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प्रेम कभी बासी नहीं होता: नेगी
Updated Mon, 12 Feb 2018 01:32 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ईसी रोड स्थित एक होटल में रविवार को रचनाकार डॉ. ईशान पुरोहित की काव्यकृति जीवन तो चलता रहता है का विमोचन हुआ। विमोचन मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आदित्य नारायण पुरोहित और लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने किया।
लोक गायक नेगी ने कहा कि प्रेम ऐसा विषय है जिस पर दुनिया में सबसे अधिक साहित्य की रचना हुई । रचनाकार सबसे पहले अपना लेखन प्रेम से ही शुरू करता है और प्रेम कभी भी बासी नहीं होता है। कहा कि उनका पसंदीदा विषय भी प्रेम ही है। पद्मश्री प्रो. आदित्य नारायण पुरोहित ने कहा कि विश्व बैंक संस्थान देहरादून में ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. ईशान पुरोहित हिंदी कविता के अच्छे रचनाकार हैं, उनकी यह काव्यकृति प्रेम कविताओं पर केंद्रित है। वैज्ञानिक लेखक की कविताएं इस भिन्नता से भी ध्यान खींचती है कि एक भौतिक विज्ञान का वैज्ञानिक कविताएं लिख रहा है। रंगकर्मी प्रो. डी आर पुरोहित ने कहा कि ईशान की कविताएं अपने समय को वैज्ञानिक दृष्टि से बतातीं हैं। आज के समय में कविता की ऐसी बानगी चौंकाती भी है और विचलित भी करती है और जीवन की आपाधापी में एक वैज्ञानिक का कविता पक्ष विचलित करता है कि आदमी की निर्जीविका उसे कुछ भी करा सकती है । मौल्यार ऐगे संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. गुंजन पुरोहित, शिव प्रसाद पुरोहित, गणेश खुगशाल, डॉ. नंदकिशोर हटवाल, बीना बेंजवाल आदि लोग मौजूद रहे।
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ईसी रोड स्थित एक होटल में रविवार को रचनाकार डॉ. ईशान पुरोहित की काव्यकृति जीवन तो चलता रहता है का विमोचन हुआ। विमोचन मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आदित्य नारायण पुरोहित और लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने किया।
लोक गायक नेगी ने कहा कि प्रेम ऐसा विषय है जिस पर दुनिया में सबसे अधिक साहित्य की रचना हुई । रचनाकार सबसे पहले अपना लेखन प्रेम से ही शुरू करता है और प्रेम कभी भी बासी नहीं होता है। कहा कि उनका पसंदीदा विषय भी प्रेम ही है। पद्मश्री प्रो. आदित्य नारायण पुरोहित ने कहा कि विश्व बैंक संस्थान देहरादून में ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. ईशान पुरोहित हिंदी कविता के अच्छे रचनाकार हैं, उनकी यह काव्यकृति प्रेम कविताओं पर केंद्रित है। वैज्ञानिक लेखक की कविताएं इस भिन्नता से भी ध्यान खींचती है कि एक भौतिक विज्ञान का वैज्ञानिक कविताएं लिख रहा है। रंगकर्मी प्रो. डी आर पुरोहित ने कहा कि ईशान की कविताएं अपने समय को वैज्ञानिक दृष्टि से बतातीं हैं। आज के समय में कविता की ऐसी बानगी चौंकाती भी है और विचलित भी करती है और जीवन की आपाधापी में एक वैज्ञानिक का कविता पक्ष विचलित करता है कि आदमी की निर्जीविका उसे कुछ भी करा सकती है । मौल्यार ऐगे संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. गुंजन पुरोहित, शिव प्रसाद पुरोहित, गणेश खुगशाल, डॉ. नंदकिशोर हटवाल, बीना बेंजवाल आदि लोग मौजूद रहे।
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