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केन्द्रीय विद्यालयों में होगा एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम
Updated Thu, 26 Jul 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
प्रदेश के केंद्रीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के तीन दिवसीय वार्षिक सम्मेलन के अंतिम दिन नूतन वर्ष में एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के आयोजन का फैसला लिया गया। सम्मेलन में गत वर्ष की रिपोर्ट की समीक्षा कर नूतन वर्ष की रूपरेखा तैयार की गई। सम्मेलन में प्रदेश भर के केंद्रीय विद्यालयों के 45 प्रधानाचार्यों ने हिस्सा लिया। स्कूलों में बच्चों के खेलकूद और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई। इस मौके पर सेवानिवृत्त होने वाले तीन प्रधानाचार्यों का भी सम्मान किया गया। इसमें हाथीबड़कला स्थित केवि नंबर वन की प्रधानाचार्य डॉ. इंद्रजीत, गोपेश्वर की पीएम वत्स और दून की केवि आईआईपी की सफलता विश्नोई शामिल हैं।
सुभाष रोड स्थित एक होटल में चल रहे तीन दिवसीय सम्मेलन का बुधवार को समापन हुआ। इस मौके पर उत्तरी जोन के उपायुक्त शोमित श्रीवास्तव ने बताया कि वार्षिक प्रधानाचार्य सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय स्कूलों में शिक्षा और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतरीन बनाना है। सहायक आयुक्त विनोद कुमार ने कहा कि इस साल पूरे देश में उत्तराखंड को तीसरा स्थान मिला है। इस साल केन्द्रीय विद्यालयों में शिक्षा में सुधार के लिए लगभग दो हजार प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार देहरादून टॉप पांच केंद्रीय विद्यालयों में शामिल हुआ है।
दून के केवि नंबर वन में बच्चों के लिए टच पैड
हाथीबड़कला स्थित केंद्रीय विद्यालय नंबर वन में कक्षा आठ और नौ के बच्चों के लिए स्कूल की ओर से टच पैड उपलब्ध कराए गए हैं। सहायक आयुक्त विनोद कुमार ने बताया कि टच पैड की सहयता से बच्चों को स्कूल में किताबें लाने की जरूरत नहीं होती। बच्चों को टच पैड स्कूल की ओर से निशुल्क उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड रीजन का पहला स्कूल है, जिसमें टच पैड की सहायता से बच्चों को शिक्षा दी जा रही है।
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पहाड़ों के केंद्रीय विद्यालयों का परिणाम रहता है खराब
प्रदेश के मैदानी इलाकों के मुताबिक पहाड़ी इलाकों का परीक्षा परिणाम खराब रहता है। यह बात उपायुक्त शोमित श्रीवास्तव ने कही। श्रीवास्तव ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में परीक्षा परिणाम खराब होने का मुख्य कारण स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। मैदानी इलाकों में तैनाती के लालच में कोई भी शिक्षक पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय तक नहीं रहना चाहता। इस समस्या को दूर करने के लिए भी काम किया जाएगा।
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प्रदेश के केंद्रीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के तीन दिवसीय वार्षिक सम्मेलन के अंतिम दिन नूतन वर्ष में एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के आयोजन का फैसला लिया गया। सम्मेलन में गत वर्ष की रिपोर्ट की समीक्षा कर नूतन वर्ष की रूपरेखा तैयार की गई। सम्मेलन में प्रदेश भर के केंद्रीय विद्यालयों के 45 प्रधानाचार्यों ने हिस्सा लिया। स्कूलों में बच्चों के खेलकूद और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई। इस मौके पर सेवानिवृत्त होने वाले तीन प्रधानाचार्यों का भी सम्मान किया गया। इसमें हाथीबड़कला स्थित केवि नंबर वन की प्रधानाचार्य डॉ. इंद्रजीत, गोपेश्वर की पीएम वत्स और दून की केवि आईआईपी की सफलता विश्नोई शामिल हैं।
सुभाष रोड स्थित एक होटल में चल रहे तीन दिवसीय सम्मेलन का बुधवार को समापन हुआ। इस मौके पर उत्तरी जोन के उपायुक्त शोमित श्रीवास्तव ने बताया कि वार्षिक प्रधानाचार्य सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय स्कूलों में शिक्षा और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतरीन बनाना है। सहायक आयुक्त विनोद कुमार ने कहा कि इस साल पूरे देश में उत्तराखंड को तीसरा स्थान मिला है। इस साल केन्द्रीय विद्यालयों में शिक्षा में सुधार के लिए लगभग दो हजार प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार देहरादून टॉप पांच केंद्रीय विद्यालयों में शामिल हुआ है।
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दून के केवि नंबर वन में बच्चों के लिए टच पैड
हाथीबड़कला स्थित केंद्रीय विद्यालय नंबर वन में कक्षा आठ और नौ के बच्चों के लिए स्कूल की ओर से टच पैड उपलब्ध कराए गए हैं। सहायक आयुक्त विनोद कुमार ने बताया कि टच पैड की सहयता से बच्चों को स्कूल में किताबें लाने की जरूरत नहीं होती। बच्चों को टच पैड स्कूल की ओर से निशुल्क उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड रीजन का पहला स्कूल है, जिसमें टच पैड की सहायता से बच्चों को शिक्षा दी जा रही है।
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पहाड़ों के केंद्रीय विद्यालयों का परिणाम रहता है खराब
प्रदेश के मैदानी इलाकों के मुताबिक पहाड़ी इलाकों का परीक्षा परिणाम खराब रहता है। यह बात उपायुक्त शोमित श्रीवास्तव ने कही। श्रीवास्तव ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में परीक्षा परिणाम खराब होने का मुख्य कारण स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। मैदानी इलाकों में तैनाती के लालच में कोई भी शिक्षक पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय तक नहीं रहना चाहता। इस समस्या को दूर करने के लिए भी काम किया जाएगा।