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Dehradun News: 90 सालों में 64,862 जेंटलमैन कैडेट आईएमए से हो चुके हैं पास आउट
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I- इसमें 34 मित्र देशों के 2885 विदेशी कैडेट्स भी शामिल
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I- धूमधाम से मनाया गया भारतीय सैन्य अकादमी का स्थापना दिवसI
भारतीय सैन्य अकादमी ने अपना 91वां स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर कमांडेंट भारतीय सैन्य अकादमी लेफ्टिनेंट जनरल वीके मिश्रा ने आईएमए युद्ध स्मारक पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। आईएमए में तैनात सिविल स्टॉप को सम्मानित भी किया।
कमांडेंट ले. जनरल वीके मिश्रा ने कहा कि आईएमए ने अच्छी तरह से प्रशिक्षित और पेशेवर रूप से सक्षम अधिकारी राष्ट्र को दिए हैं। उन्होंने सेवा और सिविल कर्मचारियों से अकादमी को और भी अधिक गौरव दिलाने के लिए समान उत्साह और तालमेल के साथ काम करने का आग्रह किया। विदित है कि आईएमए एक अक्तूबर 1932 को अस्तित्व में आया। पिछले 90 वर्षों में अकादमी की प्रशिक्षण क्षमता 40 जीसी से 1650 जीसी तक पहुंच गई है। तब से आज तक 64,862 जेंटलमैन कैडेट्स आईएमए से पासआउट हो चुके हैं। इसमें 34 मित्र देशों के 2885 विदेशी कैडेट्स भी शामिल हैं। अकादमी का एक समृद्ध इतिहास है। इससे निकले कैडेट्स ने सेना में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। 889 बहादुर पूर्व छात्रों ने राष्ट्र की सेवा में अपना बलिदान दिया है।
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I- धूमधाम से मनाया गया भारतीय सैन्य अकादमी का स्थापना दिवसI
भारतीय सैन्य अकादमी ने अपना 91वां स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर कमांडेंट भारतीय सैन्य अकादमी लेफ्टिनेंट जनरल वीके मिश्रा ने आईएमए युद्ध स्मारक पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। आईएमए में तैनात सिविल स्टॉप को सम्मानित भी किया।
कमांडेंट ले. जनरल वीके मिश्रा ने कहा कि आईएमए ने अच्छी तरह से प्रशिक्षित और पेशेवर रूप से सक्षम अधिकारी राष्ट्र को दिए हैं। उन्होंने सेवा और सिविल कर्मचारियों से अकादमी को और भी अधिक गौरव दिलाने के लिए समान उत्साह और तालमेल के साथ काम करने का आग्रह किया। विदित है कि आईएमए एक अक्तूबर 1932 को अस्तित्व में आया। पिछले 90 वर्षों में अकादमी की प्रशिक्षण क्षमता 40 जीसी से 1650 जीसी तक पहुंच गई है। तब से आज तक 64,862 जेंटलमैन कैडेट्स आईएमए से पासआउट हो चुके हैं। इसमें 34 मित्र देशों के 2885 विदेशी कैडेट्स भी शामिल हैं। अकादमी का एक समृद्ध इतिहास है। इससे निकले कैडेट्स ने सेना में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। 889 बहादुर पूर्व छात्रों ने राष्ट्र की सेवा में अपना बलिदान दिया है।
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