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खिचड़ी के त्योहार में बहकी मस्त बयार...
Updated Mon, 15 Jan 2018 01:37 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
मकर सक्रांति के मौके पर हरबर्टपुर में रविवार को साहित्यिक चौपाल लगी। इस दौरान साहित्यकारों ने संस्कृति से ओतप्रोत रचनाएं सुनाईं। कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार शमा खान की रचना ‘और ताजमहल रो पड़ा’ और राशिद आरफी की कृति ‘दृष्टिपथ’ का भी विमोचन किया गया। सम्मेलन में 60 से अधिक उम्र के साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया। काव्य पाठ में डॉली डबराल ने ‘आंख में किरचे चुभने लगी है सपनों में ही आ जाओ’ सुनाकर सिपाही की पत्नी की व्यथा व्यक्त की। अंबर खरबंदा ने ‘जहां चाहे वहां करता है अपने नूर की बारिश, जहां चाहे वहीं खुशियों की चिट्ठी भेज देता है, समझता है खुदा जिसके भी घर को काबिले रहमत वो उसके घर में इक प्यारी सी बेटी भेज देता है’ सुनाकर सबको भावविभोर कर दिया। मुकुंद नीलकंठ जोशी ने ‘कमला रहती सदा कमल में और हिमालय पर शंकर, श्रीहर्ष सोते सागर जल में कारण मात्र एक मच्छर’ सुनाकर कर लोगों को गुदगुदाया। इदुंभूषण ने ‘उत्तर पथ दिनकर चला माघ माह की चाल, मकर राशि शनि को मिला पीहू की सौगात, खिचड़ी के त्योहार में बहकी मस्त बयार साधे धागा प्रेम का उड़े पतंग हजार की पक्तियां पढ़कर वाहवाही लूटी। महेश्वनी कनेगी ने खिलती धूप सी मन आंगन में एक अहसास है बेटी.. पक्तियां सुनाईं। इस अवसर पर वीणापाणी जोशी, आशा शैली, प्रभाकर उनियाल, जयदेव विद्रोही, बृजमोहन अरोड़ा ने भी काव्य पाठ किया। साहित्यिक चौपाल में असद आरफी, इशित सेढा, जिला कांग्रेस कमेटी सहारनपुर के उपाध्यक्ष सत्या सनयाम भूरिया सैनी, देव सारंग, फुरकान अहमद, शहजाद अली, मोहम्मद अशफाक, ब्रजमोहन अरोड़ा, देव सारंग कुकरेती, मार्टिन उमेद आदि मौजूद रहे।
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मकर सक्रांति के मौके पर हरबर्टपुर में रविवार को साहित्यिक चौपाल लगी। इस दौरान साहित्यकारों ने संस्कृति से ओतप्रोत रचनाएं सुनाईं। कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार शमा खान की रचना ‘और ताजमहल रो पड़ा’ और राशिद आरफी की कृति ‘दृष्टिपथ’ का भी विमोचन किया गया। सम्मेलन में 60 से अधिक उम्र के साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया। काव्य पाठ में डॉली डबराल ने ‘आंख में किरचे चुभने लगी है सपनों में ही आ जाओ’ सुनाकर सिपाही की पत्नी की व्यथा व्यक्त की। अंबर खरबंदा ने ‘जहां चाहे वहां करता है अपने नूर की बारिश, जहां चाहे वहीं खुशियों की चिट्ठी भेज देता है, समझता है खुदा जिसके भी घर को काबिले रहमत वो उसके घर में इक प्यारी सी बेटी भेज देता है’ सुनाकर सबको भावविभोर कर दिया। मुकुंद नीलकंठ जोशी ने ‘कमला रहती सदा कमल में और हिमालय पर शंकर, श्रीहर्ष सोते सागर जल में कारण मात्र एक मच्छर’ सुनाकर कर लोगों को गुदगुदाया। इदुंभूषण ने ‘उत्तर पथ दिनकर चला माघ माह की चाल, मकर राशि शनि को मिला पीहू की सौगात, खिचड़ी के त्योहार में बहकी मस्त बयार साधे धागा प्रेम का उड़े पतंग हजार की पक्तियां पढ़कर वाहवाही लूटी। महेश्वनी कनेगी ने खिलती धूप सी मन आंगन में एक अहसास है बेटी.. पक्तियां सुनाईं। इस अवसर पर वीणापाणी जोशी, आशा शैली, प्रभाकर उनियाल, जयदेव विद्रोही, बृजमोहन अरोड़ा ने भी काव्य पाठ किया। साहित्यिक चौपाल में असद आरफी, इशित सेढा, जिला कांग्रेस कमेटी सहारनपुर के उपाध्यक्ष सत्या सनयाम भूरिया सैनी, देव सारंग, फुरकान अहमद, शहजाद अली, मोहम्मद अशफाक, ब्रजमोहन अरोड़ा, देव सारंग कुकरेती, मार्टिन उमेद आदि मौजूद रहे।