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80 हजार परिवारों को अपनी छत का इंतजार, एसीसी सर्वे में नाम न होने से नहीं मिल रहा योजना का लाभ
Sun, 20 Jan 2019 05:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 20 Jan 2019 05:00 AM IST
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सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना - 2011 के सर्वे में नाम दर्ज न होने के कारण उत्तराखंड के 80 हजार परिवारों को आवास योजना से वंचित रहना पड़ रहा है। आवेदन करने के बाद भी इन परिवारों को आवास निर्माण के लिए वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है। प्रदेश सरकार की पहल पर योजना से वंचित परिवारों की जियो टैगिंग कर केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेज दी गई हैं। अब इन परिवारों को अपनी छत के लिए केंद्र सरकार की अनुमति का इंतजार है।
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में गरीब परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाईजी) शुरू की थी। केंद्र ने इस योजना के लिए वर्ष 2011 में हुए एसीसी सर्वे का डाटा लिया। जिन परिवारों के नाम सर्वे के रिकॉर्ड में है। वे ही योजना के लिए पात्र माने गए हैं, लेकिन सर्वे से छूटे परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। जियो टैगिंग में प्रत्येक परिवार के वर्तमान मकान की स्थिति व अक्षांश व देशांतर की लोकेशन दी गई है। केंद्र सरकार भी सीधे जियो टैगिंग के आधार पर इन परिवारों का सत्यापन कर सकती है। केंद्र की अनुमति के बाद ही वंचित परिवारों को आवास बनाने के लिए वित्तीय सहायता मिल सकेगी, क्योंकि योजना में शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता केंद्र की ओर से दी जाती है।
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एसीसी सर्वे में जो परिवार छूट गए थे, उनकी जियो टैगिंग कर रिपोर्ट केंद्र को भेजी गई है। जिससे इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की पात्रता में शामिल किया जा सके। केंद्र सरकार के निर्णय लेने के बाद ही इन परिवारों को आवास योजना का लाभ मिल सकेगा।
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- मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास विभाग
आवास बनाने को केंद्र से प्रति परिवार 1.30 लाख की राशि
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से प्रति परिवार 1.30 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इसके अलावा मनरेगा से 95 दिनों की मजदूरी व स्वच्छता मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए 12 हजार 500 रुपये की राशि भी मिलती है। योजना के तहत राज्य में अब तक 9400 आवासों का निर्माण पूरा किया गया है। जबकि तीन हजार मकान निर्माणाधीन है। जिन्हें मार्च 2019 तक पूरा करना है।
जिला योजना से वंचित परिवार की संख्या
अल्मोड़ा 2100
बागेश्वर 4397
चमोली 6022
चंपावत 3891
देहरादून 4507
हरिद्वार 17048
नैनीताल 2369
पौड़ी 6052
पिथौरागढ़ 6602
रुद्रप्रयाग 6468
टिहरी 3523
ऊधमसिंह नगर 12072
उत्तरकाशी 5061