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आमदनी बढ़ाने और हिसाब.किताब ठीक रखने को विश्व बैंक से करार
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आमदनी बढ़ाने और हिसाब ठीक रखने को विश्व बैंक से करार
वित्तीय सुधारों की दिशा में बड़ा कदम, विश्व बैंक देगा 210 करोड़ रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश सरकार ने वित्तीय सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए विश्व बैंक से एक परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत सरकार की आमदनी बढ़ाने और हिसाब-किताब ठीक रखने के उपाय किए जाएंगे।
बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में प्रदेश, केंद्र सरकार और विश्व बैंक के मध्य एक त्रिपक्षीय ऋण समझौता हुआ। इस पर केंद्र की ओर से फंड बैंक और एडीबी डिवीजन की निदेशक वंदना प्रेयशी, विश्व बैंक के प्रतिनिधि एस. कृष्णामूर्ति और उत्तराखंड सरकार की ओर से अपर सचिव वित्त सविन बंसल ने हस्ताक्षर किए हैं। इस अवसर पर विश्व बैंक के को-टास्क टीम लीडर पुनीत कपूर और फंड बैंक और एडीबी डिवीजन के उपनिदेशक पुनीत कुमार भी उपस्थित थे।
इनसेट
वर्ष 2024 तक चलेगी ये परियोजना
परियोजना की अवधि एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक है। इसकी अनुमानित लागत 39.48 मिलियन डालर यानि करीब 280 करोड़ रुपये है। इमसें से विश्व बैंक 31.58 मिलियन डालर यानी करीब 210 करोड़ रुपये देगा जबकि 7.90 मिलियन डालर करीब 70 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार खर्च करेगी। इसके लिए सेंटर फॉर ट्रेनिंग एंड फाइनेंशियल एडमिनिस्ट्रेशन तहत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की गई है।
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इनसेट
वित्तीय अनुशासन और आय बढ़ाना मुख्य उद्देश्य
पहली बार विश्व बैंक के सहयोग से उत्तराखंड में ऐसी परियोजना आई है, जो अध्ययन और सुधारों पर आधारित है। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी का कहना है कि ये प्रोजेक्ट प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों की दिशा में बड़ा कदम होगा। इससे वित्तीय प्रबंधन एवं अनुशासन को स्थापित किया जा सकेगा। इसका लक्ष्य शुल्क, करों और सेवाओं के बदले आय अर्जित करने वाले सरकार के विभागों की आय को बढ़ाना है। साथ ही इसका हिसाब किताब सही रखना भी है।
इन विभागों के कारोबार में बड़े सुधार की आस
इस परियोजना के तहत तीन मोर्चों पर काम होगा। पहला अध्ययन के जरिए कमियों की पहचान, दूसरा इन्हें दुरुस्त करने के उपाय सुझाना और तीसरा प्रशिक्षण एवं सूचना प्रौद्योगिकी व जीआईएस तकनीक उपलब्ध कराना। विभिन्न सेवाओं, करों और शुल्कों से आय अर्जित करने वाले आबकारी, परिवहन, खनन, पर्यटन विभागों के वित्तीय प्रबंधन को परियोजना से जोड़ा गया है।
शहरी निकायों की कमाई भी बढ़ेगी
परियोजना के दायरे में प्रदेश के सभी 92 शहरी निकायों को लाया गया है। बेहद खराब माली हालत का सामना कर रहे इन निकायों में वित्तीय प्रबंधन की स्थिति भी बेहद खराब है। कई निकायों में कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं हैं। कहीं कंप्यूटर हैं तो वहां इंटरनेट की सुविधा नहीं है। इस परियोजना के तहत सभी शहरी निकायों को कंप्यूटरीकृत अकाउंट प्रणाली से जोड़ा जाएगा। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से निकायों के लिए उन भवनों की पहचान करना आसान हो जाएगा। जिनसे वे भवन कर व अन्य करों की वसूली नहीं कर पा रहे हैं। पहले चरण में देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी नगर निगम की संपत्ति कर संग्रह के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल होगा।
स्थानीय लेखा का भी होगा कायाकल्प
परियोजना के तहत स्थानीय लेखा परीक्षा (लोकल ऑडिट) को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इससे सरकारी धन के उपयोग और जवाबदेही को और प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा सकेगा। कोषागार, पेंशन हकदारी निदेशालय, बजट प्रबंधन और अन्य वित्तीय संस्थाओं में सुधार के उपाय किए जाएंगे। राज्य सरकार के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों डिजिटाइजेशन होगा।
