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जिला अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं लड़खड़ाई
Updated Sun, 15 Jul 2018 10:52 PM IST
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नई टिहरी।जिला अस्पताल बौराड़ी में चिकित्सा सेवाएं लड़खड़ाने लगी हैं। जनवरी से अस्पताल में सर्जन नहीं होने से आपरेशन नहीं हो रहे हैं। एसपीएस अस्पताल ऋषिकेश में अटैच सर्जन की संबद्धता जून में खत्म हो चुकी है। उनके लौटने का इंतजार है। जबकि संविदा पर तैनात दूसरे सर्जन ने पीजी की पढ़ाई लिए नौकरी छोड़ दी है। इसके साथ ही एनेस्थेसिस्ट और पैथोलॉजिस्ट भी लंबे समय से अनुपस्थित हैं।
जिला अस्पताल बौराड़ी में लंबे समय बाद जून-जुलाई 2017 से अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार हुआ था। सरकार ने दो सर्जन, एक एनेस्थेसिस्ट, ईएनटी सर्जन से लेकर कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की थी। इसके बाद कई रोगों के मरीजों को अस्पताल में ही आपरेशन की भी सुविधा मिल रही थी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक द्वारा जनवरी 2018 में सर्जन डा. परमार्थ जोशी को एसपीएस अस्पताल ऋषिकेश में तीन माह के लिए अटैच कर दिया गया। इसके बाद डा. जोशी का अटैचमेंट तीन माह के लिए और बढ़ा दिया। यह अवधि 30 जून को पूरी हो चुकी है, लेकिन डा. जोशी अभी नहीं लौटे हैं। संविदा पर तैनात सर्जन डा. गौरव मिश्रा भी पीजी की पढ़ाई की खातिर अस्पताल को छोड़ चुके हैं। इन हालात में छह माह से अस्पताल में सर्जन नहीं होने से मरीजों के आपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। उन्हें छोटे-छोटे आपरेशन कराने को भी ऋषिकेश, देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके साथ ही अस्पताल में तैनात एनेस्थेसिस्ट डा. स्वाति मुरारी नवंबर 2013 से और जुलाई 2017 में तैनात पैथोलाजिस्ट डा. दीपिका जैन शुरू से ही अनुपस्थित चल रही हैं। डा. उर्वशी पटेल अप्रैल 2018 में ज्वाइनिंग देने के बाद पीजी करने चली गई। वरिष्ठ दंत चिकित्सक डा. सुनील उपाध्याय भी लंबे समय से अवकाश पर चले रहे हैं, जिसके चलते अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। अस्पताल में सीएमएस समेत डाक्टरों के कुल 28 पद सृजित है। स्वीकृत पदों के सापेक्ष कागजों में 26 डाक्टर तैनात है, लेकिन काम केवल 21 डाक्टर ही कर रहे हैं।
इनका कहना है-
डा. परमार्थ जोशी के अटैचमेंट की अवधि 30 जून को समाप्त हो गई है। अभी उन्होंने अपना योगदान अस्पताल में नहीं दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही सर्जन ज्वाइन करेंगे।
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-डा. सीपी त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल बौराड़ी।
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जिला अस्पताल बौराड़ी में लंबे समय बाद जून-जुलाई 2017 से अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार हुआ था। सरकार ने दो सर्जन, एक एनेस्थेसिस्ट, ईएनटी सर्जन से लेकर कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की थी। इसके बाद कई रोगों के मरीजों को अस्पताल में ही आपरेशन की भी सुविधा मिल रही थी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक द्वारा जनवरी 2018 में सर्जन डा. परमार्थ जोशी को एसपीएस अस्पताल ऋषिकेश में तीन माह के लिए अटैच कर दिया गया। इसके बाद डा. जोशी का अटैचमेंट तीन माह के लिए और बढ़ा दिया। यह अवधि 30 जून को पूरी हो चुकी है, लेकिन डा. जोशी अभी नहीं लौटे हैं। संविदा पर तैनात सर्जन डा. गौरव मिश्रा भी पीजी की पढ़ाई की खातिर अस्पताल को छोड़ चुके हैं। इन हालात में छह माह से अस्पताल में सर्जन नहीं होने से मरीजों के आपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। उन्हें छोटे-छोटे आपरेशन कराने को भी ऋषिकेश, देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके साथ ही अस्पताल में तैनात एनेस्थेसिस्ट डा. स्वाति मुरारी नवंबर 2013 से और जुलाई 2017 में तैनात पैथोलाजिस्ट डा. दीपिका जैन शुरू से ही अनुपस्थित चल रही हैं। डा. उर्वशी पटेल अप्रैल 2018 में ज्वाइनिंग देने के बाद पीजी करने चली गई। वरिष्ठ दंत चिकित्सक डा. सुनील उपाध्याय भी लंबे समय से अवकाश पर चले रहे हैं, जिसके चलते अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। अस्पताल में सीएमएस समेत डाक्टरों के कुल 28 पद सृजित है। स्वीकृत पदों के सापेक्ष कागजों में 26 डाक्टर तैनात है, लेकिन काम केवल 21 डाक्टर ही कर रहे हैं।
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इनका कहना है-
डा. परमार्थ जोशी के अटैचमेंट की अवधि 30 जून को समाप्त हो गई है। अभी उन्होंने अपना योगदान अस्पताल में नहीं दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही सर्जन ज्वाइन करेंगे।
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-डा. सीपी त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल बौराड़ी।