीडिया का फर्ज बनता है कि वह समाज में व्याप्त दोषों के साथ ही अच्छे कामों की खबर भी लोगों तक पहुंचाए। इस दौरान निदेशक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गुप्ता और स्कूल के मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. विशाल सागर ने भी अपने विचार रखे। कार्यशाला का संचालन ताहा सिद्दीकी ने किया। कार्यशाला में काफी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
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आरआरएस के सह कार्य सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक विविधता को जश्न की तरह मनाने की संस्कृति है, क्योंकि यहां जीने का तरीका अध्यात्म है। वे बृहस्पतिवार को ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में ‘राष्ट्र निर्माण और पत्रकारिता के सरोकार’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए राष्ट्र को समझना जरूरी है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के लोगो में लिखे भगवत गीता के शब्द ‘यथो धर्मस्ततो जय:’ लिखे शब्दों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धर्म जिसे इंग्लिश में लोग रिलीजन कहते है, दरअसल किसी मजहब विशेष का नाम न होकर सब धर्मों को साथ रखने वाला सिद्धांत है। धर्म भारत के जीवन का प्राण है। पूजा पद्धति का नाम धर्म नहीं है। ऐसे में मीडिया का फर्ज बनता है कि वह समाज में व्याप्त दोषों के साथ ही अच्छे कामों की खबर भी लोगों तक पहुंचाए। इस दौरान निदेशक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गुप्ता और स्कूल के मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. विशाल सागर ने भी अपने विचार रखे। कार्यशाला का संचालन ताहा सिद्दीकी ने किया। कार्यशाला में काफी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
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