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सीनियर डाक्टर के नहीं आने से गर्भ में ही हुई शिशु की मौत
Updated Sun, 23 Sep 2018 09:40 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर का स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग एक बार फिर लापरवाही के चलते चर्चाओं में हैं। यहां एक सप्ताह के अंदर सीनियर डॉक्टर के न आने की वजह से गर्भ में ही दो शिशुओं की मौत की खबर है। एक मामले में बेस टीचिंग अस्पताल प्रशासन को लिखित शिकायत मिल चुकी है, जबकि दूसरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केपी सिंह का कहना है कि उक्त मामले में प्राचार्य से जांच कमेटी गठित कराने का अनुरोध किया गया है।
मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पहले से बनी हुई है। बताया जा रहा है कि 12 से 17 सितंबर के बीच यहां दो घटनाएं हुई हैं, जिनमें प्रसव के लिए सीनियर डॉक्टर के न आने की वजह से महिला के गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई। दोनों ही मामलों में प्रशिक्षु और जूनियर डॉक्टरों के भरोसे गर्भवती महिलाओं को छोड़ दिया गया। उनके परिजनों ने सीजेरियन कराने की मिन्नतें की, लेकिन सीनियर डॉक्टर के न आने से सीजेरियन नहीं हो पाया। मजबूरन सामान्य प्रसव करवाए गए लेकिन नवजातों में जान नहीं थी। पहला मामला 12 सितंबर का है। श्रीनगर के डांग मोहल्ले की गर्भवती महिला की स्थिति को देखते हुए संयुक्त अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, लेकिन वहां कई बार बुलाने के बावजूद ऑन कॉल सीनियर डॉक्टर नहीं आई। इस मामले में परिजनों ने कोतवाली और अस्पताल प्रबंधन को लिखित शिकायत दी है। दूसरे मामले में लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया में यह मामला वायरल हो रहा है, जिसमें संबंधित डॉक्टर की काफी आलोचना हो रही है। पोस्ट के अनुसार, 17 सितंबर को पौड़ी से रेफर प्रसूता को यहां लाया गया, लेकिन समय पर सीनियर डॉक्टर नहीं आए। 18 की सुबह डॉक्टर आए, लेकिन वह ऑपरेशन करने के बजाय एक निजी पैथोलॉजी सेंटर में चले गए। अपराह्न 3.40 बजे जब गर्भस्थ शिशु की धड़कन बंद हुई, तो परिजनों ने अल्ट्रासाउंड कराया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
-एक मामले में लिखित शिकायत मिली थी। संबंधित डॉक्टर अवकाश पर हैं। प्राचार्य से अनुरोध किया गया है कि जांच कमेटी गठित की जाए। दूसरे मामले में यदि लिखित शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। विभाग को नोटिस जारी किया गया है कि किसी भी दशा में इमरजेंसी केस लेने से मना न किया जाए।
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- प्रो. केपी सिंह, एमएस बेस अस्पताल, श्रीनगर
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मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पहले से बनी हुई है। बताया जा रहा है कि 12 से 17 सितंबर के बीच यहां दो घटनाएं हुई हैं, जिनमें प्रसव के लिए सीनियर डॉक्टर के न आने की वजह से महिला के गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई। दोनों ही मामलों में प्रशिक्षु और जूनियर डॉक्टरों के भरोसे गर्भवती महिलाओं को छोड़ दिया गया। उनके परिजनों ने सीजेरियन कराने की मिन्नतें की, लेकिन सीनियर डॉक्टर के न आने से सीजेरियन नहीं हो पाया। मजबूरन सामान्य प्रसव करवाए गए लेकिन नवजातों में जान नहीं थी। पहला मामला 12 सितंबर का है। श्रीनगर के डांग मोहल्ले की गर्भवती महिला की स्थिति को देखते हुए संयुक्त अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, लेकिन वहां कई बार बुलाने के बावजूद ऑन कॉल सीनियर डॉक्टर नहीं आई। इस मामले में परिजनों ने कोतवाली और अस्पताल प्रबंधन को लिखित शिकायत दी है। दूसरे मामले में लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया में यह मामला वायरल हो रहा है, जिसमें संबंधित डॉक्टर की काफी आलोचना हो रही है। पोस्ट के अनुसार, 17 सितंबर को पौड़ी से रेफर प्रसूता को यहां लाया गया, लेकिन समय पर सीनियर डॉक्टर नहीं आए। 18 की सुबह डॉक्टर आए, लेकिन वह ऑपरेशन करने के बजाय एक निजी पैथोलॉजी सेंटर में चले गए। अपराह्न 3.40 बजे जब गर्भस्थ शिशु की धड़कन बंद हुई, तो परिजनों ने अल्ट्रासाउंड कराया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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-एक मामले में लिखित शिकायत मिली थी। संबंधित डॉक्टर अवकाश पर हैं। प्राचार्य से अनुरोध किया गया है कि जांच कमेटी गठित की जाए। दूसरे मामले में यदि लिखित शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। विभाग को नोटिस जारी किया गया है कि किसी भी दशा में इमरजेंसी केस लेने से मना न किया जाए।
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- प्रो. केपी सिंह, एमएस बेस अस्पताल, श्रीनगर