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गाय को माता मानने वाला ही हिंदू : अग्रवाल
Updated Sat, 15 Sep 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
भारतीय गोक्रांति मंच की ओर से परेड ग्राउंड में आयोजित धेनुमानस गो कथा के पांचवें दिन विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल कथा सुनने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि गाय हमारी माता है और गाय को माता मानने वाला ही हिंदू है।
इसके बाद कथा वाचक आचार्य सीताशरण ने गाय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि देश में प्राचीन काल से ऋषि संस्कृति रही है और इस संस्कृति की मूल गो माता है। गाय में समस्त देवी, देवता निवास करते हैं। वेदों के अनुसार गाय की पीठ में ब्रह्मा, गले में विष्णु और मुख में भगवान शिव का निवास है। वहीं मध्य भाग में सभी देवताओं का वास है। इसलिए गाय को माता कहा गया है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की मूल में केवल गाय रही है। भले ही हमने इस महान संस्कृति को अपने अनुसार परिभाषित किया है, लेकिन हकीकत यह है कि गाय सर्वोपरि है।
उन्होंने धेनुमानस की महिमा सुनाते हुए कहा कि यह चमत्कारी ग्रंथ है। इसकी वजह से देश में गोमाता राष्ट्रमाता का नारा एक क्रांतिकारी नारे के रूप में गूंज रहा है। आगे कहा कि देश में बड़ी संख्या में भागवत कथाएं हो रही है लेकिन भागवत के मूल गाय को सबने छोड़ दिया है। सनातन धर्म के लोग बिखर गए है। लोगों ने अलग अलग देवताओं को पकड़ लिया है। देश की भलाई के लिए हमें गाय को बचाना होगा। क्योंकि जब गाय बचेगी, तभी हमारा अन्नदाता देश का किसान बचेगा।
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इस अवसर पर यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत, मनोहर लाल जुयाल, बलवीर सिंह पंवार, जागर सम्राट, प्रीतम भरतवाण, कुलानंद नौटियाल, सीता जुयाल, सूरतराम डंगवाल, गीताराम गौड, राकेश, डॉ. गिरीश मैठाणी, शशि भंडारी, सुधा ध्यानी, शैला शाह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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भारतीय गोक्रांति मंच की ओर से परेड ग्राउंड में आयोजित धेनुमानस गो कथा के पांचवें दिन विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल कथा सुनने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि गाय हमारी माता है और गाय को माता मानने वाला ही हिंदू है।
इसके बाद कथा वाचक आचार्य सीताशरण ने गाय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि देश में प्राचीन काल से ऋषि संस्कृति रही है और इस संस्कृति की मूल गो माता है। गाय में समस्त देवी, देवता निवास करते हैं। वेदों के अनुसार गाय की पीठ में ब्रह्मा, गले में विष्णु और मुख में भगवान शिव का निवास है। वहीं मध्य भाग में सभी देवताओं का वास है। इसलिए गाय को माता कहा गया है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की मूल में केवल गाय रही है। भले ही हमने इस महान संस्कृति को अपने अनुसार परिभाषित किया है, लेकिन हकीकत यह है कि गाय सर्वोपरि है।
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उन्होंने धेनुमानस की महिमा सुनाते हुए कहा कि यह चमत्कारी ग्रंथ है। इसकी वजह से देश में गोमाता राष्ट्रमाता का नारा एक क्रांतिकारी नारे के रूप में गूंज रहा है। आगे कहा कि देश में बड़ी संख्या में भागवत कथाएं हो रही है लेकिन भागवत के मूल गाय को सबने छोड़ दिया है। सनातन धर्म के लोग बिखर गए है। लोगों ने अलग अलग देवताओं को पकड़ लिया है। देश की भलाई के लिए हमें गाय को बचाना होगा। क्योंकि जब गाय बचेगी, तभी हमारा अन्नदाता देश का किसान बचेगा।
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इस अवसर पर यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत, मनोहर लाल जुयाल, बलवीर सिंह पंवार, जागर सम्राट, प्रीतम भरतवाण, कुलानंद नौटियाल, सीता जुयाल, सूरतराम डंगवाल, गीताराम गौड, राकेश, डॉ. गिरीश मैठाणी, शशि भंडारी, सुधा ध्यानी, शैला शाह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।