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मेहमान की तरह करें रमजान का इस्तकबाल
Updated Sun, 13 May 2018 02:36 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
रमजान का पाक महीना अल्लाह के सबसे करीब है। इसी माह कुरान पाक नाजिल हुआ। इसीलिए यह माह सबसे ज्यादा अफजल है। इस माह का इस्तकबाल मेहमान की तरह करें। शुक्रवार को आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामियातुस्सलाम-अल-इस्लामिया में आयोजित इज्लास-ए-आम में देशभर से पहुंचे उलमा ने लोगों से यह अपील की। उलमा ने कहा कि तमाम अहले ईमान अपने आप को रोजे, तरावीह और सहरी के लिए अभी से तैयार करें।
इस्तकबाल रमजान और दस्तारे फजीलत पर आयोजित इज्लास-ए-आम में मुख्य अतिथि ऑल इंडिया इमाम आर्गेनाइजेशन के चीफ मौलाना डा. उमैर इलियासी ने कहा कि रमजान दुनियावी भाग-दौड़ और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने की प्रेरणा देता है। रमजान माह में भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी, बुरी नजर डालने जैसी सभी बुराइयों पर लगाम लगाने की मुश्किल कवायद रोजेदार को अल्लाह के बेहद करीब पहुंचा देती है। अल्लाह अपने उस इबादत गुजार रोजेदार बंदे को अपनी अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है।
पंजाब के नायब शाही इमाम उस्मान अहरारी ने कहा कि इस्लाम की पांच बुनियादों में रोजा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। इंसान के अंदर जिस्म (शरीर) और रूह (आत्मा) है। आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबियत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है।
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अध्यक्षता कर शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी और शहर मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने कहा कि रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख (नरक) के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी महीने में कुरान शरीफ दुनिया में नाजिल (अवतरित) हुआ था। संचालन मदरसा संचालक मुफ्ती रईस अहमद कासमी और मौलाना मोहम्मद अहमद मन्नान ने किया। मौलाना मोहम्मद निसार ने दुआ कराई। इस दौरान मौलाना मोहम्मद उस्मान लुधियानवी, मौलाना कारी अब्दुल कादिर, शेखुल हदीस मजाहिरउलुम, मौलाना गुलशेर, मुफ्ती खुशनूद, लतीफ चौधरी, मौलाना इंतजार, कारी अहसान, अब्दुल रहमान, सलीम शाह, हाफिज शाहनजर, मुफ्ती ताहिर हुसैन, मौलाना बिलाल, हाजी इकबाल, उजेर चौधरी, मास्टर अब्दुल सत्तार, राव अब्दुल रहमान समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
.....................
मौकापरस्तों से रहे सावधान
ऑल इंडिया इमाम आर्गेनाइजेशन के चीफ मौलाना डा. उमैर इलियासी कहा कि देश में हालात इतने खराब नहीं है, जितने बताए जाते हैं। देश में अमनो अमान कायम है। कुछ मौकापरस्त लोगों की वजह से पूरी कौम को बदनाम करने की जो साजिश की जा रही है। ऐसे मौकापरस्तों से हमें सावधान रहने की जरूरत है।
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रमजान का पाक महीना अल्लाह के सबसे करीब है। इसी माह कुरान पाक नाजिल हुआ। इसीलिए यह माह सबसे ज्यादा अफजल है। इस माह का इस्तकबाल मेहमान की तरह करें। शुक्रवार को आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामियातुस्सलाम-अल-इस्लामिया में आयोजित इज्लास-ए-आम में देशभर से पहुंचे उलमा ने लोगों से यह अपील की। उलमा ने कहा कि तमाम अहले ईमान अपने आप को रोजे, तरावीह और सहरी के लिए अभी से तैयार करें।
इस्तकबाल रमजान और दस्तारे फजीलत पर आयोजित इज्लास-ए-आम में मुख्य अतिथि ऑल इंडिया इमाम आर्गेनाइजेशन के चीफ मौलाना डा. उमैर इलियासी ने कहा कि रमजान दुनियावी भाग-दौड़ और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने की प्रेरणा देता है। रमजान माह में भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी, बुरी नजर डालने जैसी सभी बुराइयों पर लगाम लगाने की मुश्किल कवायद रोजेदार को अल्लाह के बेहद करीब पहुंचा देती है। अल्लाह अपने उस इबादत गुजार रोजेदार बंदे को अपनी अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है।
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पंजाब के नायब शाही इमाम उस्मान अहरारी ने कहा कि इस्लाम की पांच बुनियादों में रोजा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। इंसान के अंदर जिस्म (शरीर) और रूह (आत्मा) है। आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबियत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है।
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अध्यक्षता कर शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी और शहर मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने कहा कि रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख (नरक) के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी महीने में कुरान शरीफ दुनिया में नाजिल (अवतरित) हुआ था। संचालन मदरसा संचालक मुफ्ती रईस अहमद कासमी और मौलाना मोहम्मद अहमद मन्नान ने किया। मौलाना मोहम्मद निसार ने दुआ कराई। इस दौरान मौलाना मोहम्मद उस्मान लुधियानवी, मौलाना कारी अब्दुल कादिर, शेखुल हदीस मजाहिरउलुम, मौलाना गुलशेर, मुफ्ती खुशनूद, लतीफ चौधरी, मौलाना इंतजार, कारी अहसान, अब्दुल रहमान, सलीम शाह, हाफिज शाहनजर, मुफ्ती ताहिर हुसैन, मौलाना बिलाल, हाजी इकबाल, उजेर चौधरी, मास्टर अब्दुल सत्तार, राव अब्दुल रहमान समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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मौकापरस्तों से रहे सावधान
ऑल इंडिया इमाम आर्गेनाइजेशन के चीफ मौलाना डा. उमैर इलियासी कहा कि देश में हालात इतने खराब नहीं है, जितने बताए जाते हैं। देश में अमनो अमान कायम है। कुछ मौकापरस्त लोगों की वजह से पूरी कौम को बदनाम करने की जो साजिश की जा रही है। ऐसे मौकापरस्तों से हमें सावधान रहने की जरूरत है।