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श्रमिक संगठनों ने भरी हुंकार, निकाली आक्रोश रैली
Updated Tue, 02 Oct 2018 02:24 AM IST
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श्रमिक संगठनों ने भरी हुंकार, आक्रोश रैली निकाली
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले दून ऑटो रिक्शा यूनियन समेत कई संगठनों ने श्रमिक आक्रोश रैली निकाल सचिवालय कूच किया। भारी संख्या में पहुंचे लोगों को पुलिस सचिवालय गेट पर रोका, जिसके बाद प्रदर्शनकारी भड़क गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मुख्य सचिव उत्पल कुमार के साथ वार्ता हुई। जिसमें मुख्यमंत्री ने 23 अक्तूबर को उनकी मांगों की बाबत वित्त एवं श्रम सचिव और वित्त मंत्री के साथ बैठक कर समाधान का निकालने का आश्वासन दिया। वहीं, दूसरी ओर ऑटो यूनियन के दूसरे गुट की ओर से संचालन जारी रखने के चलते चक्काजाम प्रभावी नहीं रहा।
सोमवार सुबह भारतीय मजदूर संघ से जुड़े 40 ट्रेड यूनियनों से जुड़े लोग परेड ग्राउंड में एकत्र हुए। जिसमें दून ऑटो रिक्शा यूनियन, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, परिवहन निगम, ई-रिक्शा यूनियन समेत विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। यहां हुई जनसभा में भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री बृजेश उपाध्याय ने कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार श्रमिकों का शोषण कर रही है। संगठन मंत्री पवन कुमार ने कहा कि असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों का बहुत शोषण हो रहा है। श्रमिकों को सामूहिक बीमा, राज्य कर्मचारी बीमा योजना का लाभ दिया जाए, स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए।
राज्य संगठन मंत्री बृजेश कुमार बनकोटी ने कहा कि ट्रेड यूनियनों में रजिस्ट्रेशन में गैरजरूरी जांच को आधार बनाकर देरी की जा रही है। प्राइवेट स्कूल, होटल, अस्पताल और लघु उद्योगों को सामाजिक दायरे में लाया जाए। उन्होंने आशा, आंगनबाड़ी, आशा फैसिलेटर को राज्य कर्मचारी घोषित करने की मांग की। साथ ही उनका न्यूनतम मानदेय 21 हजार रुपये करते हुए पेंशन का लाभ देने की बात कही।
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इसके बाद भारी संख्या में लोग सचिवालय पहुंचे। जहां पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की भी हुई। इस दौरान दून ऑटो रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष बालेंद्र तोमर, पूरन सिंह बिष्ट, गोविंद सिंह बिष्ट, रमेश चंद्र जोशी, सुशीला खत्री, अनिल राठी, पीसी चौबे, गणेश मेहरा, पंकज शर्मा, अनिल श्रीवास्तव, उमेश चंद जोशी आदि मौजूद रहे।
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दौड़ते रहे दूसरे यूनियन के ऑटो, नहीं हुई परेशानी
12 सूत्री मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध दून ऑटो रिक्शा यूनियन के पदाधिकारियों ने भी सचिवालय कूच किया। इस दौरान सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक चक्काजाम किया, लेकिन दूसरे गुट दून ऑटो रिक्शा यूनियन द्वारा ऑटो चलाए जाने के कारण चक्काजाम प्रभावी नहीं रहा। यूनियन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध दून ऑटो रिक्शा यूनियन की हड़ताल का प्रभाव लोगों पर नहीं पड़ने दिया गया। यूनियन से जुड़े ऑटो सुबह से ही चल रहे थे।
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स्कूली बच्चों को हुई परेशानी
सचिवालय के पास स्थित सेंट जोसेफ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को आंदोलन के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दोपहर जब भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में हजारों लोग सचिवालय गेट पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान स्कूल की छुट्टी हुई। भीड़ के चलते अभिभावक मुश्किल से अपने बच्चों को लेकर वापस घर पहुंचे।