वित्तीय सुधारों की दिशा में बड़ा कदम, विश्व बैंक देगा 210 करोड़ रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश सरकार ने वित्तीय सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए विश्व बैंक से एक परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत सरकार की आमदनी बढ़ाने और हिसाब-किताब ठीक रखने के उपाय किए जाएंगे।
बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में प्रदेश, केंद्र सरकार और विश्व बैंक के मध्य एक त्रिपक्षीय ऋण समझौता हुआ। इस पर केंद्र की ओर से फंड बैंक और एडीबी डिवीजन की निदेशक वंदना प्रेयशी, विश्व बैंक के प्रतिनिधि एस. कृष्णामूर्ति और उत्तराखंड सरकार की ओर से अपर सचिव वित्त सविन बंसल ने हस्ताक्षर किए हैं। इस अवसर पर विश्व बैंक के को-टास्क टीम लीडर पुनीत कपूर और फंड बैंक और एडीबी डिवीजन के उपनिदेशक पुनीत कुमार भी उपस्थित थे।
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वर्ष 2024 तक चलेगी ये परियोजना
परियोजना की अवधि एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक है। इसकी अनुमानित लागत 39.48 मिलियन डालर यानि करीब 280 करोड़ रुपये है। इमसें से विश्व बैंक 31.58 मिलियन डालर यानी करीब 210 करोड़ रुपये देगा जबकि 7.90 मिलियन डालर करीब 70 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार खर्च करेगी। इसके लिए सेंटर फॉर ट्रेनिंग एंड फाइनेंशियल एडमिनिस्ट्रेशन तहत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की गई है।
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वित्तीय अनुशासन और आय बढ़ाना मुख्य उद्देश्य
पहली बार विश्व बैंक के सहयोग से उत्तराखंड में ऐसी परियोजना आई है, जो अध्ययन और सुधारों पर आधारित है। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी का कहना है कि ये प्रोजेक्ट प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों की दिशा में बड़ा कदम होगा। इससे वित्तीय प्रबंधन एवं अनुशासन को स्थापित किया जा सकेगा। इसका लक्ष्य शुल्क, करों और सेवाओं के बदले आय अर्जित करने वाले सरकार के विभागों की आय को बढ़ाना है। साथ ही इसका हिसाब किताब सही रखना भी है।
इन विभागों के कारोबार में बड़े सुधार की आस
इस परियोजना के तहत तीन मोर्चों पर काम होगा। पहला अध्ययन के जरिए कमियों की पहचान, दूसरा इन्हें दुरुस्त करने के उपाय सुझाना और तीसरा प्रशिक्षण एवं सूचना प्रौद्योगिकी व जीआईएस तकनीक उपलब्ध कराना। विभिन्न सेवाओं, करों और शुल्कों से आय अर्जित करने वाले आबकारी, परिवहन, खनन, पर्यटन विभागों के वित्तीय प्रबंधन को परियोजना से जोड़ा गया है।
शहरी निकायों की कमाई भी बढ़ेगी
परियोजना के दायरे में प्रदेश के सभी 92 शहरी निकायों को लाया गया है। बेहद खराब माली हालत का सामना कर रहे इन निकायों में वित्तीय प्रबंधन की स्थिति भी बेहद खराब है। कई निकायों में कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं हैं। कहीं कंप्यूटर हैं तो वहां इंटरनेट की सुविधा नहीं है। इस परियोजना के तहत सभी शहरी निकायों को कंप्यूटरीकृत अकाउंट प्रणाली से जोड़ा जाएगा। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से निकायों के लिए उन भवनों की पहचान करना आसान हो जाएगा। जिनसे वे भवन कर व अन्य करों की वसूली नहीं कर पा रहे हैं। पहले चरण में देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी नगर निगम की संपत्ति कर संग्रह के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल होगा।
स्थानीय लेखा का भी होगा कायाकल्प
परियोजना के तहत स्थानीय लेखा परीक्षा (लोकल ऑडिट) को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इससे सरकारी धन के उपयोग और जवाबदेही को और प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा सकेगा। कोषागार, पेंशन हकदारी निदेशालय, बजट प्रबंधन और अन्य वित्तीय संस्थाओं में सुधार के उपाय किए जाएंगे। राज्य सरकार के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों डिजिटाइजेशन होगा।