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उपवास रख कर की मां शैलपुत्र की उपासना
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उपवास रख कर की मां शैलपुत्र की उपासना
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। देवी भक्ति की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्र शनिवार से शुरू हो गए। भक्तों ने शुभ मुहूर्त में मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में घट स्थापना की। सुबह और शाम मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में माता के भजनों पर भक्त झूम उठे। देवी मंदिरों में बड़ी संख्या में मनोकामना ज्योत जलाईं गईं। सुबह से ही दुर्गा मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने उपवास रख कर मंदिरों और घरों में मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना की। नवरात्र के मौके पर मंदिरों और सार्वजनिक दुर्गा पंडालों को रंगीन लाइटों से सजाया गया है।
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पहले दिन की मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्र के पहले भगवती के पहले स्वरूप को शैलपुत्री माता की पूजा की गई। शैलपुत्री माता सती (पार्वती) का ही रूप है। दुर्गा के पहले स्वरूप में शैलपुत्री मानव मन पर आधिपत्य रखती हैं। जीवन में प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने की शक्ति पर्वत कुमारी मां शैलपुत्री ही प्रदान करती हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल रहता है।
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आज होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
रविवार को नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। इस दिन भक्त ध्यानमग्न होकर परमसत्ता की दिव्य अनुभूति मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं। मां ब्रह्मचारिणी को तप और विद्या की देवी माना जाता है। इसलिए नवरात्र का दूसरा दिन छात्रों के लिए खास है। मां के इस स्वरूप की आराधना करने वालों की शक्तियां असीमित, अनंत हो जाती हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को अनंत फल देने वाला है। देवी ब्रह्मचारिणी तप की शक्ति का प्रतीक है। इनके एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में चंदन की माला रहती है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। देवी भक्ति की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्र शनिवार से शुरू हो गए। भक्तों ने शुभ मुहूर्त में मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में घट स्थापना की। सुबह और शाम मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में माता के भजनों पर भक्त झूम उठे। देवी मंदिरों में बड़ी संख्या में मनोकामना ज्योत जलाईं गईं। सुबह से ही दुर्गा मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने उपवास रख कर मंदिरों और घरों में मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना की। नवरात्र के मौके पर मंदिरों और सार्वजनिक दुर्गा पंडालों को रंगीन लाइटों से सजाया गया है।
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पहले दिन की मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्र के पहले भगवती के पहले स्वरूप को शैलपुत्री माता की पूजा की गई। शैलपुत्री माता सती (पार्वती) का ही रूप है। दुर्गा के पहले स्वरूप में शैलपुत्री मानव मन पर आधिपत्य रखती हैं। जीवन में प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने की शक्ति पर्वत कुमारी मां शैलपुत्री ही प्रदान करती हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल रहता है।
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आज होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
रविवार को नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। इस दिन भक्त ध्यानमग्न होकर परमसत्ता की दिव्य अनुभूति मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं। मां ब्रह्मचारिणी को तप और विद्या की देवी माना जाता है। इसलिए नवरात्र का दूसरा दिन छात्रों के लिए खास है। मां के इस स्वरूप की आराधना करने वालों की शक्तियां असीमित, अनंत हो जाती हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को अनंत फल देने वाला है। देवी ब्रह्मचारिणी तप की शक्ति का प्रतीक है। इनके एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में चंदन की माला रहती है।
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