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पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे नूडल के खाली पैकेट
Updated Mon, 02 Jul 2018 01:40 AM IST
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पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे नूडल के खाली पैकेट
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दून से मसूरी के बीच खुली खानपान की दुकानों और ढाबों से निकलने वाली प्लास्टिक पर्यावरण को प्रदूषित कर रही है। गत एक वर्ष में गति फाउंडेशन की पड़ताल में यह बात सामने आई है। इस अवधि में फाउंडेशन ने 32 किमी दायरे में 60 से ज्यादा जगह पड़ताल की है।
गति फाउंडेशन के निदेशक अनूप नौटियाल के निर्देशन में अभिषेक सिंह, भास्कर त्रिपाठी, प्यारेलाल, ऋषभ श्रीवास्तव की टीम ने देहरादून से मसूरी रोड पर और इसके आसपास के क्षेत्र में पड़ताल की है। अनूप ने बताया कि गत एक वर्ष में फास्ट फूड और शीतल पेय पदार्थों की खपत और उनके कचरे के प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं पर पड़ताल की गई। इस दौरान 31.7 प्रतिशत जगह ऐसी पाई गई जहां पर्यटन सीजन में रोजाना 30-50 एक नामी नूडल कंपनी के प्लास्टिक से बने पैकेट इस्तेमाल होते हैं। इनमें दस प्रतिशत प्वाइंट ऐसे पाए गए जहां प्रतिदिन 50 से 80 नूडल के पैकेट इस्तेमाल होते हैं।
उन्होंने बताया कि जून में सर्वाधिक 95 प्रतिशत पैकेटों का इस्तेमाल किया गया, जबकि अगस्त में सबसे कम पैकेट इस्तेमाल हुए। 98.3 प्रतिशत प्वाइंट पर 100 ग्राम के पैकेट इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनमें भी करीब 55 प्रतिशत जगहों पर पैकेट जला दिए जाते हैं। 11.7 प्रतिशत लोग पैकेट फेंक देते हैं, जबकि 18.3 प्रतिशत लोग ही कूड़ा उठाने वाली गाड़ी में कूड़ा डालते हैं। जब इन खानपान प्वाइंटों के संचालकों से पूछा गया कि वह बड़े पैकेट इस्तेमाल क्यों नहीं करते तो 51.7 प्रतिशत ने बताया कि कंपनी उपलब्ध नहीं कराती है। अनूप नौटियाल ने अब इन खाली पैकेटों के सही निस्तारण की मांग उठाई है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दून से मसूरी के बीच खुली खानपान की दुकानों और ढाबों से निकलने वाली प्लास्टिक पर्यावरण को प्रदूषित कर रही है। गत एक वर्ष में गति फाउंडेशन की पड़ताल में यह बात सामने आई है। इस अवधि में फाउंडेशन ने 32 किमी दायरे में 60 से ज्यादा जगह पड़ताल की है।
गति फाउंडेशन के निदेशक अनूप नौटियाल के निर्देशन में अभिषेक सिंह, भास्कर त्रिपाठी, प्यारेलाल, ऋषभ श्रीवास्तव की टीम ने देहरादून से मसूरी रोड पर और इसके आसपास के क्षेत्र में पड़ताल की है। अनूप ने बताया कि गत एक वर्ष में फास्ट फूड और शीतल पेय पदार्थों की खपत और उनके कचरे के प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं पर पड़ताल की गई। इस दौरान 31.7 प्रतिशत जगह ऐसी पाई गई जहां पर्यटन सीजन में रोजाना 30-50 एक नामी नूडल कंपनी के प्लास्टिक से बने पैकेट इस्तेमाल होते हैं। इनमें दस प्रतिशत प्वाइंट ऐसे पाए गए जहां प्रतिदिन 50 से 80 नूडल के पैकेट इस्तेमाल होते हैं।
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उन्होंने बताया कि जून में सर्वाधिक 95 प्रतिशत पैकेटों का इस्तेमाल किया गया, जबकि अगस्त में सबसे कम पैकेट इस्तेमाल हुए। 98.3 प्रतिशत प्वाइंट पर 100 ग्राम के पैकेट इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनमें भी करीब 55 प्रतिशत जगहों पर पैकेट जला दिए जाते हैं। 11.7 प्रतिशत लोग पैकेट फेंक देते हैं, जबकि 18.3 प्रतिशत लोग ही कूड़ा उठाने वाली गाड़ी में कूड़ा डालते हैं। जब इन खानपान प्वाइंटों के संचालकों से पूछा गया कि वह बड़े पैकेट इस्तेमाल क्यों नहीं करते तो 51.7 प्रतिशत ने बताया कि कंपनी उपलब्ध नहीं कराती है। अनूप नौटियाल ने अब इन खाली पैकेटों के सही निस्तारण की मांग उठाई है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।
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