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दून ऑटो रिक्शा यूनियन की मांगें
- फेयर मीटर की अनिवार्यता खत्म की जाए, अलग-अलग फ्यूल के रेट और माइलेज में अंतर के कारण एक रेट का मीटर लगाना सही नहीं है।
- डीजल ऑटो की रिप्लेसमेंट जल्द खोली जाए, देहरादून को छोड़कर प्रदेश में कहीं भी डीजल ऑटो की रिप्लेसमेंट कहीं पर बंद नहीं है।
- ऑटो के परमिट की परिधि 25 से बढ़ाकर 40 किलोमीटर किया जाए या एयरपोर्ट, सहस्त्रधारा, डाट काली मंदिर, हरबर्टपुर एवं कुठालगेट पर जाने की अनुमति दी जाए।
- ऑटो पार्किंग के लिए नगर निगम से 200 स्टैंड स्वीकृत किए जाएं।
- ऑटो का इंश्योरेंस फीस चार से नौ हजार हजार कम किया जाए, इसमें एक्सीडेंटल क्लेम एक से बढ़ाकर पांच लाख किया जाए।
- ओला टैक्सी की लोकल बुकिंग बंद की जाए।
- रेलवे स्टेशन पर ऑटो का पार्किंग शुल्क 1050 से घटाकर पूर्व की तरह 200 रुपये प्रति ऑटो किया जाए।
- ई-रिक्शा और ओला टैक्सी को ऑटो स्टेशनों से सवारी उठाने की अनुमति न दी जाए।
- ई-रिक्शा का संचालन नेशनल हाईवे एवं मुख्य मार्गों से बंद किया जाए, वहीं ई-रिक्शा का किराया 10 रुपये प्रति सवारी की जाए।
- ई-रिक्शाओं का रजिस्ट्रेशन तुरंत बंद किया जाए।
- ई-रिक्शाओं का सत्यापन कर व बेच नंबर देकर केवल इनके स्वामी को ही ई-रिक्शा चलाने की अनुमति दी जाए।
- राजधानी के अंदर शाम छह से सुबह छह बजे तक ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाई जाए।
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भारतीय मजदूर संघ की प्रमुख मांगें
- प्रदेश में श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाए।
- सुधारों के नाम पर श्रम कानूनों से छेड़छाड़ बंद हो।
- न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए, न्यूनतम वेतन कमेटी गठित की जाए।
- आंगनबाड़ी, आशा, भोजनमाता, दाई मां, ग्राम प्रहरी आदि को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। उन्हें ईपीएफ, ईएसआई से जोड़ा जाए।
- प्रदेश में ठेका प्रथा खत्म हो, नियमित नियुक्तियों के साथ ही मृतक आश्रित नियुक्ति रोक हटाई जाए।
- निर्धारित अवधि का रोजगार कानून समाप्त किया जाए।
- प्रदेश में ईपीएफ, ईएसआई व अन्य सामाजिक सुरक्षा कानूनों को सभी संस्थानों में कड़ाई से लागू किया जाए।
- पुरानी पेंशन नीति बहाल की जाए।
- 108 एंबुलेंस व एनएचएम के कर्मचारियों की सेवा नियमावली बनाई जाए, जीएमवीएन, केएमवीएन एवं पर्यटन विकास परिषद का एकीकरण किया जाए।
- परिवहन निगम को राजकीय किया जाए, प्रदेश में बसों का बेड़ा 2500 व परिवहन निगम में छह हजार से अधिक बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए।
- पूंजी विनिवेश बंद किया जाए, बंद पड़े उद्योगों और चीनी मिलों को फिर से संचालित किया जाए।
- शासन स्तर पर प्रदेश सरकार की ओर से राज्य सहकारी संघ, परिवहन निगम, चीनी उद्योग आदि में किए गए समझौतों का कड़ाई से पालन हो। जो पालन न करे, ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
- कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना हो। कारखानों में फिक्स टर्म कंडीशन व्यवस्था खत्म हो।
- भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध यूनियनों से प्रबंधन द्वारा वार्ता में किए जा रहे भेदभाव को समाप्त किया जाए। सिडकुल में श्रम कानूनों के पालन के लिए सक्षम त्रिपक्षीय समिति बनाई जाए।
- सेवानिवृत्त कार्मिकों को सेवानिवृत्ति की तिथि को ही ग्रेच्युटी, नगदीकरण आदि का लाभ दिया जाए।
- राज्य में लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे पर्वतीय क्षेत्र का पलायन रुके।
- दून में ऑटो चालकों का परमिट 40 किलोमीटर किया जाए, डीजल ऑटो की रिप्लेसमेंट खोली जाए।
