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लेखा लिपिक पर भड़के शिक्षक
Updated Sat, 24 Jun 2017 11:07 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शिक्षा विभाग के एक लेखा लिपिक की कारगुजारी पर शिक्षकों का गुस्सा भड़क उठा। बाबू ने जिले के 70 शिक्षकों के प्रान नंबर के आवेदन छह महीने से देहरादून जमा नहीं किए। जिससे उन्हें हर महीने पांच से छह हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। हैरत की बात यह है कि शिक्षकों को भ्रमित किया जाता रहा कि फार्म जमा कर दिए। असलियत पता चलने पर शनिवार को शिक्षकों ने उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के नेताओं के साथ मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर हंगामा किया। लिपिक के खिलाफ शिकायत भी दी।
शिक्षकों के वेतन से हर महीने 10 प्रतिशत टैक्स की रकम काट ली जाती है। नई पेंशन योजना के तहत सरकार की तरफ से भी इतना ही अंश जमा कराया जाता है। सरकार का अंश तब जमा होता है, जब शिक्षकों को प्रान नंबर आवंटित हो जाता है। जनपद में वर्ष 2015-16 में भर्ती हुए शिक्षकों ने विभाग में इसके लिए आवेदन किया था। आरोप है कि लेखा बाबू सुशील कुमार शुक्ला ने छह महीने तक फार्म दबाए रखे। शिक्षकों को हर महीने पांच से छह हजार रुपये का नुकसान होता रहा। पूछने पर शिक्षकों को गुमराह किया जाता रहा कि फार्म जमा हो गए हैं। शिक्षकों ने 21 जून को देहरादून पहुंचकर जानकारी जुटाई तो पता चला कि कोई फार्म जमा ही नहीं हुआ है। इस पर शिक्षक ठगे से रह गए। शनिवार को उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डा. अनिल शर्मा और जिला मंत्री राजेश सैनी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पीड़ित शिक्षक और शिक्षिकाएं रोशनाबाद स्थित मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। सीईओ आरडी शर्मा से मुलाकात करते हुए शिक्षकों ने लेखा बाबू सुशील कुमार को सामने लाने को कहा। शिक्षक नेताओं का कहना था कि बाबू छह महीने तक फार्म जमा न करने का कारण बताए। शिक्षकों के गुस्से को देखते हुए लेखा बाबू पहले ही दफ्तर से खिसक गए।
वहीं सीईओ आरडी शर्मा ने भी शिक्षकों का गुस्सा भांपते हुए लेखा बाबू को उनके सामने बुलाना ठीक नहीं समझा। काफी देर तक आरोप प्रत्यारोप और हंगामे के बाद लेखा बाबू के खिलाफ लिखित शिकायत देते हुए कार्रवाई की मांग की। सीईओ आरडी शर्मा ने फार्म जमा कराने के साथ ही यह भी भरोसा दिलाया कि फार्म जमा करने में देरी की जांच की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में जिला उपाध्यक्ष प्रदीप त्यागी, प्रदेश कोषाध्यक्ष कुंवर पाल, प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश शर्मा, जितेन्द्र सिंह पुंडीर, फूल सिंह सहित जिले के पीड़ित शिक्षक शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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अगले दिन 40 फार्म जमा कर आया बाबू
प्रान नंबर को लेकर कई महीनों से परेशान चल रहे शिक्षकों और शिक्षक नेताओं ने 21 जून को देहरादून जाकर जानकारी जुटाई। इसकी भनक लगने पर अगले ही दिन बाबू सुशील शुक्ला ने देहरादून पहुंचकर 40 शिक्षकों के फार्म जमा किए। 30 शिक्षकों के फार्म अभी भी विभाग में धूल फांक रहे हैं। हंगामे के दौरान शिक्षिकाओं का पारा सातवें आसमान पर रहा। उनका कहना था कि एक बार बाबू से आमने-सामने सवाल जवाब करना चाहती हैं।
