{"_id":"5a8dd6084f1c1b78028b5c34","slug":"91519244808-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला जज और पुलिस के खिलाफ मुकदमे में एफआर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला जज और पुलिस के खिलाफ मुकदमे में एफआर
Updated Thu, 22 Feb 2018 01:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
प्रेमनगर थाने में सिपाही से मारपीट को लेकर यूपी की महिला जज और पुलिस के बीच खींची तलवारें वापस म्यान में पहुंच गई हैं। महिला जज और पुलिस के खिलाफ दर्ज हुए दोनों मुकदमों में एफआर लग गई है। सीओ विकासनगर पंकज गैरोला ने विवेचना में रिपोर्ट के समर्थन में किसी तरह के साक्ष्य नहीं पाए हैं। अधिकारियों ने भी एफआर पर आपत्ति जताए बिना उसे कोर्ट में दाखिल करा दिया।
प्रेमनगर थाना क्षेत्र के पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों के दो गुटाें में हुई मारपीट के मामले में पुलिस यूपी की महिला जज के बेटे को थाने ले आई थी, क्योंकि उसमें मारपीट के साथ कार में तोड़फोड़ की गई। बेटे को थाने लाने से नाराज महिला जज ने वहां हंगामा किया था। हंगामे की वीडियो बनाने को लेकर महिला जज ने एक सिपाही से मारपीट कर दी थी। मारपीट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला गरमा गया था। पुलिस ने महिला जज के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट से अनुमति मांगी थी। एक सप्ताह के बाद आई अनुमति के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष नरेश राठौड ने महिला जज के खिलाफ सिपाही से मारपीट करने का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के बाद महिला जज को निलंबित कर दिया गया था।
महिला जज ने डीजीपी के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजकर 12 अक्तूबर को पुलिस के खिलाफ क्रास मुकदमा दर्ज कराया था। अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर एसओ नरेश राठौड़ ने एसएसपी से खुद ही नैतिकता के आधार पर थाने से हटाने का अनुरोध किया था। इस मामले की विवेचना विकासनगर के पुलिस उपाधीक्षक पंकज गैरोला को सौंपी गई थी। सीओ गैरोला ने दोनों मुकदमों में संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए थे। विवेचना के बाद सीओ ने 17 जनवरी को दोनों मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। एफआर अधिकारियों की संस्तुति के बाद कोर्ट में दाखिल कर दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रेमनगर थाने में सिपाही से मारपीट को लेकर यूपी की महिला जज और पुलिस के बीच खींची तलवारें वापस म्यान में पहुंच गई हैं। महिला जज और पुलिस के खिलाफ दर्ज हुए दोनों मुकदमों में एफआर लग गई है। सीओ विकासनगर पंकज गैरोला ने विवेचना में रिपोर्ट के समर्थन में किसी तरह के साक्ष्य नहीं पाए हैं। अधिकारियों ने भी एफआर पर आपत्ति जताए बिना उसे कोर्ट में दाखिल करा दिया।
प्रेमनगर थाना क्षेत्र के पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों के दो गुटाें में हुई मारपीट के मामले में पुलिस यूपी की महिला जज के बेटे को थाने ले आई थी, क्योंकि उसमें मारपीट के साथ कार में तोड़फोड़ की गई। बेटे को थाने लाने से नाराज महिला जज ने वहां हंगामा किया था। हंगामे की वीडियो बनाने को लेकर महिला जज ने एक सिपाही से मारपीट कर दी थी। मारपीट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला गरमा गया था। पुलिस ने महिला जज के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट से अनुमति मांगी थी। एक सप्ताह के बाद आई अनुमति के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष नरेश राठौड ने महिला जज के खिलाफ सिपाही से मारपीट करने का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के बाद महिला जज को निलंबित कर दिया गया था।
विज्ञापन
महिला जज ने डीजीपी के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजकर 12 अक्तूबर को पुलिस के खिलाफ क्रास मुकदमा दर्ज कराया था। अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर एसओ नरेश राठौड़ ने एसएसपी से खुद ही नैतिकता के आधार पर थाने से हटाने का अनुरोध किया था। इस मामले की विवेचना विकासनगर के पुलिस उपाधीक्षक पंकज गैरोला को सौंपी गई थी। सीओ गैरोला ने दोनों मुकदमों में संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए थे। विवेचना के बाद सीओ ने 17 जनवरी को दोनों मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। एफआर अधिकारियों की संस्तुति के बाद कोर्ट में दाखिल कर दी गई है।
विज्ञापन