- भवन निर्माण से जुड़े श्रमिकों के लिए गढ़वाल और कुमाऊं में एक-एक अस्पताल खोला जाए। श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन प्रार्थनापत्र मिलने के 30 दिन के अंदर श्रमिक कार्ड जारी किया जाए, रजिस्ट्रेशन कराने में लापरवाही कर रहे अधिकारियों की जांच करवाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले दून ऑटो रिक्शा यूनियन समेत कई संगठनों ने श्रमिक आक्रोश रैली निकाल सचिवालय कूच किया। भारी संख्या में पहुंचे लोगों को पुलिस सचिवालय गेट पर रोका, जिसके बाद प्रदर्शनकारी भड़क गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मुख्य सचिव उत्पल कुमार के साथ वार्ता हुई। जिसमें मुख्यमंत्री ने 23 अक्तूबर को उनकी मांगों की बाबत वित्त एवं श्रम सचिव और वित्त मंत्री के साथ बैठक कर समाधान का निकालने का आश्वासन दिया। वहीं, दूसरी ओर ऑटो यूनियन के दूसरे गुट की ओर से संचालन जारी रखने के चलते चक्काजाम प्रभावी नहीं रहा।
सोमवार सुबह भारतीय मजदूर संघ से जुड़े 40 ट्रेड यूनियनों से जुड़े लोग परेड ग्राउंड में एकत्र हुए। जिसमें दून ऑटो रिक्शा यूनियन, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, परिवहन निगम, ई-रिक्शा यूनियन समेत विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। यहां हुई जनसभा में भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री बृजेश उपाध्याय ने कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार श्रमिकों का शोषण कर रही है। संगठन मंत्री पवन कुमार ने कहा कि असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों का बहुत शोषण हो रहा है। श्रमिकों को सामूहिक बीमा, राज्य कर्मचारी बीमा योजना का लाभ दिया जाए, स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए।
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राज्य संगठन मंत्री बृजेश कुमार बनकोटी ने कहा कि ट्रेड यूनियनों में रजिस्ट्रेशन में गैरजरूरी जांच को आधार बनाकर देरी की जा रही है। प्राइवेट स्कूल, होटल, अस्पताल और लघु उद्योगों को सामाजिक दायरे में लाया जाए। उन्होंने आशा, आंगनबाड़ी, आशा फैसिलेटर को राज्य कर्मचारी घोषित करने की मांग की। साथ ही उनका न्यूनतम मानदेय 21 हजार रुपये करते हुए पेंशन का लाभ देने की बात कही।
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इसके बाद भारी संख्या में लोग सचिवालय पहुंचे। जहां पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की भी हुई। इस दौरान दून ऑटो रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष बालेंद्र तोमर, पूरन सिंह बिष्ट, गोविंद सिंह बिष्ट, रमेश चंद्र जोशी, सुशीला खत्री, अनिल राठी, पीसी चौबे, गणेश मेहरा, पंकज शर्मा, अनिल श्रीवास्तव, उमेश चंद जोशी आदि मौजूद रहे।
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दौड़ते रहे दूसरे यूनियन के ऑटो, नहीं हुई परेशानी
12 सूत्री मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध दून ऑटो रिक्शा यूनियन के पदाधिकारियों ने भी सचिवालय कूच किया। इस दौरान सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक चक्काजाम किया, लेकिन दूसरे गुट दून ऑटो रिक्शा यूनियन द्वारा ऑटो चलाए जाने के कारण चक्काजाम प्रभावी नहीं रहा। यूनियन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध दून ऑटो रिक्शा यूनियन की हड़ताल का प्रभाव लोगों पर नहीं पड़ने दिया गया। यूनियन से जुड़े ऑटो सुबह से ही चल रहे थे।
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स्कूली बच्चों को हुई परेशानी
सचिवालय के पास स्थित सेंट जोसेफ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को आंदोलन के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दोपहर जब भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में हजारों लोग सचिवालय गेट पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान स्कूल की छुट्टी हुई। भीड़ के चलते अभिभावक मुश्किल से अपने बच्चों को लेकर वापस घर पहुंचे।
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दून ऑटो रिक्शा यूनियन की मांगें
