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ट्रैफिक की प्रयोगशाला बनीं राजधानी की सड़कें
Updated Wed, 04 Apr 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो /अमर उजाला/देहरादून।
राजधानी की सड़कें पिछले लंबे समय से यातायात सुधारने की प्रयोगशाला बनी हुई हैं। आए दिन पुलिस शहर की सड़कों पर नए-नए प्रयोग कर रही है। बिना तैयारी हो रहे इन प्रयोगों से व्यवस्था सुधरने के बजाय बिगड़ रही है। आलम यह है कि पूरे शहर में वाहन रेंग-रेंगकर चल रहे हैं। घंटों जाम में फंसकर लोगों का समय बर्बाद करने को मजबूर हैं। पुलिस जाम का स्थाई निदान खोजने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था पर अपना दिमाग खपा रही है। इससे अधिकांश प्रमुख चौराहों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। बहरहाल पुलिस यातायात सुधारने में पूरी तरह फेल साबित हो रही है।
एक घंटे में दो किमी का सफर
शहर में सबसे ज्यादा जाम भूसा स्टोर से लेकर घंटाघर तक लगता है। विशेषकर सुबह के समय इस सड़क से निकलना किसी चुनौती से कम नहीं। चौपहिया वाहनों को करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करने में एक घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है। भूसा स्टोर से सहारनपुर चौक, आढ़त बाजार, रेलवे स्टेशन, महाराजा अग्रसेन चौक, द्रोण चौक, तहसील चौक और दून अस्पताल चौक पर अक्सर जाम की स्थिति रहती है।
150 मीटर तय करने में लग रहे 15 मिनट
ऐसा नजारा आए दिन सर्वे चौक से डालनवाला थाने के आगे पेट्रोल पंप तक भी देखने को मिलेगा। यहां करीब 150 मीटर का सफर तय करने में लोगों को 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। यहां पर आए दिन लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए पुलिस कोई व्यवस्था तैयार नहीं कर पा रही है।
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द्रोण कट बंद होने से बढ़ी दिक्कत
पुलिस के असफल प्रयोगों में एक बड़ा उदाहरण गांधी रोड स्थित द्रोण कट भी है। पुलिस अफसरों की गाड़ियों को जाम में न फंसना पड़े इसलिए पुलिस ने द्रोण कट को बंद कर दिया। विरोध बढ़ा तो कुछ दिन बाद दोपहिया के लिए खोल दिया गया, लेकिन पुलिस ने इनामुल्ला बिल्डिंग, तहसील चौक और दून अस्पताल चौक पर अतिक्रमण हटाने और वाहनों के सुचारू संचालन के लिए व्यवस्था नहीं की। आलम यह है कि महाराजा अग्रसेन चौक से दर्शन लाल चौक पहुंचने में चौपहिया वाहनों को 20 मिनट से ज्यादा का समय लग जाता है, जबकि यह दूरी मुश्किल से आधा किमी है।
कभी वन-वे तो कभी टू-वे
यातायात व्यवस्था के नाम पर पुलिस और सीपीयू मनमानी कर रही है। कई सड़कों को एकाएक वन-वे घोषित कर चालान काटने शुरू कर दिए जाते हैं। कुछ सड़कें मनमाने ढंग से वन-वे घोषित कर दी जाती हैं। ऐसा ही नजारा आराघर मंदिर से धर्मपुर को जाने वाली सड़क पर अक्सर देखा जा सकता है।
चालान काटने तक सीमित सीपीयू
शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए तैनात की गई सीपीयू केवल चालान काटने तक सीमित है। चौराहों और सड़कों पर जाम खुलवाने के बजाय सीपीयू का फोकस चालान काटने पर रहता है। इसको लेकर स्थानीय लोग भी कई बार नाराजगी जता चुके हैं। इसके बावजूद सीपीयू की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है।
अकुशल यातायात कर्मी बने सिरदर्द
कई स्थानों पर यातायात नियंत्रण में विफलता का कारण अकुशल कर्मियों की ड्यूटी लगाना भी है। ये कर्मचारी अक्सर यातायात का दबाव संभालने में नाकाम रहते हैं। इसके चलते अक्सर जाम लगा रहता है। एमकेपी चौक पर अक्सर इस तरह की स्थिति के चलते लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
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हम यातायात व्यवस्था को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। सड़क के किनारे पार्किंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जगह-जगह पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। ज्यादा जाम वाले स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है। यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए आम लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है। इसके लिए आम लोगों को भी जागरूक होना होगा।
