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राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने के बाद अब गंगा दिवस मनाने की तैयारी, नमामि गंगे महानिदेशक का दौरा
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। गंगा को और स्वच्छ व निर्मल बनाने के साथ-साथ इसके प्रति लोगों की आस्था और बढ़े इसके लिए अब ‘गंगा दिवस’ मनाने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश के दौरे पर आए ‘नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा’ के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र ने हैस्को में सोमवार को आयोजित सेमिनार में कहा कि सरकार और मंत्रालय के स्तर पर इस पर विचार विमर्श किया जा रहा है।
महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र ने कहा कि ‘नमामि गंगे योजना’ तभी सफ ल होगी जब इसमें आमजन की भागीदारी बढ़ेगी। प्रत्येक व्यक्ति के मन में गंगा को ‘उतारना’ होगा। गंगा हमारी आस्था का प्रतीक है। लेकिन, हम भूल जाते हैं कि गंगा का संरक्षण भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। गंगा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। वाराणसी समेत कई जगहों पर ‘रन फॉर गंगा’ आयोजित किए गए। इसके किनारे बसे 4500 गांवों को गंगा गांव का दर्जा देकर इसे और साफ सुथरा बनाया जाएगा। योजना के तहत गंगा गांवों में वनीकरण के साथ ही अन्य चीजों पर भी ध्यान देना होगा। गंगा में जल की कमी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी नदियों और झरनों को साफ सुथरा कर नदियों से जोड़ना होगा। सूखे झरनों को पुनर्जीवित करने की व्यवस्था करनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गंगा को जानने के साथ-साथ इसे विज्ञान के साथ भी जोड़कर देखना होगा।
पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय नदी गंगा को यदि पूर्व की भांति स्वच्छ और निर्मल बनाना है तो देशवासियों को और अधिक जागरूक करना होगा। इसके लिए ‘गंगा दिवस’ मनाने के साथ ही वाराणसी और प्रयागराज में गंगा म्यूजियम का निर्माण करना होगा। केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं को कड़ाई से लागू करने के अलावा नदी के किनारे रहने वाले 40 करोड़ लोगों को इससे जोड़ना होगा। सेमिनार में पद्मश्री जोशी ने ‘नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा’ के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र के समक्ष हैस्को की ओर से तैयार किए प्रस्ताव का मसौदा रखा। पद्मश्री ने कहा कि गंगा के किनारे बसे ग्रामीणों के साथ ‘गंगा मंथन’ जैसे सेमिनार आयोजित करने के अलावा ‘गंगा नॉलेज पार्कों’ का निर्माण करना होगा। गंगा की महत्ता को समझाने के लिए गंगा दिवस मनाने के साथ ही गंगा यात्राओं के आयोजन पर जोर देना होगा। लोगों की आर्थिकी मजबूत हो इसके लिए उन्हें गंगा प्रसाद बनाने के साथ ही गंगाजल को बोतलों में पैकिंग कर बड़े पैमाने पर इसका व्यावसायिक उपयोग किया जाए। पद्मश्री ने सुझाव दिया कि महात्मा गांधी की जयंती पर ‘गांधी की गंगा यात्रा’ निकाली जानी चाहिए।
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इससे पूर्व महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र ने हैस्को की ओर से किए जा रहे वैज्ञानिक शोधों को देखा और लोगों का जीवन सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर डीपी माथुर, संजम चीमा, पीयूष गुप्ता आदि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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देहरादून। गंगा को और स्वच्छ व निर्मल बनाने के साथ-साथ इसके प्रति लोगों की आस्था और बढ़े इसके लिए अब ‘गंगा दिवस’ मनाने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश के दौरे पर आए ‘नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा’ के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र ने हैस्को में सोमवार को आयोजित सेमिनार में कहा कि सरकार और मंत्रालय के स्तर पर इस पर विचार विमर्श किया जा रहा है।
महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र ने कहा कि ‘नमामि गंगे योजना’ तभी सफ ल होगी जब इसमें आमजन की भागीदारी बढ़ेगी। प्रत्येक व्यक्ति के मन में गंगा को ‘उतारना’ होगा। गंगा हमारी आस्था का प्रतीक है। लेकिन, हम भूल जाते हैं कि गंगा का संरक्षण भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। गंगा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। वाराणसी समेत कई जगहों पर ‘रन फॉर गंगा’ आयोजित किए गए। इसके किनारे बसे 4500 गांवों को गंगा गांव का दर्जा देकर इसे और साफ सुथरा बनाया जाएगा। योजना के तहत गंगा गांवों में वनीकरण के साथ ही अन्य चीजों पर भी ध्यान देना होगा। गंगा में जल की कमी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी नदियों और झरनों को साफ सुथरा कर नदियों से जोड़ना होगा। सूखे झरनों को पुनर्जीवित करने की व्यवस्था करनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गंगा को जानने के साथ-साथ इसे विज्ञान के साथ भी जोड़कर देखना होगा।
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पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय नदी गंगा को यदि पूर्व की भांति स्वच्छ और निर्मल बनाना है तो देशवासियों को और अधिक जागरूक करना होगा। इसके लिए ‘गंगा दिवस’ मनाने के साथ ही वाराणसी और प्रयागराज में गंगा म्यूजियम का निर्माण करना होगा। केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं को कड़ाई से लागू करने के अलावा नदी के किनारे रहने वाले 40 करोड़ लोगों को इससे जोड़ना होगा। सेमिनार में पद्मश्री जोशी ने ‘नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा’ के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र के समक्ष हैस्को की ओर से तैयार किए प्रस्ताव का मसौदा रखा। पद्मश्री ने कहा कि गंगा के किनारे बसे ग्रामीणों के साथ ‘गंगा मंथन’ जैसे सेमिनार आयोजित करने के अलावा ‘गंगा नॉलेज पार्कों’ का निर्माण करना होगा। गंगा की महत्ता को समझाने के लिए गंगा दिवस मनाने के साथ ही गंगा यात्राओं के आयोजन पर जोर देना होगा। लोगों की आर्थिकी मजबूत हो इसके लिए उन्हें गंगा प्रसाद बनाने के साथ ही गंगाजल को बोतलों में पैकिंग कर बड़े पैमाने पर इसका व्यावसायिक उपयोग किया जाए। पद्मश्री ने सुझाव दिया कि महात्मा गांधी की जयंती पर ‘गांधी की गंगा यात्रा’ निकाली जानी चाहिए।
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इससे पूर्व महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र ने हैस्को की ओर से किए जा रहे वैज्ञानिक शोधों को देखा और लोगों का जीवन सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर डीपी माथुर, संजम चीमा, पीयूष गुप्ता आदि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।