- फेयर मीटर की अनिवार्यता खत्म की जाए, अलग-अलग फ्यूल के रेट और माइलेज में अंतर के कारण एक रेट का मीटर लगाना सही नहीं है।
- डीजल ऑटो की रिप्लेसमेंट जल्द खोली जाए, देहरादून को छोड़कर प्रदेश में कहीं भी डीजल ऑटो की रिप्लेसमेंट कहीं पर बंद नहीं है।
- ऑटो के परमिट की परिधि 25 से बढ़ाकर 40 किलोमीटर किया जाए या एयरपोर्ट, सहस्त्रधारा, डाट काली मंदिर, हरबर्टपुर एवं कुठालगेट पर जाने की अनुमति दी जाए।
- ऑटो पार्किंग के लिए नगर निगम से 200 स्टैंड स्वीकृत किए जाएं।
- ऑटो का इंश्योरेंस फीस चार से नौ हजार हजार कम किया जाए, इसमें एक्सीडेंटल क्लेम एक से बढ़ाकर पांच लाख किया जाए।
- ओला टैक्सी की लोकल बुकिंग बंद की जाए।
- रेलवे स्टेशन पर ऑटो का पार्किंग शुल्क 1050 से घटाकर पूर्व की तरह 200 रुपये प्रति ऑटो किया जाए।
- ई-रिक्शा और ओला टैक्सी को ऑटो स्टेशनों से सवारी उठाने की अनुमति न दी जाए।
- ई-रिक्शा का संचालन नेशनल हाईवे एवं मुख्य मार्गों से बंद किया जाए, वहीं ई-रिक्शा का किराया 10 रुपये प्रति सवारी की जाए।
- ई-रिक्शाओं का रजिस्ट्रेशन तुरंत बंद किया जाए।
- ई-रिक्शाओं का सत्यापन कर व बेच नंबर देकर केवल इनके स्वामी को ही ई-रिक्शा चलाने की अनुमति दी जाए।
- राजधानी के अंदर शाम छह से सुबह छह बजे तक ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाई जाए।
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भारतीय मजदूर संघ की प्रमुख मांगें
- प्रदेश में श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाए।
- सुधारों के नाम पर श्रम कानूनों से छेड़छाड़ बंद हो।
- न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए, न्यूनतम वेतन कमेटी गठित की जाए।
- आंगनबाड़ी, आशा, भोजनमाता, दाई मां, ग्राम प्रहरी आदि को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। उन्हें ईपीएफ, ईएसआई से जोड़ा जाए।
- प्रदेश में ठेका प्रथा खत्म हो, नियमित नियुक्तियों के साथ ही मृतक आश्रित नियुक्ति रोक हटाई जाए।
- निर्धारित अवधि का रोजगार कानून समाप्त किया जाए।
- प्रदेश में ईपीएफ, ईएसआई व अन्य सामाजिक सुरक्षा कानूनों को सभी संस्थानों में कड़ाई से लागू किया जाए।
- पुरानी पेंशन नीति बहाल की जाए।
- 108 एंबुलेंस व एनएचएम के कर्मचारियों की सेवा नियमावली बनाई जाए, जीएमवीएन, केएमवीएन एवं पर्यटन विकास परिषद का एकीकरण किया जाए।
- परिवहन निगम को राजकीय किया जाए, प्रदेश में बसों का बेड़ा 2500 व परिवहन निगम में छह हजार से अधिक बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए।
- पूंजी विनिवेश बंद किया जाए, बंद पड़े उद्योगों और चीनी मिलों को फिर से संचालित किया जाए।
- शासन स्तर पर प्रदेश सरकार की ओर से राज्य सहकारी संघ, परिवहन निगम, चीनी उद्योग आदि में किए गए समझौतों का कड़ाई से पालन हो। जो पालन न करे, ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
- कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना हो। कारखानों में फिक्स टर्म कंडीशन व्यवस्था खत्म हो।
- भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध यूनियनों से प्रबंधन द्वारा वार्ता में किए जा रहे भेदभाव को समाप्त किया जाए। सिडकुल में श्रम कानूनों के पालन के लिए सक्षम त्रिपक्षीय समिति बनाई जाए।
- सेवानिवृत्त कार्मिकों को सेवानिवृत्ति की तिथि को ही ग्रेच्युटी, नगदीकरण आदि का लाभ दिया जाए।
- राज्य में लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे पर्वतीय क्षेत्र का पलायन रुके।
- दून में ऑटो चालकों का परमिट 40 किलोमीटर किया जाए, डीजल ऑटो की रिप्लेसमेंट खोली जाए।
- भवन निर्माण से जुड़े श्रमिकों के लिए गढ़वाल और कुमाऊं में एक-एक अस्पताल खोला जाए। श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन प्रार्थनापत्र मिलने के 30 दिन के अंदर श्रमिक कार्ड जारी किया जाए, रजिस्ट्रेशन कराने में लापरवाही कर रहे अधिकारियों की जांच करवाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।