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हरिद्वार।
शिक्षा विभाग के एक लेखा लिपिक की कारगुजारी पर शिक्षकों का गुस्सा भड़क उठा। बाबू ने जिले के 70 शिक्षकों के प्रान नंबर के आवेदन छह महीने से देहरादून जमा नहीं किए। जिससे उन्हें हर महीने पांच से छह हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। हैरत की बात यह है कि शिक्षकों को भ्रमित किया जाता रहा कि फार्म जमा कर दिए। असलियत पता चलने पर शनिवार को शिक्षकों ने उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के नेताओं के साथ मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर हंगामा किया। लिपिक के खिलाफ शिकायत भी दी।
शिक्षकों के वेतन से हर महीने 10 प्रतिशत टैक्स की रकम काट ली जाती है। नई पेंशन योजना के तहत सरकार की तरफ से भी इतना ही अंश जमा कराया जाता है। सरकार का अंश तब जमा होता है, जब शिक्षकों को प्रान नंबर आवंटित हो जाता है। जनपद में वर्ष 2015-16 में भर्ती हुए शिक्षकों ने विभाग में इसके लिए आवेदन किया था। आरोप है कि लेखा बाबू सुशील कुमार शुक्ला ने छह महीने तक फार्म दबाए रखे। शिक्षकों को हर महीने पांच से छह हजार रुपये का नुकसान होता रहा। पूछने पर शिक्षकों को गुमराह किया जाता रहा कि फार्म जमा हो गए हैं। शिक्षकों ने 21 जून को देहरादून पहुंचकर जानकारी जुटाई तो पता चला कि कोई फार्म जमा ही नहीं हुआ है। इस पर शिक्षक ठगे से रह गए। शनिवार को उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डा. अनिल शर्मा और जिला मंत्री राजेश सैनी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पीड़ित शिक्षक और शिक्षिकाएं रोशनाबाद स्थित मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। सीईओ आरडी शर्मा से मुलाकात करते हुए शिक्षकों ने लेखा बाबू सुशील कुमार को सामने लाने को कहा। शिक्षक नेताओं का कहना था कि बाबू छह महीने तक फार्म जमा न करने का कारण बताए। शिक्षकों के गुस्से को देखते हुए लेखा बाबू पहले ही दफ्तर से खिसक गए।
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वहीं सीईओ आरडी शर्मा ने भी शिक्षकों का गुस्सा भांपते हुए लेखा बाबू को उनके सामने बुलाना ठीक नहीं समझा। काफी देर तक आरोप प्रत्यारोप और हंगामे के बाद लेखा बाबू के खिलाफ लिखित शिकायत देते हुए कार्रवाई की मांग की। सीईओ आरडी शर्मा ने फार्म जमा कराने के साथ ही यह भी भरोसा दिलाया कि फार्म जमा करने में देरी की जांच की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में जिला उपाध्यक्ष प्रदीप त्यागी, प्रदेश कोषाध्यक्ष कुंवर पाल, प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश शर्मा, जितेन्द्र सिंह पुंडीर, फूल सिंह सहित जिले के पीड़ित शिक्षक शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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अगले दिन 40 फार्म जमा कर आया बाबू
प्रान नंबर को लेकर कई महीनों से परेशान चल रहे शिक्षकों और शिक्षक नेताओं ने 21 जून को देहरादून जाकर जानकारी जुटाई। इसकी भनक लगने पर अगले ही दिन बाबू सुशील शुक्ला ने देहरादून पहुंचकर 40 शिक्षकों के फार्म जमा किए। 30 शिक्षकों के फार्म अभी भी विभाग में धूल फांक रहे हैं। हंगामे के दौरान शिक्षिकाओं का पारा सातवें आसमान पर रहा। उनका कहना था कि एक बार बाबू से आमने-सामने सवाल जवाब करना चाहती हैं।