केवल खुराना, निदेशक, यातायात निदेशालय
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राजधानी की सड़कें पिछले लंबे समय से यातायात सुधारने की प्रयोगशाला बनी हुई हैं। आए दिन पुलिस शहर की सड़कों पर नए-नए प्रयोग कर रही है। बिना तैयारी हो रहे इन प्रयोगों से व्यवस्था सुधरने के बजाय बिगड़ रही है। आलम यह है कि पूरे शहर में वाहन रेंग-रेंगकर चल रहे हैं। घंटों जाम में फंसकर लोगों का समय बर्बाद करने को मजबूर हैं। पुलिस जाम का स्थाई निदान खोजने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था पर अपना दिमाग खपा रही है। इससे अधिकांश प्रमुख चौराहों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। बहरहाल पुलिस यातायात सुधारने में पूरी तरह फेल साबित हो रही है।
एक घंटे में दो किमी का सफर
शहर में सबसे ज्यादा जाम भूसा स्टोर से लेकर घंटाघर तक लगता है। विशेषकर सुबह के समय इस सड़क से निकलना किसी चुनौती से कम नहीं। चौपहिया वाहनों को करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करने में एक घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है। भूसा स्टोर से सहारनपुर चौक, आढ़त बाजार, रेलवे स्टेशन, महाराजा अग्रसेन चौक, द्रोण चौक, तहसील चौक और दून अस्पताल चौक पर अक्सर जाम की स्थिति रहती है।
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150 मीटर तय करने में लग रहे 15 मिनट
ऐसा नजारा आए दिन सर्वे चौक से डालनवाला थाने के आगे पेट्रोल पंप तक भी देखने को मिलेगा। यहां करीब 150 मीटर का सफर तय करने में लोगों को 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। यहां पर आए दिन लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए पुलिस कोई व्यवस्था तैयार नहीं कर पा रही है।
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द्रोण कट बंद होने से बढ़ी दिक्कत
पुलिस के असफल प्रयोगों में एक बड़ा उदाहरण गांधी रोड स्थित द्रोण कट भी है। पुलिस अफसरों की गाड़ियों को जाम में न फंसना पड़े इसलिए पुलिस ने द्रोण कट को बंद कर दिया। विरोध बढ़ा तो कुछ दिन बाद दोपहिया के लिए खोल दिया गया, लेकिन पुलिस ने इनामुल्ला बिल्डिंग, तहसील चौक और दून अस्पताल चौक पर अतिक्रमण हटाने और वाहनों के सुचारू संचालन के लिए व्यवस्था नहीं की। आलम यह है कि महाराजा अग्रसेन चौक से दर्शन लाल चौक पहुंचने में चौपहिया वाहनों को 20 मिनट से ज्यादा का समय लग जाता है, जबकि यह दूरी मुश्किल से आधा किमी है।
कभी वन-वे तो कभी टू-वे
यातायात व्यवस्था के नाम पर पुलिस और सीपीयू मनमानी कर रही है। कई सड़कों को एकाएक वन-वे घोषित कर चालान काटने शुरू कर दिए जाते हैं। कुछ सड़कें मनमाने ढंग से वन-वे घोषित कर दी जाती हैं। ऐसा ही नजारा आराघर मंदिर से धर्मपुर को जाने वाली सड़क पर अक्सर देखा जा सकता है।
चालान काटने तक सीमित सीपीयू
शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए तैनात की गई सीपीयू केवल चालान काटने तक सीमित है। चौराहों और सड़कों पर जाम खुलवाने के बजाय सीपीयू का फोकस चालान काटने पर रहता है। इसको लेकर स्थानीय लोग भी कई बार नाराजगी जता चुके हैं। इसके बावजूद सीपीयू की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है।
अकुशल यातायात कर्मी बने सिरदर्द
कई स्थानों पर यातायात नियंत्रण में विफलता का कारण अकुशल कर्मियों की ड्यूटी लगाना भी है। ये कर्मचारी अक्सर यातायात का दबाव संभालने में नाकाम रहते हैं। इसके चलते अक्सर जाम लगा रहता है। एमकेपी चौक पर अक्सर इस तरह की स्थिति के चलते लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
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हम यातायात व्यवस्था को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। सड़क के किनारे पार्किंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जगह-जगह पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। ज्यादा जाम वाले स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है। यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए आम लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है। इसके लिए आम लोगों को भी जागरूक होना होगा।
केवल खुराना, निदेशक, यातायात निदेशालय