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वन क्षेत्रफल की कमी, मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंता का विषय

Fri, 16 Nov 2018 01:47 AM IST
Updated Fri, 16 Nov 2018 01:47 AM IST
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वन क्षेत्रफल की कमी, मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंता का विषय
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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वन अनुसंधान संस्थान के वन संवर्धन एवं प्रबंधन प्रभाग की ओर से ‘वन संवर्धन पुनर्विचार के लिए मुद्दे और चुनौतियां’ विषयक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में विशेषज्ञों ने देश में वन क्षेत्रों में साल दर साल आ रही कमी और मानव वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाआें पर चिंता जताई।
वन अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ. सविता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण वनों के संरक्षण में तमाम चुनौतियां सामने आ रही हैं। इससे निपटने के लिए कारगर कदम उठाने की जरूरत है। डॉ. सविता ने दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में वन क्षेत्रों की कम उत्पादकता का उल्लेख करते हुए प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से वनों पर अधिकांश लोगों की निर्भरता पर प्रकाश डाला।
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आईसीएफआरई के उप महानिदेशक एसडी शर्मा ने वन प्रबंधन से संबंधित मुद्दों पर जानकारी देते हुए लकड़ी के निर्यात और आयात की स्थिति, वनों में आ रही गिरावट, उत्पादकता में कमी, वनों में लगने वाली आग से संबंधित समस्याएं, वन नीतियाें और अधिनियम, जनजातीय लोगों और मानव-पशु संघर्षों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी।
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सेमिनार में वन संवर्धन एवं प्रबंधन प्रभाग की प्रमुख आरती चौधरी ने वन संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार विभिन्न वानिकी प्रजातियों, वॉल्यूम टेबल, वनाग्नि को रोकने एवं वनों के पुनरुत्थान के लिए कदम उठाए गए हैं। सेमिनार में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के कारण पौधों के जीवन पर प्रभाव, पानी के लिए वनों के प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, वन प्रबंधन में लोगों की भागीदारी, वन क्षेत्रों और आपपास के लोगों के लिए आजीविका मुद्दे, भूजल स्तर बढ़ाने के लिए जल संचयन, दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों, पेड़ और झाड़ियों के लिए पौधशाला और पौधरोपण तकनीक पर चर्चा की गई।

सेमिनार में पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड वन विभागों के प्रतिभागियों के अलावा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, रुड़की, विमको, सेंचुरी पल्प एंड पेपर लिमिटेड लालकुआं, बागान ग्राम उद्योग समिति के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सेमिनार में एफआरआई के सभी प्रभागों के प्रमुख, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सेमिनार के शुरुआत में वैज्ञानिक डॉ. दिनेश कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। सेमिनार समापन पर डॉ. मनीषा थपलियाल ने प्रतिभागियोें का आभार जताया।
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