{"_id":"b3decefdade7aa39a2bf07d335d24ddb","slug":"300-villages-did-not-migrate","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसरों की 'जिम्मेदारी' तीन सौ गांवों पर पड़ी भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसरों की 'जिम्मेदारी' तीन सौ गांवों पर पड़ी भारी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 10 Dec 2013 12:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जून में आई आपदा के बाद रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के करीब 300 गांवों को विस्थापित किया जाना है।
विज्ञापन
पढ़ें, दलाई लामा की सुरक्षा में थे इनके पूर्वज
इन गांवों को दूसरी जगह बसाने के लिए जमीन चिह्नित करने की जिम्मेदारी प्रभारी वन अधिकारी (डीएफओ) और संबंधित जिलाधिकारियों को दी गई थी। लेकिन दोनों अफसर मामले में अभी तक एक कदम भी आगे नहीं बढ़े हैं।
विज्ञापन
तीन सौ गांव के लोग हैं परेशान
इन अफसरों की सुस्ती का खामियाजा तीन सौ गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार ने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के लगभग 300 गांवों को विस्थापित करने के लिए शासन, प्रशासन और जंगलात महकमे को निर्देश दिया था।
विज्ञापन
पढ़ें, आपदा के जख्म भरेगी इन पौधों की महक
सबसे अहम भूमिका जिला प्रशासन और जंगलात महकमे की थी, क्योंकि सिविल सोयम और वन पंचायतों की जमीनों पर इन गांवों को विस्थापित किया जाना था। इस संबंध में मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने सभी जिलाधिकारियों और जंगलात महकमे को पत्र भेजा था।
इससे पहले और बाद में प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत ने भी संबंधित प्रभागीय वन अधिकारियों और जिलाधिकारियों को दो बार पत्र भेजे थे।
विस्थापन अधर में लटका
लेकिन डीएफओ और संबंधित जिलों के डीएम की लापरवाही की वजह से अभी तक जमीन के चिह्निकरण की प्रक्रिया भी आरंभ नहीं हो पाई है। ऐसे में इन गांवों का विस्थापन अधर में लटक गया है।
पढ़ें, विदेशी होकर निभा रहे भारतीय होने का कर्तव्य
प्रभागीय वन अधिकारियों को प्रमुख वन संरक्षक की ओर से कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। डीएम से तालमेल बनाकर जमीन चिह्नित की जानी है, लेकिन अभी तक कोई सूची उपलब्ध नहीं हो पाई है। सूची उपलब्ध होने के बाद भूमि स्थानांतरित करने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाना है।
- राजेंद्र महाजन, नोडल अधिकारी और अपर प्रमुख वन संरक्षक