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मदर्स डे- की स्टोरी-फोटो पिता के जाने के बाद जज बनने में
Updated Sun, 13 May 2018 02:36 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
जज बनने तक के सफर में चेरब बत्रा के लिए मां रानी बत्रा ने अहम भूमिका निभाई। उनकी मां ने न केवल मां बल्कि पिता का रोल भी अदा किया। विपरीत परिस्थितियों में चेरब का हौसला बढ़ाया। मदर्स-डे की पूर्व संध्या पर चेरब ने अपनी मां को खुशी से गले लगा लिया। उनका कहना है कि मां से बढ़कर कोई नहीं।
देहरादून के प्रेमनगर निवासी चेरब बत्रा ने श्री गुरु नानक पब्लिक गर्ल्स इंटर कालेज से 12वीं पास की। इसके बाद डीएवी पीजी कालेज से बीकॉम, एमकॉम और एलएलबी पास की। चेरब के दोस्तों ने उन्हें जज बनने के लिए प्रेरित किया तो चेरब तैयारी में जुट गई। पूरे परिवार का सहयोग मिला। इस बीच जून 2017 में पिता अशोक कुमार बत्रा का निधन हो गया। चेरब के लिए पिता का अचानक यूं चले जाना बेहद कठिन समय था। पूरे परिवार पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। इन विपरीत परिस्थितियों में चेरब की मां मजबूत दीवार बनकर खड़ी हो गई। उन्होंने चेरब को हौसला दिया, सहारा दिया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। चेरब नए सिरे से पीसीएस-जे की तैयारी में जुट गई। फरवरी में आए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पीसीएस-जे परीक्षा परिणाम में चेरब का भी चयन हो गया और वह जज बन गई। चेरब का कहना है कि उनकी मां, उनकी न केवल जिंदगी बल्कि कॅरियर की भी सबसे मोटिवेटर महिला हैं। जज बनने के बाद भी वह मुझे लगातार बेहतर करने और पिता की दी हुई सीख पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देतीं हैं।
मां ने कहा, पीड़ितों का न्याय मिले
चेरब ने बताया कि उनकी मां पीड़ितों को न्याय की बेहद हिमायती हैं। उन्होंने सीख दी है कि बेटी जज बनकर इस बात का हमेशा ख्याल रखना कि पीड़ितों का न्याय मिले। अब चेरब बत्रा ने इस सीख को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। जल्द ही उनका प्रशिक्षण शुरू होने जा रहा है।
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जज बनने तक के सफर में चेरब बत्रा के लिए मां रानी बत्रा ने अहम भूमिका निभाई। उनकी मां ने न केवल मां बल्कि पिता का रोल भी अदा किया। विपरीत परिस्थितियों में चेरब का हौसला बढ़ाया। मदर्स-डे की पूर्व संध्या पर चेरब ने अपनी मां को खुशी से गले लगा लिया। उनका कहना है कि मां से बढ़कर कोई नहीं।
देहरादून के प्रेमनगर निवासी चेरब बत्रा ने श्री गुरु नानक पब्लिक गर्ल्स इंटर कालेज से 12वीं पास की। इसके बाद डीएवी पीजी कालेज से बीकॉम, एमकॉम और एलएलबी पास की। चेरब के दोस्तों ने उन्हें जज बनने के लिए प्रेरित किया तो चेरब तैयारी में जुट गई। पूरे परिवार का सहयोग मिला। इस बीच जून 2017 में पिता अशोक कुमार बत्रा का निधन हो गया। चेरब के लिए पिता का अचानक यूं चले जाना बेहद कठिन समय था। पूरे परिवार पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। इन विपरीत परिस्थितियों में चेरब की मां मजबूत दीवार बनकर खड़ी हो गई। उन्होंने चेरब को हौसला दिया, सहारा दिया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। चेरब नए सिरे से पीसीएस-जे की तैयारी में जुट गई। फरवरी में आए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पीसीएस-जे परीक्षा परिणाम में चेरब का भी चयन हो गया और वह जज बन गई। चेरब का कहना है कि उनकी मां, उनकी न केवल जिंदगी बल्कि कॅरियर की भी सबसे मोटिवेटर महिला हैं। जज बनने के बाद भी वह मुझे लगातार बेहतर करने और पिता की दी हुई सीख पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देतीं हैं।
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मां ने कहा, पीड़ितों का न्याय मिले
चेरब ने बताया कि उनकी मां पीड़ितों को न्याय की बेहद हिमायती हैं। उन्होंने सीख दी है कि बेटी जज बनकर इस बात का हमेशा ख्याल रखना कि पीड़ितों का न्याय मिले। अब चेरब बत्रा ने इस सीख को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। जल्द ही उनका प्रशिक्षण शुरू होने जा रहा है।
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