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एनसीईआरटी किताबों को लेकर बुकसेलरों पर उमड़ी भीड़
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला /देहरादून।
दुकानदारों के पास एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की पुस्तकें पहुंचने के बाद शनिवार को दुकानों पर दिनभर अभिभावकों का तांता लगा रहा। अभिभावक निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के न्यायालय के आदेश से जहां खुश थे। वहीं निजी प्रशासकों की किताबों की कीमत भी निर्धारित करने की मांग कर रहे थे।
एनसीईआरटी की पुस्तकों को लेकर बीते दिनों से चल रहा संकट शुक्रवार को ही समाप्त हो गया था। शनिवार सुबह पुस्तकों की दुकानें खुलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक पहुंच गए। पुस्तक विक्रेताओं के पास सुबह से देर शाम तक अभिभावकों की कतार लगी रही। एनसीईआरटी की गणित और विज्ञान के साथ ही अन्य विषयों की किताबें एक ही जगह मिलने पर अभिभावक काफी खुश नजर आए। अभिभावकों ने कहा कि सरकार का निर्णय सराहनीय है वहीं कोर्ट ने भी अभिभावकों के हितों का ध्यान रखते हुए राहत भरा फैसला दिया है। अब सिर्फ निजी प्रकाशकों की किताबों के मूल्य निर्धारित करने की जरूरत है।
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न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है। एनसीईआरटी की सस्ती किताबों के चलते जेब पर अधिक भार नहीं पडे़गा। अब सरकार को प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों की कीमत भी निर्धारित करनी चाहिए।
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-इति और अरविंद
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दुकानदारों के पास एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की पुस्तकें पहुंचने के बाद शनिवार को दुकानों पर दिनभर अभिभावकों का तांता लगा रहा। अभिभावक निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के न्यायालय के आदेश से जहां खुश थे। वहीं निजी प्रशासकों की किताबों की कीमत भी निर्धारित करने की मांग कर रहे थे।
एनसीईआरटी की पुस्तकों को लेकर बीते दिनों से चल रहा संकट शुक्रवार को ही समाप्त हो गया था। शनिवार सुबह पुस्तकों की दुकानें खुलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक पहुंच गए। पुस्तक विक्रेताओं के पास सुबह से देर शाम तक अभिभावकों की कतार लगी रही। एनसीईआरटी की गणित और विज्ञान के साथ ही अन्य विषयों की किताबें एक ही जगह मिलने पर अभिभावक काफी खुश नजर आए। अभिभावकों ने कहा कि सरकार का निर्णय सराहनीय है वहीं कोर्ट ने भी अभिभावकों के हितों का ध्यान रखते हुए राहत भरा फैसला दिया है। अब सिर्फ निजी प्रकाशकों की किताबों के मूल्य निर्धारित करने की जरूरत है।
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न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है। एनसीईआरटी की सस्ती किताबों के चलते जेब पर अधिक भार नहीं पडे़गा। अब सरकार को प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों की कीमत भी निर्धारित करनी चाहिए।
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